the happy Life in Hindi Love Stories by Mini Dj books and stories PDF | प्यार और नोक झोंक - हैप्पी लाइफ

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प्यार और नोक झोंक - हैप्पी लाइफ





सुबह की ठंडी-ठंडी हवा खिड़की से होती हुई कमरे में आ रही थी। हल्की-हल्की धूप पर्दों को चीरते हुए सीधे बिस्तर पर फैल रही थी। उसी धूप के साथ शालिनी की आवाज़ गूंजी—

“उठ जा नालायक, सुबह हो गई है!”

निकी ने कंबल और कसकर खींच लिया और उनींदी आवाज़ में बोली,

“पापा… देखो ना मम्मा को।”

शालिनी ने झुककर कंबल खींच लिया।

“उठने की जगह पापा-पापा कर रही है। चल उठ!”

निकी बैठते हुए बोली,

“मम्मा, आप भी ना… इतनी जल्दी कौन उठता है?”

शालिनी कंबल समेटते हुए बोली,

“तू नहीं उठती होगी, बाकी सब उठ जाते हैं। चल, जाकर नहा ले।”

निकी कुछ देर बिस्तर पर पड़ी रही, फिर उठकर नहाने चली गई।

जब बाहर आई तो शालिनी नीचे जा चुकी थीं। निकी आईने के सामने खड़ी हो गई और अपने बाल संवारने लगी। उसके लंबे, घने बाल कमर से नीचे तक आते थे। पतला-सा सुडौल शरीर, गोरे से भी निखरा रंग, छोटी-छोटी आंखें और नाक—वो खुद को कुछ पल निहारती रही, फिर कमरे से बाहर निकल गई।

नीचे हॉल में शालिनी सोफे पर बैठी थीं और उनके पास आकाश अख़बार पढ़ रहे थे।

निकी दौड़कर उनके पास गई।

“पापा, गुड मॉर्निंग!”

आकाश मुस्कुराए।

“गुड मॉर्निंग गुड़िया। आज इतनी जल्दी उठ गई?”

निकी ने मम्मा की ओर देखा।

“पापा, उठी नहीं… मम्मा ने ज़बरदस्ती उठाया है। इतनी ठंड में भी रोज़ जल्दी उठा देती हैं।”

शालिनी बोलीं,

“ओह! ऐसी बात है? कल से आराम से सोना।”

निकी की आंखें चमक उठीं।

“सच?”

शालिनी ने मुंह बनाते हुए कहा,

“तू सच में नालायक की नालायक है। अपने भाई से कुछ सीख—सुबह जॉगिंग के लिए जाता है।”

निकी बोली,

“ठीक है मम्मा, भाई से सीखूंगी… फिर मुझे भी पूरा दिन बाहर घूमने देना।”

शालिनी सिर हिलाते हुए बोलीं,

“तुझे समझाना मेरे बस की बात नहीं है।”

तभी दरवाज़ा खुला और एक लंबा-चौड़ा लड़का अंदर आया—विशाल। वो आकर सोफे पर बैठ गया।

“आ गया विशाल?” शालिनी बोलीं।

“हाँ,” कहकर वह रुमाल से मुंह पोंछने लगा।

शालिनी ने निकी से कहा,

“जा, भाई के लिए एक गिलास पानी ले आ।”

निकी ने मुंह बनाकर कहा,

“मैं क्यों लाऊँ? खुद ले लेगा।”

“मैंने कहा ना,” शालिनी सख़्त हुईं।

निकी पानी लाकर विशाल को दे गई और फिर पापा के पास बैठते हुए बोली,

“पापा, आज मेरी फ्रेंड वैशाली का बर्थडे है। उसके लिए गिफ्ट लेना है… आप चलेंगे ना?”

आकाश बोले,

“आज दफ़्तर में बहुत काम है। ये नालायक जाएगा तेरे साथ।”

निकी ने विशाल को घूरा।

“नालायक!”

विशाल हँसते हुए उसके बाल खींचने लगा, लेकिन निकी तुरंत पापा के पास आ गई।

“पापा देखो!”

शालिनी बोलीं,

“निकी, अपने बड़े भाई से ऐसे बात करते हैं? और विशाल, इसे ले जाना और जो गिफ्ट चाहिए दिला देना।”

“ठीक है माँ,” विशाल बोला, “और मुझे भी कुछ लेना है, एक्स्ट्रा पैसे दे देना।”

शालिनी ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा,

“ले आना।”

निकी तुरंत बोली,

“पापा, इसे कह देना कि मैं जो कहूँ वही दिलाए। ये मेरे पैसे बचाकर खुद रख लेता है।”

आकाश ने विशाल को देखा।

“सच है?”

“नहीं पापा,” विशाल बोला, “ये चुहिया झूठी है।”

“झूठे तुम हो!” निकी बोली।

खाने के बाद दोनों मॉल के लिए निकले।

रास्ते भर निकी कुछ न कुछ बोलती रही और विशाल अंदर-ही-अंदर पकता रहा।

मॉल में विशाल की एक दोस्त वर्षा मिली।

“हाय विशाल!”

“हाँ, कुछ काम था,” विशाल बोला।

“चलो साथ में शॉपिंग करते हैं।”

विशाल ने निकी की तरफ देखा।

“नहीं, आज इस चुहिया के साथ आया हूँ।”

निकी भड़क गई।

“पापा को बताऊंगी!”

आधा दिन मॉल घूमने के बाद आखिरकार निकी ने एक ड्रेस पसंद की।

“हो गया?” विशाल बोला।

“हाँ।”

“तो अब घर चलो। और भगवान के लिए, अगली बार मेरे साथ मत आना।”

रात को पार्टी के बाद, घर लौटते वक्त निकी ज़िद करने लगी बाइक चलाने की।

“सिर्फ़ थोड़ी सी,” उसने कहा।

विशाल ने गहरी सांस ली।

“ठीक है… लेकिन ध्यान से।”

बाइक थोड़ी आगे बढ़ी, फिर रुक गई।

“देखा, तेरे बस की नहीं,” विशाल बोला।

निकी मुस्कुराई।

“कल फिर सिखाना।”

विशाल सिर हिलाता हुआ बाइक स्टार्ट करता है और दोनों घर की ओर निकल जाते हैं।