Child marriage in Hindi Moral Stories by Nandini Agarwal books and stories PDF | बाल विवाह

Featured Books
Categories
Share

बाल विवाह

बाल विवाहमालकिन -रामकली बर्तन साफ हो गए हो तो तुम्हारी बेटी की शादी है यह शगुन लेती जाना अपने घर कुछ बर्तन साड़ी पैसे हैं मेरी तरफ से क्या हुआ मन उदास क्यों हैरामकली-दुनिया बनाने वाले क्या तेरे क्या तेरे मन में समाई तूने काहे को दुनिया बनाई   (गाना गुनगुनाती है ‌‌)मालकिन-खुश होना चाहिएबेटी का विवाह हैरामकली-बहु जी कुछ बातें याद आ गई घाव ताजा हो गई क्या बताऊं पूरी उम्र निकल गई तुम्हारी बर्तन  मांजते मांजते   अपना दर्द दबा कर रखामालकिन-बता दो काम छोड़ना है क्यारामकली-नहीं नहीं मुझे तुम्हारा काम नहीं छोड़ना जब तक शरीर साथ देगा तब तक काम करोगी तुम्हारी जैसी मालकिन बहुत कम मिलती है दयावान हम जैसों पर विश्वास करने वाली तुम्हारे सहारे से मेरी नैया पार हो गई पुराने कपड़े देती थी जिनको पहनकर  मैं अपने बच्चों को पहना कर तन ढका है खाना देती हो कभी सुबह का कभी शाम का काम करने के बाद चाय पीने को देखती हूं नहीं तो बहुत से घरों में चाय को भी टाला जाता है आज बताती हूं  बहु जी मेरा बाल विवाह हुआ मेरी उम्र 12 साल थी मर्द मेरा 20 साल का था     गोना 3 साल का हुआ था 50 साल की विवाहित जीवन में मैंने बहुत कुछ सहा है दर-दर की ठोकरें खाई हैमालकिन-तुम तो अपनी बेटी का विवाह बाल विवाह नहीं कर रहीरामकली-नहीं बहु जी मेरी बेटी की उम्र 18 वर्ष है सबसे छोटी है तीन बड़े भाई मालकिन अब तो  सरकार ने 21 बरस कर दी है बहु जी 3 साल मै इंतजार नहीं कर सकती अपनी जिम्मेदारी पूरी करना चाहती हूं जब मेरे फेरों के बाद विदा हो रही थी -पिता ने गोदी में लेकर बग्गी में बैठायातब मैं बहुत टूट फूट कर रो रही थी मन कर रहा था पिता के गले से हाथ ना छुडंआऊं यूं ही लिपटी रहूं मुझे अपने से दूर क्यों कर रहे हो बापू मेरा कसूर क्या है। क्या होती है शादी अनजान की मां का पल्ला काफी दूर तक मैंने छोड़ा नहीं था बग्गी चलने पर भी मुट्ठी में कसकर पकड़ रखा था।मालकिन-मजाक में और सुहागरात कैसी मनीरामकली- दुख भरी आवाज में बहू जी मेरे मन में खौफ़ था क्योंकिमैं शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार नहीं है यहां तक कि मेरा मासिक धर्म भी शुरू नहीं हुआ था। बालक बुद्धि जी मां बापू पीहर की बहुत याद सताती थी सहेली, बागों में गलियों मैं भागने दौड़ने को तरसती थी। ऐसा लगता था विवाह नहीं जुर्म कर दिया है। ससुराल मजा नहीं सजा की तरह कट रहा है।चूल्हे पर रोटी  बनाते-बनाते कई बार जलने से बच चुकी हूं कपड़े धोती यह बालक बुद्धि में साबुन के झागों से खेलती रहती थीजब कोई संग ना होता अकेले-अकेले लंगड़ी टांग खेलती तो कभी गिट्टू उछालती।रात होती तो यह मालूम नहीं था घर के लोगों को और मर्द को रोटी देनी है। लेटे-लेटे बिस्तर पर भूखे पेट कब नींद आ जाती सुबह आंख खुलती। मैं एक किसान की बेटी मेरा आदमी ट्रक ड्राइवर था। धीरे-धीरे समय बीत रहा था। उम्र का एहसास हो रहा था। मर्द मेरा कभी 8 दिन तो कभी 15 दिन कभी 1 महीने में घर आता था।जब मेरा मर्द कोठरी में होते हमारी बातें होती सास मेरे कोठे के  आगे खटिया डाल वही लेट जाती थी।अपने मर्द से यह कभी नहीं कह पाती थी कि तुम्हारे पीछे सास-नंद परेशान करती है। पीहर चिट्ठी लिखती तो इतनी पढ़ी लिखी नहीं थी शिक्षा के नाम पर अनपढ़ थी। वह दिन भी आया जब मैं पेट से हुई। मुझे यह कभी मालूम नहीं था पेट में बच्चा होने पर शारीरिक क्या लक्षण होते हैं। सरकारी अस्पताल की कर्मचारी नर्स महिला लोगों को जागरूक करती गर्भवती महिला टीका लगवा लें पास के सरकारी अस्पताल में सुविधा उपलब्ध है। रात में मेरे पेट में बहुत जोर से दर्द उठा बच्चा होने का मर्द बाहर था सास ने घर पर ही दाई से बच्चा पैदा कराया अस्पताल होने के बावजूद में चीख-चिल्ला रही थी। सास का ताना मिला मैंने तो औलाद पैदा नहीं करी तू ही कर रही है। हमने क्या कान में से निकाल दिए। लापरवाही से किसी की महिला मरती तो किसी का बच्चा पैदा होने के बाद मर जाता। मर्दबहार सेदाम कमा कर लाता और सास अपने पास रख लेती थी। खर्चे के नाम पर एक रुपया भी नहीं मिलता था। मां हूं बच्चे को रोता नहीं देख सकती थी। 4 बच्चे जिद करते मां हमें चीज खानी है पैसे दो। कभी गेहूं के बदले टॉफी खाते तो कभी-कभी कुल्फी साइकिल की घंटी बोली लेलो  गुड़िया के बाल खाने हैं मां-गुड़िया के बाल खाने हैं गुलाबी-गुलाबी । मैं अपने और बच्चों के झड़े हुए बाल रख लेती थी। उन बालों को  साइकिल वाले को दे कर गुड़िया के बाल खाते थे। एक बार  मेरे गांव से-मां बापू मिलने आए।काफी बातें हुई सारा दर्द मां बापू को बताया और कहा मैं पैसा कमाना चाहती हूं। बापू ने  कहा क्या काम कर सकती है। मैंने कहा खेतों में कटाई कर सकती हूं किसान की बेटी होने से यह हुनर तुम मेरे खून में समाया था। खेतों की ठेकेदारनी से बात करें जोकि 20 25 महिलाओं को जैसा मौसम होता या कटाई का बुवाई का हमसे काम कराती थी। कभी का लहाया काटने गेहूं काटने पिपरमेंट काटने ईख काटने कुछ पैसे आते रहे बच्चों का काम चलता रहा। खेतो की ठेकेदारनी गांव छोड़ गई तो हमारा काम भी छूट गया था। बर्तन मांजने का काम शुरू कर घर घर जाती बर्तन साफ करती थी समय सब करा लेता है। मेरा मर्द काफी दिन बाद घर वापस आया मुंह से शराब की बदबू आ रही थी।बाहर रहकर रातों-रात ट्रक चलाने में शराब की लत पड़ गई मैंने काफ़ी कहा शराब पीना छोड़ दो  पीकर ट्रक चलाना सही नहीं है। जब शराब की लत पड़ जाती है छुटने वाली कहां मेरा मर्द बोला तू और बच्चे मेरे साथ चल पहाड़ों पर पत्थर तोड़ने और उठाकर रखने का काम मिला है। मैंने हां कह दिया अपने मर्द के साथ रहना किसे अच्छा नहीं लगता। 4 साल के करीब हम रहे तंबू डेरा डाला आदमी लोग पत्थर तोड़ते काफ़ी औरतें पत्थर उठाकर रोड़ी बनाने के लिए इकट्ठा करती थीं। यह भी बहुत कष्ट देह काम था । हाथों में दर्द छाले पड़ जाते थे। भूखा पेट सब करा लेता है। मेरे मर्द को दर्द आया और कहां वापस गांव चलते हैं बच्चों के चोट लग सकती है। तुम्हारे हाथों के छाले मुझसे देखे नहीं जाते हैं। फिर वही काम  शुरु करा ट्रक चलाना -बर्तन-माजना। एक बार खबर आई मेरे आदमी की दुर्घटना से मौत हो गई। बच्चों से लिपट- लिपट कर रोई दूर ही सही है तो हमारा मर्द है। जिंदगी मे घाव पर  नमक छिड़कने का काम हो गया। कुछ समय के बापू ने मां को मेरे पास छोड़ दिया। कभी मां बच्चों के पास रहती 4 महीने फिर गांव चली जाती बापू के यहां दोनों जगह रहना बना रहता था। सालों गुजर गए। संसार में जो आया है वह जाएगा भी। मां बापू भी गुजर गए फिर मैं अकेली हो गई।बच्चों का मुंह देख कर मेरी हिम्मत बढ़ जाती इनके लिए जीना है। जो मेरे साथ हुआ इनके साथ नहीं होने दूंगी जीते जी उनको सरकारी स्कूल में पढ़ाया लिखाया जो शिक्षा मुझे नहीं मिली वह बच्चों को मिले यौन शिक्षा भी किताबों में दी जाती थी। किशोरावस्था में शारीरिक परिवर्तन होता है। वह कोई डर नहीं है। प्रकृति  की प्रतिक्रिया है जो कि सब के साथ होता है।आंगनबाड़ी में काम करने वाले छोटे-छोटे बच्चों को टीका पोलियो दवा सब जांच नें आती थी। क्या-क्या नहीं सहा अशिक्षा के कारणमालकिन-रामकली चाय पी लो ठंडी हो रही है।रामकली-चौकी हुई एक पल को लगा जैसे मेरे बच्चे अभी छोटे ना-समझ हैं।मालकिन-छोड़ो इन बातों को बीते हुए कल को अपनी बेटी को खुशी खुशी विदा करो हजारों आशीर्वाद के साथ।रामकली-बहु जी इस समान शगुन से ज्यादा मुझे इस बात की खुशी होगी तुम मेरी बेटी को आशीर्वाद देने आए।मुझे आप जैसी मालकिन मिली दुख दर्द बांटने वाली देखने वालों को लगे अभी इंसानियत जिंदा है। हम जैसों का ध्यान रखने वाला।मालकिन-जरूर आऊंगी।                                      

******************************************

Follow                  like.                    Share