कंप्यूटर संबंधित इंजरी
आजकल कंप्यूटर , लैपटॉप और टैबलेट ऑफिस के अतिरिक्त घर में भी अक्सर उपयोग में आते हैं . लंबे समय तक इन डिवाइस पर काम करने से शारीरिक इंजरी ( injury - चोट ) होने की काफी संभावना रहती है . विशेष कर अनुचित मुद्रा ( posture ) में इन डिवाइस पर लम्बे समय तक काम करने से जोड़ों , कंधों , बाँह , हाथ कलाई और आँखों को क्षति पहुँचती है . आजकल घर में बच्चे भी देर तक कंप्यूटर गेम खेलते हैं . उन पर भी इसका प्रतिकूल शारीरिक और मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकता है . बड़े हों या बच्चे ऐसे प्रतिकूल प्रभाव से बचने के लिए उचित फर्नीचर और बॉडी पोस्चर पर ध्यान देना चाहिए .इसके अलावा बीच बीच में ब्रेक लेते रहना चाहिए .
उचित पॉश्चर ( posture ) क्यों जरूरी - हमारा स्पाइन एक केंद्र बिंदु है जहाँ पर अधिकांश मांसपेशियां अटैच्ड हैं और ये बॉडी के वजन को बैलेंस और सपोर्ट करतीं हैं . जब स्पाइन अलाइंड ( एक रेखा में हैं ) तब हमारे मस्ल आसानी से ज्यादा सक्षम रहते हैं . जब स्पाइन अलाइंड नहीं हैं तब बॉडी संतुलित नहीं रहता है और मस्ल को ज्यादा काम करना पड़ता है . इसके चलते थकावट और आगे चल कर जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होता है .
आमतौर पर हम तीन गलतियां करते हैं -
1 . मॉनिटर , कीबोर्ड और माउस अलाइंड नहीं रखते हैं
2 . कीबोर्ड और माउस ज्यादा ऊंचा है
3 . हम बैठते ज्यादा देर हैं और खड़ा कम देर रहते हैं
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कंप्यूटर संबंधित इंजरी -
कंप्यूटर पर मुद्रा या पोस्चर संबंधित इंजरी - अनुचित पोस्चर से पीठ और गर्दन में दर्द , सिरदर्द , कंधों और बांह में दर्द होना सामान्य समस्या है . इसके अलावा मांसपेशियों में भी दर्द हो सकता है . अगर वर्क स्टेशन , वर्किंग टेबल , चेयर या फर्नीचर उचित नहीं है तब लंबे समय तक इन पर काम करने से मस्ल ,हड्डियों , लिगमेंट ( ligament स्नायु बंधन ) और टेंडन ( tendons कंडरा ) में ब्लड सप्लाई पर असर पड़ता है . इस से इंजरी और स्टिफनेस ( कठोरता ) बढ़ जाती है .
उपरोक्त से बचने के उपाय -
* कंप्यूटर के लिए बनाये गए विशेष एडजस्टेबल फर्नीचर का उपयोग करें .
* कंप्यूटर का स्क्रीन आँखों के लेवल या उस से थोड़ा नीचे होना चाहिए .
* यदि देर तक काम करना हो तब बीच बीच में ब्रेक लें , कुछ देर के लिए टहल लें और अपनी जगह पर बैठे बैठे भी स्ट्रेच कर सकते हैं .
* एर्गोनॉमिक ( ergonomic - कार्य स्थिति के अनुकूल ) कीबोर्ड का उपयोग करने से हाथ और कलाई बेहतर नेचुरल स्थिति में रहते हैं .
* कीबोर्ड की ऊंचाई ऐसी हो कि दोनों एल्बो साइड में आराम से रख सकें . बांह फ्लोर के समानांतर और कीबोर्ड के लेवल में हो .
* आपकी कुर्सी की ऊँचाई सही हो ताकि आपके पैर फ्लोर पर फ्लैट रहें . यदि ऐसा नहीं है तब फ्लोर पर स्टूल रख कर पैर रखें . एर्गोनॉमिक चेयर का इस्तेमाल करें ताकि आपकी स्पाइन ( रीढ़ की हड्डी ) स्वाभाविक मुद्रा में रह सके .
ज्यादा देर काम करने से संभावित इंजरी ( overuse related injury ) - कंप्यूटर पर काम करते समय अक्सर एक ही पोस्चर में उंगलियों , बाँहों और कंधों का बार बार विशेष दिशा में मूवमेंट होते रहता है . इस से मस्ल ( muscle ) और टेंडन में दर्द होता है . इसके अतिरिक्त जोड़ों में दर्द और स्टिफनेस , कमजोरी और सुन्न हो सकता है .
उपरोक्त से बचने के उपाय -
* कीबोर्ड और माउस का दोनों की हाइट बराबर और सही होनी चाहिए .
* जब कीबोर्ड पर टाइप न करना हो तब बांह को बोर्ड से हटा कर रिलैक्स होने दें .
* हल्के से टाइप करें , type lightly and gently .
* माउस को यूज करते समय बांह को यूज करें न कि सिर्फ कलाई .
* अपने जॉब को मिक्स करें ताकि लंबे समय तक कंप्यूटर पर न रहें .
आँखों पर असर - हमारी आँखें नेचुरली लगभग 20 फ़ीट तक देखने की अभ्यस्त हैं . कंप्यूटर पर लगातार काम करने से स्क्रीन पर कम दूरी पर आँखों को फोकस करना पड़ता है . इस से आँखों पर स्ट्रेन पड़ता है और कभी टेम्पररी धुंधलापन , सरदर्द या दूर की वस्तु पर फोकस करने में परेशानी हो सकती है .
आई स्ट्रेन से बचने के उपाय
* ध्यान रहे कि खिड़की आदि का प्रकाश स्क्रीन या चेहरे पर डायरेक्ट न पड़े .
* बीच बीच में स्क्रीन से नजर हटा कर दूर की चीज पर फोकस करें .
* चमक या रिफ्लेक्शन से बचने के लिए स्क्रीन को थोड़ा झुका ( tilt ) कर एडजस्ट करें .
* स्क्रीन चेहरे से बहुत निकट न हो .
* स्क्रीन आँखों के लेवल या उस से थोड़ा नीचे हो .
* कंप्यूटर के कंट्रास्ट और ब्राइटनेस को अपनी आँखों के लिए एडजस्ट करें .
* निश्चित अंतराल पर आँखों का टेस्ट कराते रहें .
लैपटॉप संबंधित इंजरी -
आजकल लैपटॉप का ज्यादा उपयोग होने लगा है . वास्तव में लैपटॉप का डिज़ाइन थोड़े समय के इस्तेमाल के लिए किया गया था जब डेस्क टॉप कंप्यूटर उपलब्ध नहीं हो . इसके उपयोग से कंप्यूटर रिलेटेड दर्द , स्ट्रेन और इंजरी और बढ़ गया है . लैपटॉप में स्क्रीन और कीबोर्ड दोनों आपकी आँखों के निकट होते हैं . कीबोर्ड की सही हाइट के लिए कंधों को थोड़ा झुकाना पड़ता है और मॉनिटर ( स्क्रीन ) की सही हाइट के लिए पीठ और बांह को उठाना पड़ता है . इसके अतिरिक्त लैपटॉप को कैरी करते समय मस्ल और जोड़ों पर स्ट्रेन पड़ता है .
लैपटॉप संबंधित इंजरी से बचने के कुछ उपाय
* यथासंभव लैपटॉप की जगह डेस्कटॉप कंप्यूटर का उपयोग करें .
* लैपटॉप को कंधे पर न लटका कर बैकपैक या व्हील ( wheel ) वाले बैग में कैरी करें .
* ज्यादा देर काम करना हो तब बीच बीच में ब्रेक लें .
* लैपटॉप स्टैंड , अलग कीबोर्ड , माउस , डॉकिंग स्टेशन जैसे डिवाइस का उपयोग करें .
बच्चे और कंप्यूटर संबंधित इंजरी
आजकल अक्सर बच्चे भी लम्बे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर कार्टून देखते रहते हैं या इलेक्ट्रॉनिक गेम या वीडियो गेम खेलते हैं . बड़ों की तरह उन्हें भी उपरोक्त इंजरी की संभावना बनी रहती है . इसके अतिरिक्त देर तक कंप्यूटर पर रहने से बच्चों में मोटापा भी होता है . हालांकि कुछ गेम बच्चों के लिए कॉमेडी और ज्ञानवर्धक होते हैं पर साथ की कुछ गेम ऐसे होते हैं जिन्हें बार बार देखने से बच्चों में आक्रामक प्रवृत्ति होती है .
बच्चों को कंप्यूटर इंजरी से बचाने के लिए माता पिता को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए -
* बच्चे स्क्रीन से कम से कम एक मीटर दूर रहें
* बीच बीच में ब्रेक लें
* कंप्यूटर के अतिरिक्त अन्य स्पोर्ट्स और फिजिकल एक्टिविटी में रहें .
* बच्चों के लिए कंप्यूटर पर रहने के लिए एक निर्धारित समय सीमा रखें .
* बच्चों के लिए भी एर्गोनॉमिक चेयर और विशेष माउस का प्रबंध करें . डेस्क , टेबल चेयर आदि उनकी हाइट के अनुकूल हों .
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