लेखिका: [खुशबू✍️......
दुनिया की भीड़ में श्री खुद को हमेशा अकेला पाती थी। उसके विचार, उसकी पसंद और जीने का तरीका सबसे अलग था, शायद इसीलिए लोगों से उसकी पटरी कभी नहीं बैठी। रिश्तों के मामले में तो उसकी किस्मत और भी बेरहम निकली; उसने जिसे भी अपना समझा, वहां से उसे सिर्फ धोखा ही मिला। इन धोखों ने उसे और भी खामोश कर दिया था। अब उसकी दुनिया सिर्फ उसके रंगों, कूचियों और डिजाइनों तक सिमट कर रह गई थी।
श्री को यह मालूम नहीं था कि उसकी उंगलियों में एक ऐसा जादू है जो निर्जीव चित्रों में जान फूंक सकता है। वह जो भी डिजाइन करती, वह हकीकत बन जाता, लेकिन इस बात से वह पूरी तरह अनजान थी।
एक रात, जब वह बहुत उदास थी, उसने अपने मन की तन्हाई को कागज़ पर उतारना शुरू किया। उसने एक बहुत ही हैंडसम और गंभीर दिखने वाले लड़के का चित्र बनाया। उसने उसे एक बड़े ऑफिस के केबिन में बैठे हुए एक 'बॉस' के रूप में डिजाइन किया। थककर श्री की आँखें लग गईं और वह गहरी नींद में सो गई।
तभी कुछ अजीब हुआ। श्री ने खुद को उसी ऑफिस के केबिन में पाया जिसे उसने कुछ देर पहले ड्रा किया था। सामने वही लड़का बैठा था जिसे उसने बनाया था—आर्यन। सपने में वह आर्यन की असिस्टेंट थी। हकीकत की दुनिया के उलट, यहाँ आर्यन उसे बहुत सम्मान देता था। वह श्री के हर अनोखे विचार की तारीफ करता। धीरे-धीरे दोनों के बीच एक गहरा और सच्चा प्यार पनपने लगा। श्री को पहली बार महसूस हुआ कि कोई उसे बिना परखे, वैसा ही प्यार कर रहा है जैसी वह है।
हर रात श्री उस जादुई सपने का इंतज़ार करती। हकीकत में वह गुमसुम रहती, लेकिन सोते ही वह अपनी जादुई दुनिया की मलिका बन जाती। आर्यन और उसके बीच का प्यार हर गुजरते सपने के साथ बढ़ता जा रहा था।
लेकिन एक दिन एक बड़ा मोड़ आया। सपने में आर्यन ने श्री का हाथ पकड़कर कहा, "श्री, तुम बहुत अलग हो, क्या तुम हमेशा के लिए यहाँ मेरे पास नहीं रह सकतीं?" श्री का दिल भर आया, लेकिन तभी उसे याद आया कि यह सब तो बस एक चित्र का कमाल है। उसे डर लगने लगा कि कहीं यह सपना टूट न जाए।
अचानक एक ज़ोरदार आवाज़ के साथ श्री की नींद खुल गई। सुबह हो चुकी थी। उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे क्योंकि उसे लगा कि उसने अपने सच्चे प्यार को फिर से खो दिया। वह भारी मन से तैयार हुई और अपने नए जॉब के इंटरव्यू के लिए निकल गई।
जैसे ही वह इंटरव्यू देने के लिए ऑफिस के केबिन में दाखिल हुई, उसके होश उड़ गए। सामने वही केबिन था, वही खुशबू थी और सामने वाली कुर्सी पर वही चेहरा बैठा था—आर्यन। आर्यन ने फाइल से नज़रें हटाईं और श्री को देखकर एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा, "आओ श्री, मुझे लग ही रहा था कि तुम आज ज़रूर आओगी।"
श्री को अहसास हुआ कि उसका सपना टूटा नहीं था, बल्कि उसकी कला ने उसे उसकी असली मंज़िल और सच्चे प्यार से मिला दिया था।