Me and My Feelings - 141 in Hindi Poems by Dr Darshita Babubhai Shah books and stories PDF | में और मेरे अहसास - 141

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में और मेरे अहसास - 141

चलन 

हौसलों के चलन से जिन्दगी का सफ़र काट रहे हैं l

कंधे से कंधा मिलाकर सब दुःख दर्द बांट रहे हैं ll

 

जीवन में आते हुए सभी उतार चढाव को पार करने l

गिला शिकवा मिटाकर सभी साथ साथ रहे हैं ll

 

जब से होश संभाला तब से जा बैठे हैं पनाहों में ll

रेस की बाजी जिताने में खालिक के हाथ रहे हैं ll

 

मुख्तसर से मुख्तसर सी कहानी लिख रखेगे कि 

होशों हवास मे किये हुए सब वायदे याद रहे हैं ll

 

ख्वाबों और खयालों से बाहिर निकलकर जो l

दिल से निभाये हुए रिश्ते नाते ही खास रहे हैं ll

१६-१२-२०२५ 

गगन 

हौसला गगन छूने का रखते हैं l

लोग दिवाना पगला कहते हैं ll

 

जिगर को फौलाद कर दिया कि l

ज्यादातर आसमाँ में रहते हैं ll

 

ऊंचाइयों को छूने के वास्ते तो l

ऊंची बयार के साथ बहते हैं ll

 

सखी मंज़िल को पाने के लिए l

तेज हवाओं को भी सहते हैं ll

 

विश्वास की डोर में बंधकर l

पतंग का पहनावा पहते हैं ll

१७-१२-२०२५ 

अगन 

दिल से हौसलों की अगन को बुझने ना दिया l

मुश्किलों में भी जिंन्दगी को रुकने ना दिया ll

 

बड़ी तैयारी कर के आये थे बैचेनी बढ़ाने को l

दुश्मनों को चैन औ सुकून को लुटने ना दिया ll

 

अडिग मन करके आगे ही आगे बढ़ते गये औ l

कोशिशों औ अरमानों को कभी झुकने ना दिया ll

 

खुद को देते रहे ताकत मजिल तक पहुंचने को l

कठीन सी रहगुज़र हिम्मत को टुट ने ना दिया ll

 

आगे बढ़ने का रास्ता ख़ुद ही तलाश किया कि l

सखी किसी को भी कुछ भी पुछने ना दिया ll

१८-१२-२०२५ 

नयन  

हौसलों की लगन को बताएं कैसे?

ओ अरमानों का ढोल बजाएं कैसे?

 

कहीं ज़माने की बुरी नजर ना लगे l

घर आँगन खूबसूरत सजाएं कैसे?

 

रंगबरंगी पिचकारी भर तो ली पर l

बिना साजन के होली मनाएं कैसे?

 

पहले से नयनों में समाया है कि l

और कोई निगाहों में समाएं कैसे?

 

हाथ छोड़ने को तैयार नहीं है तो l

प्यारी महेंदी हाथों में लगाएं कैसे?

१९-१२-२०२५ 

सपन 

मिलन का सपन दिल को करार दे गया l

वक्त से पहेले ही पास सजन के ले गया ll

 

इश्क़ ने दिवाना बनाकर रख दिया है कि l

मोहब्बत के वास्ते रिश्तों नातो से गया ll

 

मन ने तेज दोड़ लगाकर बिना तन के l

जहां तय हुआ था मिलना, वहीं पे गया ll

 

आगे से जल्द मुलाकात जिद ना करना ये l

जालिम ने कसम क्या दी, रूक में गया ll    

 

भरी महफ़िल में इशारों ही इशारों में l

प्यार करते है ये जताकर चैन दे गया ll

२०-१२-२०२५ 

सपन

सपन के हौसलों ने दिल बाग बाग कर दिया l

खुशहाल जिन्दगी की उम्मीदों से भर दिया ll

 

जो होने वाला है उसकी खबर अंतर देते हुए l

आने वाले समय का पहले से ही सगड़ दिया ll

 

 

२१-१२-२०२५ 

 

 

दिसंबर की सर्दी

फूल गुलाबी दिसंबर की सर्दी में फिजाओ में रंगत छाई हैं l

खूबसूरत हसीन महबूबा के गुलाबी गालों पर लाली लाई हैं ll

 

साल का आखिरी माह ढ़ेर सारी यादे पीछे छोड़ जायेगा l

नई भोर के आगमन के ख्याल से अजीब सी खुशी पाई हैं ll

 

तेज ठंड के साथ हमसफर का प्यारा साथ ऊपर से l

नये साल नई उम्मीद के साथ सुनहरी खुश खबर आई हैं ll

 

अगन बरसाती गर्मियों से छुटकारा पाकर मस्ती में l

पंखीओ ने ठिठुरती बयारो में मधुर राग रागिनी गाई हैं l

 

घर में सब लोग चादर ओढ़े चैन और सुकून से सोये ओ l

तन मन को शांति मिलने से दिसंबर की सर्दी भाई हैं ll

२२-१२-२०२५ 

माहिर 

मुस्कराते हुए दर्दों गम छुपाने में माहिर हो गये हैं l

दिखावे के खुश होना दिखाने में माहिर हो गये हैं ll

 

सख्त जिन्दगी हररोज इम्तिहान लेती ही रहती हैं l

जख्मों के निशान को मिटाने में माहिर हो गये हैं ll

 

देखते है कोई कैसे और किस तरह बिगड़ेगा लो l

हाथों में प्यारा नाम लिखाने में माहिर हो गये हैं ll

 

कई दिनों से कोसों दूर जा बैठे है और मेसेज में l

जुदाई में उदास मन को हँसाने में माहिर हो गये हैं ll

 

प्यार की फ़सल को बहुत सम्हालना पडता है तो l

रूठे सजन के दिल को मनाने में माहिर हो गये हैं ll

२३-१२-२०२५ 

ख्याइशें

ख्याइशें चली गई दिलासा दे कर l

प्यारी उम्मीदों का खिलौना दे कर ll

 

ताउम्र का साथ रहना था पर वो l

चल दिये दो पल सहारा दे कर ll

 

वाईज ने खूब इंसानियत निभाई कि l

खानाबदोश किया किराया दे कर ll

 

मतलबी जहाँ में कोई दानवीर नहीं l

ईश ने उपकार किया निवाला दे कर ll

 

तेज बयार में फंसी हुई कश्ती को l

बचाया सलामत किनारा दे कर ll

खानाबदोश-बेघर 

वाईज- शुभचिंतक 

२४-१२-२०२५ 

तक़दीर

जिस को भी चाहा हमारा ना हो सका l

उम्र भर के लिए सहारा ना हो सका ll

 

होंटों पे मोहब्बत के फ़साने आये थे कि l

हँसना किस्मत को गवारा ना हो सका ll

 

कश्ती उजड़ी हुई एक सराए की तरह है l

साहिल समंदर का सहारा ना हो सका ll

 

तक़दीर तो देखो ईश ने लिखी है कि l

प्यार का साक्षी ज़माना ना हो सका ll

 

उसे पता ही नहीं है कि प्यार की बात l

दिल की लगी को बताना ना हो सका ll

२५-१२-२०२५ 

सहर

सुहानी सहर जल्द ही होगी मुझको इशारा 

मिल गया हैं l 

जिंदगी को आसानी से जीने का सहारा  मिल गया हैं ll

 

ईश का शुक्रिया करते है दिल की तसल्ली के लिए भी l

उसके इशारे से मुकम्मल आसमान सारा मिल गया हैं ll

 

महेरबानी हुई है दिलरुबा की के पास आने की बात कही l

मिलने का वादा मिला तो जीवन दोबारा मिल गया हैं ll

 

आज शादाब-ओ-शगुफ़्ता खूबसूरत गुलशन मिल गया कि l

जैसे के तोहफ़े में प्यारी सौगात का सितारा मिल गया हैं ll

 

तमाम उम्र गुजारी है मुस्कराहट की ख़्वाहिश में अब जाके l

खुशी इस बात की कि बैठे बिठाए ज़माना मिल गया हैं ll

२६-१२-२०२५ 

तन्हा 

एक उम्र गूजर जाती है घर बनाने में l

जिन्दगी खर्च हो जाती घर सजाने में ll

 

गुलशन का मौसम अचानक बदला l

दिल खाली हुआ अपनों के जाने में ll

 

तन्हाई में धड़कने सुनाई देती है कि l

किसीकी नजर लगी आशियाने में l

 

तन्हाई में होशो हवास खो बैठे है l

बहुत देर कर दी मेहरबा आने में ll

 

बड़े ज़ालिम होते है दुनिया वाले l

देर नहीं करते तोहमत लगाने में ll

२७-१२-२०२५ 

तन्हाई

तन्हाई से शिकायत है तो मर क्यूँ नहीं जाते l

इतने ही थक गये हों तो गुज़र क्यूँ नहीं जाते ll

 

किसे घबराते हो और किस बात का है डर l

नजरों से उतरे दिल से उतर क्यूँ नहीं जाते ll

 

किसीकी उम्मीद लगाएं बैठे हो और क्यूँ?

पलकों से ख्वाब सारे बिखर क्यूँ नहीं जाते ll

 

हर बार इक आख़िरी प्रयत्न कर लेते है कि l

कोशिशों के बाद हाल सँवर क्यूँ नहीं जाते ll

 

क्या रखा है झूठी शान और अहंकार में भला l

जहां चैन औ सुकून है उधर क्यूँ नहीं जाते ll

 

वाइज पीने का भी कोई सलीका होता है तो l

मयखाने बंध हो गये तो घर क्यूँ नहीं जाते ll

 

बड़ी शिद्दत से मिलने की तड़प हुई है तो l

पास जाना चाहते है मगर क्यूँ नहीं जाते ll

२८-१२-२०२५ 

सर्दियों में धूप

सर्दियों में धूप के ज़्यादा उजाले न रहेंगे l

गर्दिश में वाईज के हाथ में पियाले न रहेंगे ll

 

शहर भर चाहे जितनी भी रोशनी कर लो l

देर तलक उजियारे देखने वाले न रहेंगे ll

 

सब खेल पकडे रखने का ही जहाँ में l

जानेवालों को छोड़ देंगे तो छाले न रहेंगे ll

 

खूबसूरत कायनात की तमन्ना है कि l

दिल में ईमानदारी है तो ताले न रहेंगे ll

 

कभी ना कभी तो ख़ुद जीना पड़ता है l

कोई किसीको ताउम्र सँभाले न रहेंगे ll

२९-१२-२०२५ 

कोहरा 

दिल में यादों का कोहरा छाया हैं l

तबसे दिल ने सुकून ना पाया हैं ll

 

गम के घने बादलों घेर कर वो l

साथ अपने अश्कों को लाया हैं ll

 

घेरी उदासी ने घेर लिया चारो ओर l

फिझाओ ने ग़म का राग गाया हैं ll

 

रूदाद-ए-ग़म-ए-इश्क़ है ताज़ा l

लगे है हर पल घेरे कोई साया हैं ll

 

शम-ए-सर-ए-महफ़िल सजाना l

बाद मुद्दतों के पैगाम आया हैं ll

३०-१२-२०२५ 

अवसान 

साल २०२५ अवसान हुआ तभी २०२६ का आगमन होगा l

क़ायनात का चक्र चलता ही रहता है यहीं आदतन होगा ll

 

दुनिया उसूल है जो दिखता है वहीं बिकता है इस लिए l

जो बड़े लोग करेंगे उसीका छोटे लोगों से आचरण होगा ll

 

सुनो रुपिया पेड़ पर हीं उगते है या आसानी नहीं मिलते हैं l

जो जितनी मेहनत करेगा उसका उतना ही आमदन होगा ll

 

कोई अकेला आगे बढ़कर ख़ुद का विकास नहीं कर सकता l

जिंदगी आसानी से जीने को एकदूसरे पर आलंबन होगा ll

 

अकेलेपन और तन्हाई की आदत पड़ चुकी है अब तो l

यादों को बोलो चली जाए लौटकर वर्ना जागरण होगा ll

३१-१२-२०२५ 

नूतन

नूतन शहर नई उम्मीदों लेकर आई हैं l

दिल ने चैन औ सुकून की साँस पाई हैं ll