"वक्त रेत की तरह हाथों से फिसल जाता है, पर पीछे छोड़ जाता है कुछ सुनहरी यादें। यहाँ मैं साझा करूँगी अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी के वो छोटे-छोटे और मासूम किस्से, जो कभी 'मक्खी जी' की दोस्ती में दिखते हैं, तो कभी खिड़की से आती गुनगुनी धूप में। यह मेरी डायरी का वो कोना है जहाँ बचपन की सादगी है, घर की प्यारी नोक-झोंक है और वो अनमोल पल हैं जिन्हें मैं वक्त की रफ़्तार से चुराकर सहेजना चाहती हूँ। आइए, मेरे साथ इस मीठे सफर का हिस्सा बनिए।"
✨️ "वक्त की रेत,ढेर सारी मासूमियत"✨️
आज सुबह जब मेरी आँख खुली, तो खिड़की से आती हुई सूरज की सुनहरी किरणों ने मन को एक अजीब से सुकून से भर दिया।
दिसंबर की कड़कड़ाती ठंड के बीच जब ऐसी गुनगुनी धूप खिलती है, तो लगता है जैसे प्रकृति हमें गले लगा रही हो। आज का आसमान भी कितना साफ और सुंदर था, जैसे किसी ने नीले कैनवास पर सफेद रुई के फाहे बिखेर दिए हों।
पर आज का दिन मेरे लिए सिर्फ मौसम की वजह से खास नहीं था, बल्कि इसलिए खास था क्योंकि आज मैंने अपने छोटे भाई के एक नए रूप को देखा।
हम अक्सर अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में इतने मसरूफ हो जाते हैं कि यह भूल ही जाते हैं कि हमारे आसपास के छोटे बच्चे कितनी जल्दी बड़े हो रहे हैं। वक्त रेत की तरह हाथों से फिसलता जा रहा है और हमें पता भी नहीं चलता।
Waqt kitni jaldi beet jata hai, pata hi nahi chalta. कल तक जो इतना छोटा सा था, आज वह मिट्टी में नन्हे हाथों से खुद पौधे लगा रहा है। उसने अपने लिए एक छोटा सा "Swing Garden" बनाया है। उसे कुदरत से इतना प्यार करते देख कर बहुत सुकून मिला।
कल तक जो सिर्फ खिलौनों से खेलता था, आज वह कुदरत को करीब से महसूस कर रहा है। उसकी आँखों में उन पौधों के लिए जो फिक्र और चमक थी, वह किसी कीमती हीरे से भी ज्यादा सुंदर थी। मुझे याद आने लगा कि कैसे कल तक वह मेरी उंगली पकड़कर चलता था, और आज वह अपनी एक छोटी सी दुनिया खुद बसा रहा है।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती! उसकी मासूमियत का अंदाज़ा तो आप उसके 'पेट एनिमल्स' (पालतू जानवरों) से लगा सकते हैं। जब मैंने उससे पूछा कि उसने अपने इस बगीचे में किसे रहने की जगह दी है, तो उसने बड़े गर्व से अपनी फौज दिखाई।
और उसके "Pets" की लिस्ट? जितनी मासूम है, उतनी ही मज़ाकिया भी!
एक नन्हा सा कछुआ (Turtle) 🐢
एक प्यारी सी मछली (Fish) 🐟
और हद तो तब हो गई जब मैंने देखा—एक डिब्बे में कैद... मक्खी! 🪰 😂😂😂
जहाँ हम मक्खियों से परेशान रहते हैं, हाथ मार कर उन्हें भगाते हैं, मेरा भाई उसे अपना दोस्त मानकर बैठा है। उसने डिब्बे में छेद किए हैं ताकि वह "मक्खी जी" साँस ले सकें! सच में, बच्चों का दिल कितना साफ होता है, उनके लिए हर जीव प्यारा है। क्या आपके भाई भी ऐसी ही अजीब पर प्यारी हरकतें करते हैं?
बचपन की ये छोटी-छोटी बातें ही तो घर को घर बनाती हैं। कभी-कभी लगता है काश यह वक्त यहीं थम जाए। वह मक्खी शायद उड़ जाएगी, पौधे बड़े हो जाएंगे, लेकिन भाई की यह मासूमियत हमेशा मेरे दिल के करीब रहेगी।
समय बहुत कीमती है, और ये छोटे-छोटे पल ही जिंदगी की असली कमाई हैं।
"जाते-जाते आपसे भी पूछना चाहूँगी— क्या आपके घर में भी कोई ऐसा नन्हा उस्ताद है, जिसने किसी अतरंगी चीज़ को अपना दोस्त बनाया हो?"
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