Raaz in Hindi Horror Stories by Nayantara books and stories PDF | Raaz

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Raaz

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ये कहानी है बनारस से आई 'कुहू' की जो मुम्बई आई है अपने बड़े बड़े सपने लेकर लेकिन यहाँ आने के बाद उसे ढेरों मुशिकलों और मुसीबतों का सामना कर उसे एक Tv सीरीज में मिलता है heroin का role साथ ही उसके साथ उसके सीरीज का male lead होता है जाना माना परिवार कपूर परिवार का छोटा बेटा अयांश कपूर जो एक अकडू खड़ूस और बदतमीज इंसान होता है फिर भी कुहू बिना किसी पर ध्यान दिए मन से बस अपनी सूटींग पर ध्यान देना चाहती थी लेकिन जिस दिन से सूटींग स्टार्ट होता है उस दिन से उसे कोई आहट, कोई आवाज, कोई खटखटाह, कोई परछाई, कोई साया उसके आस पास महसूस होता है जिसे देख वो हर बार चिल्लाती "कौन है? ..............





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कुहू की आँखें सुबह की पहली किरण के साथ खुलीं. उसका छोटा- सा किराए का अपार्टमेंट, जो मुंबई के अंधेरी इलाके में एक पुरानी बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर था, अभी भी सुस्त सुबह की चुप्पी में डूबा हुआ था. खिडकी से आती हल्की हवा में पर्दे धीमे- धीमे हिल रहे थे, और बाहर सडक पर सुबह की भागदौड शुरू होने की आवाजें गूंज रही थीं. कुहू ने बिस्तर पर लेटे- लेटे अपने इश्वर अपने महादेव को याद किया जैसे हर बार करती थी जब उसका दिल जोर- जोर से धडकने लगता था. आज का दिन खास था. आज वह दिन था जब वह अपने सपनों को सच करने की ओर एक कदम और बढाने वाली थी.

कुहू एक छोटे से शहर, मथुरा, से मुंबई आई थी. उसका सपना था, एक दिन टीवी की चमकती दुनिया में अपनी जगह बनाना. बचपन से ही वह टीवी सीरियल्स की दीवानी थी. वह अपनी माँ के साथ देर रात तक" कसौटी जिंदगी की" और" क्योंकि सास भी कभी बहू थी" जैसे ड्रामे देखा करती थी. हर बार जब टीवी पर नायिका अपने परिवार के लिए लडती थी या अपने प्यार के लिए बलिदान देती थी, कुहू की आँखें चमक उठती थीं. वह सोचती थी, एक दिन मैं भी ऐसी कहानी का हिस्सा बनूँगी। लेकिन मथुरा जैसे छोटे शहर में यह सपना सिर्फ एक सपना ही था. मुंबई आना, ऑडिशन देना और एक मौका पाना यह सब आसान नहीं था.

पिछले एक साल में कुहू ने अनगिनत ऑडिशन दिए थे उसने काफी मस्कत के बाद आज एक जगह ढूंढी थी जहां वो अपने सपने सच करने की ओर एक कदम बढा सके, कभी उसे छोटे- मोटे विज्ञापनों में काम मिला, तो कभी भीड का हिस्सा बनने का मौका. लेकिन आज का ऑडिशन अलग था. यह एक बडे प्रोडक्शन हाउस का ऑडिशन था, जो एक नया टीवी सीरियल लॉन्च करने जा रहा था—" इश्क की राहें" यह एक रोमांटिक ड्रामा था, और कुहू को मुख्य नायिका के रोल के लिए बुलाया गया था. उसका दिल जोर- जोर से धडक रहा था. उसने अपने छोटे से mirror के सामने खडे होकर कई बार डायलॉग्स का प्रेक्टिस किया था. उसकी दोस्त, रिया, जो एक मेकअप आर्टिस्ट थी, ने उसे हौसला दिया था. कुहू, तू कर लेगी. तुझमें वो चमक है जो स्क्रीन पर दिखती है. बस डर मत।

सुबह आठ बजे कुहू तैयार हो चुकी थी. उसने एक साधारण- सी नीली साडी पहनी थी, जो उसकी माँ ने उसे मुंबई आने से पहले दिया थी. यह साडी मेरी थी जब मैं तुम्हारी उम्र की थी, माँ ने कहा था. यह तुम्हें शुभकामनाएँ देगी। कुहू ने अपने लंबे बालों को खुला छोडा और हल्का मेकअप किया. वह ज्यादा भडकीली नहीं दिखना चाहती थी. वह चाहती थी कि उसका अभिनय बोले, न कि उसका चेहरा.

ऑडिशन स्टूडियो गोरेगाँव में था. कुहू ने ऑटो लिया और रास्ते में अपने डायलॉग्स दोहराती रही. स्टूडियो पहुँचते ही उसका दिल और तेजी से धडकने लगा. बाहर दर्जनों लडकियाँ इंतजार कर रही थीं, हर एक अपनी बारी का इंतजार कर रही थी. कुछ लडकियाँ ग्लैमरस कपडों में थीं, कुछ जोर- जोर से डायलॉग्स पढ रही थीं. कुहू ने एक कोने में बैठकर अपनी स्क्रिप्ट निकाली और चुपचाप पढने लगी.

कुहू शर्मा? एक असिस्टेंट डायरेक्टर ने उसका नाम पुकारा. कुहू का गला सूख गया. उसने एक गहरी साँस ली और अंदर चली गई. स्टूडियो में रोशनी इतनी तेज थी कि उसकी आँखें चौंधिया गईं. सामने एक बडा- सा कैमरा था, और तीन लोग एक मेज के पीछे बैठे थे—डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और एक राइटर.

हाय कुहू, रिलैक्स. बस हमें वो सीन दिखाओ जो हमने तुम्हें भेजा था, डायरेक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा. कुहू ने सिर हिलाया और अपनी जगह ले ली. सीन में नायिका को अपने परिवार के खिलाफ जाकर अपने प्यार के लिए लडना था. कुहू ने आँखें बंद कीं, और जब उसने उन्हें खोला, वह कुहू नहीं, बल्कि" माया" थी—उस सीरियल की नायिका. उसने हर डायलॉग को इतने जज्बात के साथ बोला कि स्टूडियो में सन्नाटा छा गया. आखिरी लाइन बोलते वक्त उसकी आँखों में आँसू थे. मैं हार नहीं मानूँगी. यह मेरा प्यार है, और मैं इसे हर कीमत पर बचाऊँगी।

जब सीन खत्म हुआ, तो डायरेक्टर ने ताली बजाई. वाह, कुहू, पिछले कुछ मिनट तुम्हें देखकर ऐसा लगा जैसे तुम कुहू नही माया हो तुमने माया को तो हमारे सामने जिंदा ही कर दिया। प्रोड्यूसर ने भी सिर हिलाकर सहमति जताई. हमें तुम में वो बात दिखी जो हम ढूंढ रहे थे. हम तुम्हें जल्दी Call करेंगे।

कुहू बाहर निकली तो उसका दिल अब भी धडक रहा था, लेकिन इस बार डर की जगह उम्मीद थी. उसने रिया को फोन किया और सारी बात बताई. रिया, मुझे लगता है ये हो सकता है. उनकी आँखों में वो चमक थी।

शाम को कुहू के फोन पर एक Call आई. यह प्रोडक्शन हाउस से थी. कुहू, बधाई हो. तुम्हें माया के रोल के लिए सिलेक्ट कर लिया गया है. कल से शूटिंग शुरू हो रही है। कुहू की आँखों में आँसू आ गए. उसने फोन रखा और अपने छोटे से अपार्टमेंट में नाचने लगी. उसने तुरंत अपनी माँ को फोन किया. माँ, मैंने कर दिखाया! मैं टीवी सीरियल की लीड हूँ!

अगले दिन सुबह कुहू सेट पर पहुँची. इश्क की राहें" का सेट एक विशाल बंगले जैसा था, जिसे स्टूडियो में बनाया गया था. हर तरफ कैमरे, लाइट्स और क्रू मेंबर्स की भागदौड थी. कुहू को मेकअप Room में ले जाया गया, जहाँ उसका लुक फाइनल किया गया. उसने एक खूबसूरत लहँगा पहना, और जब वह सेट पर आई, तो सबकी नजरें उस पर टिक गईं. डायरेक्टर ने उसे बुलाया और कहा, कुहू, आज तुम्हारा पहला दिन है. बस वही जज्बा दिखाओ जो ऑडिशन में था।

पहला सीन एक इमोशनल सीन था, जिसमें माया को अपने पिता से अपने सपनों के बारे में बात करनी थी. कुहू ने एक बार फिर कमाल कर दिया. हर टेक परफेक्ट था. डायरेक्टर ने दिन के अंत में उसे गले लगाया. कुहू, तुम स्टार बनने वाली हो।

शाम को थककर चूर कुहू अपने अपार्टमेंट लौटी. उसका अपार्टमेंट छोटा था, लेकिन उसने इसे अपने तरीके से सजाया था. दीवारों पर कुछ पुरानी फिल्मों के पोस्टर थे, और एक कोने में उसकी माँ की दी हुई गणेश जी की छोटी- सी मूर्ति थी. वह सोफे पर बैठी और अपने फोन में दिन की तस्वीरें देखने लगी. उसने रिया को मैसेज किया, पहला दिन सुपरहिट! मैं अभी भी विश्वास नहीं कर पा रही।

रात के करीब ग्यारह बजे थे. कुहू ने खाना खाया और बिस्तर पर जाने की तैयारी की. तभी उसे एक अजीब- सी आवाज सुनाई दी. यह कोई हल्की- सी खटखटाहट थी, जैसे कोई दीवार पर हल्के- हल्के दस्तक दे रहा हो. कुहू ने कान लगाकर सुना. आवाज रुक- रुक कर आ रही थी—खट. खट. खट. उसने सोचा, शायद पडोस से आ रही होगी. उसका अपार्टमेंट पुरानी बिल्डिंग में था, और ऐसी आवाजें आम थीं. उसने इसे नजरअंदाज किया और लाइट बंद कर दी.

लेकिन कुछ मिनट बाद फिर वही आवाज आई, इस बार थोडी तेज. अब यह दीवार से नहीं, बल्कि कहीं अपार्टमेंट के अंदर से आ रही थी. कुहू का दिल जोर से धडकने लगा. उसने लाइट जलाई और चारों तरफ देखा. कमरा खाली था. खिडकी बंद थी, और बाहर सडक की आवाजें अब धीमी हो चुकी थीं. शायद मैं बहुत थक गई हूँ, उसने खुद को समझाया. लेकिन फिर एक और आवाज आई—इस बार यह एक फुसफुसाहट थी. यह इतनी धीमी थी कि शब्द समझ नहीं आए, लेकिन यह किसी और की मौजूदगी का एहसास दे रही थी.

कुहू ने अपने फोन की टॉर्च जलाई और धीरे- धीरे कमरे का मुआयना किया. उसने अलमारी खोली, बिस्तर के नीचे झाँका, लेकिन कुछ नहीं मिला. फिर भी, वह फुसफुसाहट बार- बार सुनाई दे रही थी. अब यह रसोई की तरफ से आ रही थी. कुहू ने हिम्मत जुटाई और रसोई की ओर बढी. वहाँ सब कुछ वैसा ही था—सिंक में बर्तन, मेज पर एक पानी की बोतल. लेकिन जैसे ही वह वापस मुडने वाली थी, उसे लगा कि कोई उसकी पीठ के पीछे खडा है. उसने पलटकर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था.

उसका दिल अब इतनी जोर से धडक रहा था कि उसे अपनी साँसों की आवाज सुनाई दे रही थी. तभी फुसफुसाहट फिर से आई, इस बार साफ—" कुहू. उसका नाम. कुहू के हाथ से फोन गिरते- गिरते बचा. उसने पूरी ताकत से चिल्लाया, कौन है वहाँ? लेकिन जवाब में सिर्फ सन्नाटा था. उसने तुरंत दरवाजा Check किया—वह बंद था. खिडकियाँ भी बंद थीं. फिर यह आवाज कहाँ से आ रही थी?

रात के दो बज चुके थे. कुहू ने लाइट्स ऑन रखीं और अपने बिस्तर पर बैठ गई, कंबल को अपने चारों ओर लपेटे हुए. वह बार- बार खुद को समझा रही थी कि यह सिर्फ उसका वहम है. शायद शूटिंग की थकान या नई जगह का डर. लेकिन वह फुसफुसाहट, वह खटखटाहट—यह सब इतना वास्तविक था. उसने रिया को फोन करने की सोची, लेकिन इतनी रात को उसे डराने का कोई मतलब नहीं था.

अगले कुछ घंटों तक कुहू ने आँखें खुली रखीं और सुबह होने का इंतजार करती रही सुबह की पहली किरण के साथ वह थोडा सुकून महसूस करने लगी. लेकिन उसका मन अभी भी उस रात की घटनाओं में उलझा हुआ था. क्या यह सिर्फ उसका दिमाग था, या उसके अपार्टमेंट में कुछ और था?