रेखा की नजर माहिरा की कलाई पर जमी रह गई. वो निशान अब साफ दिख रहा था—त्रिशूल जैसा चिन्ह, जिसके बीच हल्की- सी लाल आभा थी, मानो त्वचा के भीतर से चमक रही हो.
रेखा बुदबुदाई,
ये. ये तो बिल्कुल माँ भैरवी के चिन्ह जैसा है. लेकिन मेरी बेटी के हाथ पर ये कैसे?
डॉक्टर और नर्स भी पास आ गए. डॉक्टर ने ध्यान से देखा, फिर धीरे से बोले,
मैडम. मेडिकल साइंस में ऐसा कोई निशान नहीं होता. ये न इंजेक्शन का है, न किसी चोट का।
उसी पल माहिरा ने धीमी आवाज में कहा,
माँ.
रेखा घबराकर झुक गई.
हाँ बेटा, मैं यहीं हूँ।
माहिरा की आँखें खुली थीं, लेकिन उनकी गहराई कुछ और ही कह रही थी. उसकी आवाज बदली हुई थी—शांत, गंभीर.
माँ. जब मैं मर रही थी. सब अंधेरा हो गया था. फिर एक तेज रोशनी आई.
कमरे में सन्नाटा छा गया.
वहाँ एक स्त्री थी माँ. लाल वस्त्र. हाथ में त्रिशूल. बहुत भयानक. लेकिन उतनी ही करुणामयी।
माहिरा की उँगलियाँ उस निशान पर चली गईं.
उन्होंने कहा—‘अभी तुम्हारा समय नहीं आया. अन्याय सहने वालों को न्याय दिलाने के लिए तुम्हें लौटना होगा। ’”
रेखा की आँखों से आँसू बहने लगे.
तो. तो क्या माँ भैरवी ने तुम्हें वापस भेजा?
माहिरा ने हल्के से सिर हिलाया.
माँ. उन्होंने मुझे शक्ति दी है. ताकि जो मेरे साथ हुआ. वो किसी और के साथ न हो।
डॉक्टर के चेहरे पर डर और श्रद्धा दोनों थे.
मैडम. अगर ये सच है. तो ये सिर्फ चमत्कार नहीं. कोई उद्देश्य है।
बाहर से मंदिर की घंटियों की आवाज आई, जबकि अस्पताल के आसपास कोई मंदिर था ही नहीं.
रेखा ने काँपते हाथों से माहिरा को सीने से लगा लिया.
मेरी बेटी अब सिर्फ मेरी बेटी नहीं रही. शायद वो किसी की रक्षा के लिए लौटी है।
माहिरा की आँखों में हल्की लाल चमक उभरी, और उसके होंठों पर एक रहस्यमयी मुस्कान आई—
माँ. अब इंसाफ होगा।
कमरे की हवा भारी हो गई.
और कहानी ने एक नया, अलौकिक मोड ले लिया.
ठीक है. तो अब कहानी तीनों दिशाओं में एक- साथ बहेगी —
देवी भैरवी का अंश+ रैगिंग करने वालों का अंत+ न्याय की लडाई.
यहाँ से कहानी गहरी, डरावनी और शक्तिशाली होगी.
माहिरा की आँखों की लाल चमक धीरे- धीरे सामान्य हो गई. वो बेहोश- सी हो गई, जैसे शरीर थक कर सो गया हो. डॉक्टर ने उसकी नाडी Check की.
अब ये गहरी नींद में है. लेकिन इसके सारे vitals बिल्कुल नॉर्मल हैं,
डॉक्टर ने धीमी आवाज में कहा,
मैडम. जो भी हुआ है. वो हमारी समझ से बाहर है।
रेखा ने माहिरा के माथे पर हाथ रखा.
अगर मेरी बेटी किसी मकसद से लौटी है. तो मैं उसके रास्ते में नहीं आऊँगी।
(पहली दिशा – देवी भैरवी का अंश)
उसी रात रेखा को सपना आया.
एक श्मशान. जलती चिताएँ.
और बीच में खडी थीं माँ भैरवी—रक्तवर्णी नेत्र, गले में नरमुंडों की माला, लेकिन चेहरे पर करुणा.
रेखा,
आवाज गूँजी,
तेरी बेटी को मैंने मृत्यु से लौटाया है. उसमें मेरा अंश है, पर वो पूरी देवी नहीं है. वो अब भी इंसान है।
रेखा काँप गई.
माँ. मेरी बेटी सुरक्षित रहेगी न?
जब तक अन्याय है, तब तक उसे पीडा होगी,
भैरवी बोलीं,
लेकिन जो दोषी हैं. उनका अंत निश्चित है।
रेखा की नींद खुली.
उसके कानों में अब भी शब्द गूँज रहे थे—
‘न्याय निश्चित है। ’
(दूसरी दिशा – रैगिंग करने वालों का रहस्यमय अंत)
उधर Collage हॉस्टल में.
चार लडके—
वही जिन्होंने माहिरा को रोज मानसिक और शारीरिक यातना दी थी—
अचानक अजीब घटनाओं से घिरने लगे.
एक को रात में सपना आता—
एक लडकी खून से सनी, हाथ में त्रिशूल लिए.
दूसरे के कमरे में दीवार पर लाल निशान उभरने लगे—
ठीक वही निशान, जो माहिरा की कलाई पर था.
तीसरा लडका सीढियों से गिर गया, लेकिन गिरने से पहले उसने चीख कर कहा—
वो आ रही है. वो मर कर भी जिंदा है.
और चौथा.
वो अचानक पागल हो गया. बार- बार एक ही बात दोहराता रहा—
भैरवी. मुझे माफ कर दो.
Collage में डर फैल गया.
लेकिन कोई नहीं जानता था—
ये सब इत्तेफाक नहीं है.
(तीसरी दिशा – न्याय की लडाई)
माहिरा धीरे- धीरे ठीक होने लगी.
लेकिन अब वो पहले जैसी नहीं थी.
उसकी आँखें झूठ पहचान लेती थीं.
किसी के हाथ छूते ही उसे सच महसूस होने लगता.
रेखा उसे लेकर पुलिस स्टेशन पहुँची.
पहली बार माहिरा ने पूरी सच्चाई बयान की.
हर नाम. हर तारीख. हर बंद कमरा.
पुलिस चौंक गई—
तुम्हें ये सब कैसे याद है?
माहिरा ने शांत स्वर में कहा,
क्योंकि अब मैं डरती नहीं हूँ।
कोर्ट में केस गया.
सबूत एक- एक कर सामने आने लगे.
जो जिंदा बचे आरोपी थे, उन्होंने खुद गुनाह कबूल किया—
क्योंकि उन्हें हर रात वही सपना आता था.
अंतिम सीन (तीनों दिशाओं का संगम)
कोर्ट के बाहर.
रेखा ने माहिरा का हाथ पकडा.
उसकी कलाई का निशान हल्का- सा चमका. फिर शांत हो गया.
माहिरा ने आसमान की ओर देखा और बुदबुदाई—
माँ भैरवी. मैंने अपना वादा निभा दिया।
हवा में हल्की- सी गंध फैली—
अगरबत्ती और रक्त की मिली- जुली.
और कहीं दूर से आवाज आई—
तथास्तु।