Unheard Battlefields in Hindi Anything by Yuvraj Chouhan books and stories PDF | Unheard Battlefields

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Unheard Battlefields

दुनिया को लगता है कि लड़का होना आसान है, पर सच बोलूं तो—आसान कुछ भी नहीं होता। लड़का भी थकता है, टूटता है, डरता है। बस फर्क इतना है कि उसे अपनी कमजोरी दिखाने की इजाजत नहीं।
उसे हर बात पर ताने मिलते हैं—
"तू बड़ा हो गया है संभल जा"
"भविष्य का क्या सोचा है?"
"मर्द बन, रो क्यों रहा है? तू लड़का है।"
कोई देखता नहीं पर एक लड़का अपने अंदर सैकड़ों लड़ाइयाँ लड़ता है।
Career का दबाव,
Parents का भरोसा,
Self-respect का डर,
और वो खामोश रातें—जिनमें वो खुद से ही हारता है।
कभी-कभी उसे अपने ही दोस्तों के बीच छोटा महसूस होता है क्योंकि उसकी जेब खाली होती है... पर हिम्मत फिर भी खाली नहीं होती।

एक लड़के की मुस्कुराहट के पीछे अक्सर उसकी जिम्मेदारियों का बोझ छिपा होता है। वह घर का स्तंभ बनने की कोशिश में अपनी मासूमियत कहीं पीछे छोड़ आता है। समाज उसे 'मजबूत' बनने की जिद में 'इंसान' होना भुला देता है।"

लेकिन
इन सब के बीच एक दिन एहसास होता है कि दुनिया की सबसे भारी लड़ाई लड़कियां लड़ती हैं। उनके लिए ज़िंदगी बचपन से ही समाज ने मुश्किल कर दी है। उन्हें हर बात पर बोला जाता है—
"यह मत करो," "वो मत पहनो," "लोग क्या कहेंगे," "परिवार की इज्जत तुम्हारे हाथ में है।"
सोचो, जब एक लड़की सड़क पर चलती है, तो उसके हर कदम पर कई निगाहें होती हैं। कुछ साफ, कुछ गंदी, और कुछ ऐसी नजरें जो खतरा लगती हैं। खासकर वह लोग जो लड़कियों पर comments पास करते हैं, क्या उन्हें इतना भी एहसास नहीं कि जिस लड़की को वो घूर रहे हैं, उसी जैसी कोई उनकी बहन भी है। ये कैसी दोगली सोच है जो खुद के घर की औरतों को देवी समझते हैं, वहीं बाहर की लड़कियों को शिकार?
लड़की कोई मजाक नहीं है। वो हर दिन इस समाज की बदसूरती से लड़ती है, और फिर भी सब भूल कर मुस्कुराती है। यह उसके हौसले की ताकत है, ना कि इस दुनिया का दिया हुआ आराम।
वो टूटती है, मगर बिखरती नहीं।
वो रोती है, मगर हार मानने का नाम नहीं लेती।
उसके सपने उसके अंदर की आग हैं, और ये आग किसी की गंदी सोच से बुझने वाली नहीं है।
अगर कोई लड़का सच में खुद को अच्छा समझता है, तो उसे लड़की को कमज़ोर नहीं, एक योद्धा देखना चाहिए।
मैं लड़कियों की इज्जत सिर्फ इसलिए नहीं करता कि मुझे सिखाया गया है, बल्कि इसलिए भी करता हूँ क्योंकि एक लड़का होने की वजह से मैंने करीब से समाज की विचारधाराओं को देखा है। मेरे लिए हर वो लड़की योद्धा है जो कभी टूटती नहीं और ना ही घर वालों की इज्जत व संस्कारों को कभी झुकने देती। मैं इनके लिए दुनिया से भी लड़ सकता हूँ।
कभी-कभी तो लगता है कि जो लड़कियां अपने घर के संस्कारों व घर वालों का ख्याल करती हैं, वो मेरे लिए देवी समान हैं। उनके चरणों की धूल भी मेरे लिए सम्मान के समान है।

लड़कियां सिर्फ घर की चारदीवारी नहीं, बल्कि उस घर की रूह होती हैं। समाज की पाबंदियों और सुरक्षा की चिंता के बीच भी वे अपने सपनों की उड़ान भरना जानती हैं। उनका मौन उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि उनका धैर्य है।"

"In the end the real victory belongs to the one who sees a person not by gender but by their struggles and their strength."

Written by:
Yuvraj Singh Chauhan