ये कहानी है एक ऐसी लड़की की जिसे बचपन से लेकर अब तक सिर्फ धोखा ही मिला। लेकिन वो जब किसी अनजान friend को देखती है और उससे बातें करती है इस उम्मीद में कि शायद ये धोखा नहीं देगा । लेकिन होनी को कोई बदल नहीं सकता। उसे फिर से धोखा ही मिलता।
चलिए बढ़ते हैं कहानी की तरफ
ये कहानी है एक प्यारी, भोली-भाली, सुन्दर और सुशील लड़की पवित्रा की। (पवित्रा 20 year की एक लड़की जिसका गोरा रंग काली आंखें और कमर से ऊपर तक बाल। पवित्रा इतनी सुन्दर कि कोई भी उसे देखे तो नजर ना हटे।)
पवित्रा जितनी सिधी है उतनी ही गुस्सल।हर किसी का आदर सत्कार उसे पसंद नहीं लेकिन पापा के दबाव में करना पड़ता है।
पवित्रा के दादा जी के चार बेटे थे - महेश, जगदीश, लेखराज, अजय।
पवित्रा जगदीश जी की बेटी है लेकिन बचपन में पवित्रा अपने बड़े पापा के साथ कुछ साल रही। जिसके कारण पवित्रा का महेश जी के बेटे-बेटी - दिनेश, उजाला, सुमन और मनीष से ज्यादा attachment था। क्योंकि पवित्रा की मम्मी गीता जी और दिनेश की मम्मी सुनीता (महेश जी की wife) दोनों sisters थी।
लेकिन सुनिता जी पवित्रा को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी। क्योंकि पवित्रा गोरी थी और सुनिता जी के बच्चे सांवले रंग के थे। इसलिए सुनिता जी पवित्रा से नफ़रत करती थी और तो और उन्होने पवित्रा के काफी बार आग में जलाने की कोशिश भी की। लेकिन पवित्रा बच गई। सुनिता जी अभी तक भी पवित्रा से नफ़रत करती है।
पवित्रा बचपन से ही उजाला के साथ ज्यादा रहती थी। दोनों ही एक-दुसरे का अच्छे से ख्याल रखती। हमेशा साथ रहती, खाना खाती, होती थी। लेकिन पवित्रा का सुमन के साथ रिश्ता इसका एकदम उल्टा था। पवित्रा को सुमन बचपन से ही पसंद नहीं थी। पवित्रा हमेशा से ही सुमन से दूर रहती थी।
दिनेश और मनीष के साथ पवित्रा का रिश्ता ठीक-ठाक था। पवित्रा अपने बड़े भाई दिनेश की बहुत respect करती थी। क्योंकि दिनेश ही एक ऐसा शख्स था जिसने हंसी-मजाक में भी पवित्रा पर हाथ नहीं उठाया।
पवित्रा, उजाला और सुमन तीनों sisters एक ही स्कूल के एक ही क्लास में पढ़ती थी। 9th class तक पवित्रा सुमन को पसंद नहीं करती थी लेकिन 10th class से पवित्रा सुमन को थोड़ा थोड़ा पसन्द करने लगी।
बचपन से ही उजाला और सुमन के साथ रहने से पवित्रा की कोई भी friend नहीं थी। लेकिन उजाला और सुमन दोनों की friends थी इसलिए पवित्रा को लगा कि मैं कि उसके पास भी एक friend होनी चाहिए।
जब भी पवित्रा के पास कोई लड़की आकर बैठती और पवित्रा के nature को देख कर impres होती तो अगले ही दिन सुमन या उजाला दोनों में से कोई भी उस के साथ बैठ जाती और उस लड़की को पता नहीं क्या बोलती पता नहीं पर वो लड़की फिर कभी भी पवित्रा के साथ नहीं बैठती।पहले पवित्रा ने इन सब कभी भी ध्यान नहीं दिया।
पवित्रा के बचपन से लेकर अब तक के इन कुछ सालों में पवित्रा की family पहले जैसी नहीं रही। भाईयों के बीच मुठभेड़ हो गया। महेश जी ने अपनी पूरी family के साथ धोखा किया। सभी भाइयों का बंटवारा किया जिसमें सबसे ज्यादा जमीन खुद ने ले ली और जगदीश जी को घर से निकलवा दिया। जगदीश जी के दोनों भाई लेखराज जी और अजय जी ने महेश जी का साथ दिया।
जगदीश जी अपने बच्चों और पत्नी के साथ भरी सर्दीयो में खेत में रहे। उस समय दिसम्बर का महिना था।
Family को घर से निकालने के अगले दिन पवित्रा गुस्सा थी लेकिन पवित्रा ने उजाला और सुमन के साथ बातें करना बन्द नहीं किया। उस time पवित्रा 10th class में थी।
लेकिन समय को बदते देर नहीं लगी।
अगले साल जब पवित्रा 11th class में थी तो नवंबर के महिने में 11 तारीख को महेश जी, लेखराज जी,अजय जी और पवित्रा के दादा जी के बीच झगड़ा हो गया वो भी market में दुकान पर।
जगदीश जी इस झगडे को दूर खड़े देख रहे थे क्योंकि जब उन पर मुसिबत आई थी तब किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया। उनसे ये और कहा तुम मर क्यों नहीं जाते। अगर तुम मर गये तो इस जमीन पर तीन ही हिस्से होंगे और अगर नहीं मरना तो मत मरो लेकिन खबरदार जो कभी भी हमारे मामले में बोले या फिर हमसे कोई नाता रखा।
इस कारण से जगदीश जी सिर्फ सभी को देख रहे थे। सभी बड़े झगड़ा कर रहे थे लेकिन उजाला और सुमन ने इस झगडे में एक गलती कर दी। उन दोनों ने दादी जी और लक्ष्मी चाची (लेखराज जी की wife) पर हाथ उठाया। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। ब जब दादा जी ने ये देखा तो उन्होंने तीनों भाइयों पर केस कर दिया। केस करने के बाद दादाजी, दादीजी, लक्ष्मी चाची और रेखा चाची (अजय जी की wife) वहां से घर की ओर निकल गये। बस जगदीश जी बचे थे जिन्होंने तीनों भाइयों को जेल से निकलवाया। लेकिन किसी को भी इसका पता नहीं लगने दिया।
जब पवित्रा अगले दिन 12 नवंबर को स्कूल गई तो उन दोनों ने पवित्रा से बात नहीं की पवित्रा ने जब उनसे बात ना करने का resion पूछा तो उन्होंने कहा तू अब हम से कभी भी बात मत करना क्योंकि तेरे पापा ने मेरे पापा कि help नहीं की। ये सब सुन कर पवित्रा के पैरों तले जमीन खिसक गई। पवित्रा को बहुत बड़ा झटका लगा। लेकिन उसने उनसे कुछ नहीं कहा और उन दोनों की बात मान ली। लेकिन जब पवित्रा घर आई तो फूट-फूटकर रोने लगीऔर मम्मी-पापा को सब कुछ बता दिया।उन दोनों की बाते सुनकर कर पवित्रा अन्दर से टूट चुकी थी लेकिन उसने हार नहीं मानी और उसने अगले दिन फिर से उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। 14 November 2018 children day के दिन स्कूल में program था। उस दिन भी पवित्रा ने उनसे बातें करने की पूरी कोशिश की लेकिन जब program खत्म हुआ तो रविना (उजाला की friend) ने कहा पवित्रा को भी आने दो तो उन्होंने कहा ये हमारे साथ नहीं जायेंगी और अगर ये मर भी जाए तो हमें मतलब नहीं है। पवित्रा ये सब सुनकर बिल्कुल ही टूट गई थी और उसके आंसू रुके ही नहीं। इसलिए पवित्रा घर आ गई। घर आकर पवित्रा ने सारी बातें मम्मी-पापा को बता दी। तब पवित्रा की मम्मी ने कहा तेरी स्कूल change करा दे। ये सुनकर पवित्रा ने तुरंत ही मना कर दिया। लेकिन उस दिन के बाद से पवित्रा depressed रहने लगी। जनवरी के starting में पवित्रा धीरे-धीरे Normal रहने लगी। इसका कारण पवित्रा के बड़े दादाजी का सबसे छोटा पोता था जो कि पवित्रा के छोटे भाई साहिल के साथ पढता था। आशीष पवित्रा को बहुत पसंद करता था like a friend
आशीष छोटा ज़रूर था लेकिन पवित्रा की life में वो ही एक ऐसा best friend था जिसने पवित्रा को depression से निकाला। इन दिनों में पवित्रा ने किसी को कैसे ignore करना और कैसे खुद को दुसरो के सामने मजबूत दिखाना है चाहे आपको अन्दर से डर लग रहा हो और की सारी आदतें सीख ली जो उसे आगे बहुत काम आई। दो महीनो बाद पवित्रा के दादा जी की 13 January heart attackसे death हो गई। उस दिन सुमन और उजाला ने पवित्रा से बात की। पवित्रा को ये अजीब लगा इसलिए उसने अपनी मम्मी से कहा कि वो मुझ से बात कर रही हैं तो मैं क्या करूं। तब पवित्रा की मम्मी ने कहा तुम भी बात कर लो और पुरानी बातों को भूल जाओ। पवित्रा ने हा कर दी लेकिन वो उन दोनों से बात नहीं करना चाहती थी क्योंकि जब एक धागा टूट जाता है तो उसमें गांठ आ जाती है। यही सब पवित्रा के साथ हो रहा था लेकिन फिर भी पवित्रा ने उनसे बातें करना शुरू कर दिया। कुछ महीनो बाद कोरोना आ गया जिससे सभी स्कूले बन्द हो गई। 12th class में पवित्रा प्रमोट हो गई। जब पवित्रा ने महुआ के महात्मा गांधी collage join किया तो उसके साथ सुमन ने भी उसी collage को join किया और उजाला ने मंडावर में collage join किया। First year में पहले सब ठीक था लेकिन बाद में सुमन ने कहा पापा को पसंद नहीं है कि मैं तुम से बात करू तो अब हम बात नहीं करेंगे। पवित्रा को ये सुनकर गुस्सा आया लेकिन उसने खुद को control किया। लेकिन सुमन ने हद कर दी क्योंकि कभी तो वो बात करती और कभी नहीं करती। फिर भी पवित्रा ने उसका साथ दिया। First year में पवित्रा को पता चला कि सुमन ने सभी को ये बता रखा है कि उजाला पवित्रा से नफ़रत करती है तभी से पवित्रा को सुमन और उजाला से नफ़रत होने लगी।Second year भी ऐसे ही निकल गया । लेकिन अब पवित्रा ने सुमन से बातें करना कम कर दिया और उजाला UPSC की preparation के लिए दिल्ली चली गई।Third year में सुमन ने पवित्रा से उजाला की बात कराई लेकिन पवित्रा को अब उससे बातें करने में कोई interest नहीं था लेकिन फिर भी पवित्रा ने मन मार कर बात कर ली। इस year में सुमन के हाथ का operation हुआ क्योंकि बचपन में सुमन का हाथ जल गया था। इस time पर पवित्रा ने उसका बहुत साथ दिया। इतना कि कोई बता नहीं सकता लेकिन सुमन ने पवित्रा कि खुद के birthday के दिन बहुत insult की। पवित्रा ने सहन कर लिया और उसे कुछ भी नहीं कहा। लेकिन अगले दिन किसी बात पर सुमन ने पवित्रा पर believe नहीं किया तो पवित्रा ने तभी से उससे बातें करना बन्द कर दिया। सुमन ने पूछा लेकिन पवित्रा ने बस उससे ये ही कहा कि तुम्हें मुझ पर यकीन नहीं है। अच्छा होगा कि अब तुम मुझ से बात ना करो। पवित्रा ने ये बाते पहली बार बोली थी इसलिए पवित्रा के आंखों में आंसू आ गए और वो खुद को कोशने लगी कि मैं ऐसा नहीं चाहती लेकिन अब बहुत हुआ। मैं थक गई हूं। मैं अब और सहन नहीं कर सकती।
तभी से पवित्रा ने सुमन से बातें करना बन्द कर दिया। सुमन पर इसका कोई effect ही नहीं पड़ा वो तो बहुत खुश थी और उजाला के पास चली गई UPSC की preparation के लिए। उसके बाद से पवित्रा ने खुद को और मजबूत करने के साथ-साथ आशा और निर्जला जैसी friend भी बनाई। Final year खत्म होने के बाद पवित्रा सब कुछ भूलकर जयपुर आ गई RAS की preparation के लिए।
यहा आकर पवित्रा ने सोचा मैं यहां पर कोई भी friend नहीं बनाउ लेकिन कुछ लड़कियां उसकी friend बन गई। उनमें से एक तनू भी थी। तनू ने पवित्रा से सभी girls को दूर कर दिया और खुद पवित्रा के साथ रही। लेकिन पवित्रा तनू को कुछ खास पसंद नहीं करती थी इसलिए पवित्रा ने तनू से पीछा छुड़ाने कि बहुत कोशिश की लेकिन तनू मानो जैसे उसके पीछे ही पड़ गई। पवित्रा कि तबियत खराब होने पर तनू ने पवित्रा कि देखभाल की। इसलिए पवित्रा ने तनू को अपना friend मान लिया। लेकिन इस बीच मनीषा और नाराज़ नाम की दोनों girls पवित्रा की friend बनी। मनीषा और पवित्रा की दोस्ती अनजाने में हुई लेकिन अब दोनों काफी अच्छी friends बन गईऔर इस दिवाली के बाद से तनू के bihaver में change आया। तनू सारी importance खुद ही लेना चाहती थी इसलिए उसने पवित्रा की बुराई start कर दी। पवित्रा को जब ये बात पता चली तो पवित्रा को तनू में सुमन नजर आने लगी। पवित्रा ने तनू से धीरे-धीरे बात करना कम कर दिया। लेकिन पवित्रा ने बात करना बन्द नहीं किया।
एक दिन बिना किसी resion के तनू ने पवित्रा को block कर दिया। मनीषा और नाराज़ दोनों को ये पता था लेकिन पवित्रा को नहीं। जब पवित्रा ने तनू के ही किसी काम से उसे call किया तब पवित्रा को पता चला कि तनू ने उसे block कर रखा है। उस दिन पवित्रा को सुमन और उजाला दोनों के धोखे याद आये। तब से पवित्रा ने तनू से बात करना बिल्कुल बंद कर दिया।
पवित्रा मनीषा पर भरोसा तो करती है लेकिन अब पवित्रा ने खुद को बहुत बदल लिया और वो अब किसी के भी बहकावे में नहीं आयेगी।
पवित्रा का मन करता है कि वो मनीषा पर believe करें। क्योंकि मनीषा पवित्रा का साथ देती है।
पवित्रा की life में बहुत लड़कियां आई जिन्होंने पवित्रा को हमेशा धोखा दिया था। लेकिन पवित्रा हर बार उन सभी को मौका देती थी लेकिन फिर भी वे सभी पवित्रा को धोखा देती थी। मनीषा ने भी ऐसा ही किया फिर भी पवित्रा ने उसे वापस से मौका दिया है क्योंकि पवित्रा को लगा कि ये धोखा तनू के कहने पर दे रही है और शायद ये कहीं ना कहीं सच भी है।