Monster the risky love - 58 in Hindi Horror Stories by Pooja Singh books and stories PDF | दानव द रिस्की लव - 58

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दानव द रिस्की लव - 58

मैसेज में क्या है....

अब आगे........

तक्ष : उबांक  ....वो त्रिशूल लाकेट सिर्फ पिशाच को नुकसान पहुंचा सकता है न कि किसी इंसान को...
उबांक : मतलब दानव राज...?
तक्ष : मतलब ये उबांक जब मैं उस तावीज को छूने वाला था तब मैंने अदिति के हाथ को पकड़ा था और अदिति के इंसानी फितरत ने मुझे कुछ नहीं होने दिया....
उबांक : आपका जवाब नहीं दानव राज....
तक्ष : हां अब चल उस अदिति को होश में लाकर इस जासूस को चुप कराते हैं.......
तक्ष हम‌ हाथ में गिलास और कुछ काली मिर्च को हाथ में लेकर आता है.....
आदित्य : तक्ष जल्दी करो न इसे ठीक.....
तक्ष : आदित्य घबराओ नहीं.....(तक्ष अदिति के पास जाकर उसके मुंह में कालीमिर्च के दानों को रखता है फिर उसे पानी पिलाता है....सबकी नजर में तक्ष साधारण सा काम कर रहा था लेकिन वो कुछ धीरे धीरे बोल रहा था और सबकी नजर से बचते हुए उस वशीकरण लाकेट पर पानी की बुंदे डालकर हट जाता है)....
आदित्य : क्या हुआ तक्ष ....?....अदि उठी क्यूं नहीं....?
तक्ष : आदित्य शांत हो जाओ बस एक मिनट में इसे होश आ जाएगा......
सुविता : पता नहीं यहां क्या हो रहा है....?.... सुनिए (कामनाथ जी से)...अब हम सबको जल्दी से यहां से चले जाना चाहिए....ये जगह सही नहीं है....
कामनाथ : सुविता घबराओ मत...अब शाम तक यहां से चले जायेंगे....
तभी विवेक बोलता है : ..." आप सब इसकी बात पर भरोसा कर रहे हैं...भाई ये अदिति को नुक्सान पहुंचा सकता है..."
तभी अदिति को होश आता है....
आदित्य : क्या कह रहे थे तुम तक्ष नुकसान पहुंचा सकता है......अदि उठने की जरूरत नहीं है...लेटी रहो....
अदिति : भाई मैं ठीक हूं....
कंचन : अदिति तू बेहोश कैसे हो गई ...?
अदिति विवेक के कहीं बातें याद करने लगती है और विवेक बड़े ध्यान से अदिति की तरफ देख रहा था आखिर अदिति क्या कहेगी....
तक्ष : अदिति तुम पर विवेक चिल्लाया था न ....
आदित्य : बोल अदि .......
अदिति : नहीं भाई मैं विवेक की वजह से बेहोश नहीं हुई थी...वो तो मैं मेडिसिन लेना भूल गई थी.... इसलिए
अदिति की इस तरह की बातों से विवेक और तक्ष दोनों ही हैरान थे क्योंकि दोनों को इस जवाब की आशा नहीं थी... लेकिन अदिति ने बोला है इसलिए दोनों ही चुपचाप खड़े थे...सब के सामने होने की वजह से तक्ष कुछ कर भी नहीं पा रहा था .... इसलिए चुपचाप वहीं खड़ा रहा....
आदित्य : अदि तू लापरवाही क्यूं करती है....टाइम टू टाइम मेडिसिन लिया कर न .... तुझे पता है तक्ष ने तुझे पता नहीं क्या पिलाया और तुझे जल्दी होश आ गया.....
तक्ष की तरफ देखकर अदिति उसे थैंक्यू बोलती है.....इस तरह तक्ष की तारीफ सुनना विवेक को अच्छा नहीं लगा इसलिए बिना कुछ बोले वो वहां से चला जाता है....
 " विवेक तुम्हें हो क्या गया है आखिर क्यों मुझसे दूर जाना चाहते हो..." अदिति अपने आप से कहती हैं...
मालती : क्या सोच रही हो बेटा...?... विवेक के बारे में... उसे तो तुम बचपन से जानती हो कितना जिद्दी है....खैर तुम आराम करो... कुछ चाहिए तो मैं हूं यहां पर ....
अदिति थैंक्स बोलने ही वाली थी तभी मालती जी उसके मुंह पर हाथ रखते हुए कहती हैं..." अपनों को थैंक्स नहीं कहते बेटा... तुम तो मेरी बेटी जैसी हो न....."
मालती जी के कहने पर सब अदिति को रूम में छोड़कर चले गए लेकिन कंचन अदिति के पास ही थी .... अदिति के कहने पर वो उसके पास ही रूक गई थी....
सब बाहर हाॅल में आकर बैठते.... लेकिन विवेक अभी भी बाहर गार्डन में ही इधर से उधर घूम रहा था.... श्रुति विवेक के पास पहुंचती है..
श्रुति : विवेक तुम ऐसे परेशान क्यूं घुम रहे हो....?.... मुझे बताओ न क्या पता मैं तुम्हारी कुछ हेल्प कर पाऊं ....?
विवेक : तुम जाओ यहां से मुझे किसी से बात नहीं करनी...
श्रुति विवेक के सामने आकर खड़ी हो जाती है..." बस करो इधर से उधर घुमना...और बताओ बात क्या है...?... अदिति अचानक कैसे बेहोश हो गई..."
विवेक कुछ देर पहले हुई घटना को याद करके और परेशान हो जाता है और वही घुटनों के बल बैठ जाता है...
श्रुति : विवेक बताओ क्या बात है...?
विवेक : मैं चाहकर भी कुछ नहीं बता सकता...
श्रुति : तो क्या तुम ऐसे ही परेशान रहोगे.....
विवेक : मैं क्या करूं श्रुति तुम अदिति मेरी अच्छी दोस्त हो उसे भी अच्छे से समझती हो और मुझे भी... लेकिन ये एक ऐसी बात है जो किसी ये यकिन करने में नहीं आएगी.... 
श्रुति : कुछ बताओगे भी....?.... अच्छा पहले यहां बैठो लो पानी पियो फिर बताओ...
इधर विवेक इस अजीब घटना को लेकर परेशान था उधर अदिति विवेक के इस बिहेवियर से परेशान थी...
कंचन : क्या हुआ अदिति तू परेशान सी लग रही है....?
अदिति : हां कंचन....
कंचन : क्या बात है बोल ...?
अदिति : पता है आजकल विवेक बहुत अलग अलग सा हो गया है...
कंचन अपने आप से कहती हैं..." अदिति बदलाव तो तुझमें हुए हैं..."
कंचन : कैसे अलग लग रहा है...?
अदिति : मुझे अपने से दूर करना चाहता है... अभी हमारा झगड़ा इसी लिए तो हुआ था.... मैंने विवेक को किस की और वो भड़क गया.... मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा... मुझे लगता है मेरा विवेक अब मेरा नहीं है वो किसी और का हो गया है...
कंचन : अदिति क्या सोच रही है... ऐसा कुछ भी नहीं है... तुझे पता है विवेक तेरी कितनी चिंता करता है...
अदिति : लेकिन अब नहीं कंचन अब वो बदल रहा है...
कंचन : मुझे नहीं लगता....तू अभी समझ नहीं रही है....
कंचन कुछ और कहती इससे पहले ही अदिति के फोन पर एक मैसेज आता है... अदिति मैसेज को ओपन करती है तो उसमें कुछ इमेजिस थी...उन इमेजिस को देखने के बाद अदिति गुस्से में अपना फोन वहीं पटककर कर रुम से बाहर जाकर गुस्से में चिल्लाती है...
अदिति : भाई....(अदिति के इस तरह बोलने से सबका ध्यान उसकी तरफ था .)
आदित्य : अदि क्या हुआ तू बाहर क्यूं आई...?
अदिति : भैय्या घर चलो यहां से....
आदित्य : अचानक..?
 
...................to be continued...............
आखिर किसकी पिक्चर देख कर अदिति को गुस्सा आया....?
जानेंगे अगले भाग में.......