“ D J Chapter 1 में जो कहानी अधूरी रह गई थी वह कहानी आज D J Chapter 4 में खतम होगी। ”
D J – अध्याय 4 : अधूरी कहानी का नया मोड़
दर्द और अकेलापन
जानवी की मौत के बाद दिग्विजय पूरी तरह टूट चुका था। उसकी दुनिया उजड़ चुकी थी। घर से बाहर निकलना, लोगों से मिलना-जुलना—सब कुछ उसने छोड़ दिया। वह सिर्फ अपने और जानवी के बिताए हुए लम्हों में खोया रहता।
हर रात वह अपने कमरे में बैठकर उन चिट्ठियों को पढ़ता, जो जानवी ने उसके लिए लिखी थीं। हर शब्द उसके दिल को छलनी कर देता। "दिग्विजय, तुम मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत हकीकत हो..." इन चिट्ठियों में लिखा हर वाक्य उसे अंदर से झकझोर देता।
लेकिन उसे अभी जीना था—अपने और जानवी के बच्चे के लिए।
नई जिम्मेदारी – पिता बनने की तैयारी
कुछ महीनों बाद, अस्पताल में एक नन्ही-सी जान इस दुनिया में आई—दिग्विजय और जानवी की बेटी।
उसने अपनी बेटी का नाम रखा "जानवी", क्योंकि वह चाहता था कि उसकी पत्नी की यादें हमेशा उसके साथ रहें।
दिग्विजय अब पूरी तरह बदल चुका था। वह खुद को अपनी बेटी के लिए समर्पित कर चुका था।
"अब मैं सिर्फ अपने बच्चे के लिए जिऊंगा। मैं उसे दुनिया का सबसे अच्छा पिता बनकर दिखाऊंगा।"
करण की सजा और सपना की वापसी
करण, जो जानवी की मौत का असली गुनहगार था, जेल में था। लेकिन जेल में भी उसकी नफरत कम नहीं हुई थी। उसने दिग्विजय से बदला लेने की ठान ली थी।
इस बीच, सपना—जो दिग्विजय की सबसे अच्छी दोस्त थी—वापस उसकी जिंदगी में आई। उसने देखा कि दिग्विजय अब पहले जैसा नहीं रहा। वह चुप रहने लगा था, अपने गम को छुपाने लगा था।
सपना ने कहा, "दिग्विजय, तुम्हें जानवी की आखिरी बात याद है? उसने कहा था कि तुम्हें आगे बढ़ना होगा। खुद को खत्म मत करो। तुम्हारी बेटी को तुम्हारी जरूरत है।"
दिग्विजय ने सपना की तरफ देखा और कहा, "मैं जी तो रहा हूँ, लेकिन सिर्फ अपनी बेटी के लिए। वरना मेरा दिल तो उसी दिन मर चुका था, जिस दिन जानवी गई थी।"
करण की रिहाई – फिर से खतरा
पांच साल बाद, करण जेल से छूटकर बाहर आया। वह अब भी दिग्विजय से बदला लेना चाहता था।
उसने सोचा, "मैंने दिग्विजय से जानवी को छीना था, लेकिन अब उसकी जिंदगी में जो सबसे कीमती है, मैं उसे भी बर्बाद कर दूंगा—उसकी बेटी जानवी!"
करण ने प्लान बनाया कि वह किसी भी तरह से दिग्विजय की बेटी को नुकसान पहुंचाएगा।
अचानक हमला
एक दिन, जब दिग्विजय अपनी बेटी के साथ पार्क में था, तभी करण ने हमला कर दिया।
करण ने चाकू निकालकर दिग्विजय पर वार करने की कोशिश की, लेकिन इस बार दिग्विजय कमजोर नहीं था। उसने करण का हाथ पकड़ लिया और उसे जमीन पर गिरा दिया।
करण हंसते हुए बोला, "तू मुझे नहीं मार सकता, क्योंकि तू अभी भी उस पुराने प्यार में अटका हुआ है। लेकिन मैं तुझे ऐसी मौत दूंगा कि तेरा प्यार भी तुझे बचाने नहीं आएगा!"
लेकिन तभी पुलिस आ गई। सपना ने पहले ही पुलिस को बुला लिया था। करण को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया।
दिग्विजय ने सपना की तरफ देखा और कहा, "तुमने फिर मेरी जान बचाई।"
सपना मुस्कुराई और बोली, "क्योंकि मैं तुम्हें यूं अकेला तड़पते हुए नहीं देख सकती।"
नया सफर – क्या सपना ही दिग्विजय का भविष्य है?
अब दिग्विजय अपनी बेटी के साथ एक नई जिंदगी की शुरुआत करना चाहता था।
लेकिन सपना की आंखों में एक अनकही चाहत थी—क्या वह दिग्विजय से प्यार करने लगी थी?
क्या दिग्विजय फिर से किसी से प्यार कर पाएगा?
क्या सपना उसकी अधूरी कहानी को नया अंत दे पाएगी?
(जारी रहेगा...)
पिता और बेटी का सफर
दिग्विजय अब पूरी तरह से अपनी बेटी "जानवी" की परवरिश में लग चुका था। उसने अपनी ज़िन्दगी को एक ही मकसद दे दिया था—अपनी बेटी को दुनिया की सबसे खुशहाल लड़की बनाना।
वह रोज़ सुबह जल्दी उठता, अपनी बेटी को तैयार करता, उसे स्कूल छोड़ने जाता, फिर काम पर जाता और शाम को उसे लेने पहुंचता। वह पिता के साथ-साथ माँ की भूमिका भी निभा रहा था।
लेकिन जब रात होती, तब अतीत का दर्द उसे घेर लेता। जानवी के बिना बिताई हर रात उसे तड़पाती। वह अपनी पत्नी की तस्वीर देखकर सोचता,
"अगर तुम आज होती, तो देखती कि हमारी बेटी बिल्कुल तुम्हारी तरह मुस्कुराती है।"
सपना यह सब देख रही थी। वह जानती थी कि दिग्विजय अपनी बेटी के लिए जी रहा है, लेकिन वह खुद के लिए कुछ नहीं कर रहा।
सपना का ख्याल
एक दिन, सपना ने दिग्विजय से कहा,
"दिग्विजय, तुम्हें अपने लिए भी जीना होगा। तुम ऐसे अपनी ज़िन्दगी बर्बाद नहीं कर सकते।"
दिग्विजय ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
"मैं अब सिर्फ अपनी बेटी के लिए जी रहा हूँ, सपना। प्यार मेरे लिए खत्म हो चुका है।"
सपना चुप रही, लेकिन उसके दिल में हलचल मच गई। वह खुद से सवाल करने लगी,
"क्या मैं दिग्विजय से प्यार करने लगी हूँ?"
करण की आखिरी चाल
जेल में बैठा करण अब भी दिग्विजय से नफरत करता था। वह जानता था कि अगर दिग्विजय की दुनिया को बर्बाद करना है, तो उसे उसकी बेटी से अलग करना होगा।
करण ने जेल के अंदर से ही अपने लोगों को बुलाया और कहा,
"मुझे इस बार कोई गलती नहीं करनी है। दिग्विजय की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी बेटी है, और मुझे वहीं वार करना है!"
करण का एक आदमी दिग्विजय के घर के पास नजर रखने लगा।
अपहरण – जानवी खतरे में
एक शाम, जब दिग्विजय ऑफिस से लौटा, तो देखा कि घर के दरवाजे खुले हुए थे। अंदर जाकर देखा तो बेटी जानवी कहीं नहीं थी!
उसका दिल जोर से धड़कने लगा। उसने पूरे घर में खोजा, लेकिन बेटी का कोई नामोनिशान नहीं था।
तभी उसके फोन पर एक कॉल आई—
"अगर अपनी बेटी को ज़िंदा देखना चाहता है, तो अकेले पुराने गोदाम में आ जा!"
दिग्विजय की आँखों में खून उतर आया। वह समझ गया कि यह काम करण का है।
सपना की हिम्मत और दिग्विजय का गुस्सा
दिग्विजय तुरंत वहां जाने के लिए तैयार हुआ, लेकिन सपना ने उसे रोका।
"दिग्विजय, यह एक जाल हो सकता है। मैं पुलिस को खबर देती हूँ!"
लेकिन दिग्विजय ने कहा,
"नहीं सपना! यह लड़ाई मेरी है। अगर मेरी बेटी को कुछ हुआ, तो मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊंगा!"
सपना ने हथियार उठाया और कहा,
"अगर तुम जा रहे हो, तो मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी!"
आखिरी टकराव – बाप का जुनून
दिग्विजय और सपना उस पुराने गोदाम में पहुंचे, जहां करण पहले से अपने गुंडों के साथ खड़ा था।
करण ने हंसते हुए कहा,
"देखा दिग्विजय, मैंने तुझसे कहा था कि तुझे खत्म कर दूंगा। अब देख, तेरा प्यार तुझे बचाने नहीं आएगा!"
लेकिन दिग्विजय का गुस्सा अब सातवें आसमान पर था। उसने बिना कुछ सोचे हमला कर दिया। उसने अकेले ही करण के सारे गुंडों को धूल चटा दी।
करण ने गुस्से में चाकू निकाला और जानवी की तरफ बढ़ा, लेकिन तभी सपना ने गोली चला दी—
गूंज...
करण वहीं गिर पड़ा।
दिग्विजय ने जल्दी से जानवी को गले लगाया और कहा,
"अब कोई तुम्हें मुझसे अलग नहीं कर सकता!"
पुलिस भी वहां पहुंच चुकी थी। करण को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अब वह अपनी सजा से नहीं बच सकता था।
नई शुरुआत – सपना और दिग्विजय का रिश्ता
इस घटना के बाद, सपना और दिग्विजय के बीच कुछ बदलने लगा। सपना अब दिग्विजय के और करीब आ गई थी।
एक दिन जानवी ने अचानक सपना से कहा,
"सपना आंटी, क्या आप मेरी मम्मी बनोगी?"
सपना हक्की-बक्की रह गई। उसने दिग्विजय की तरफ देखा। दिग्विजय भी चुप था।
अब सवाल यह था—क्या दिग्विजय फिर से प्यार करेगा? क्या वह सपना को जानवी की माँ बनने देगा?
(जारी रहेगा...)
दिल के दरवाजे पर दस्तक
जानवी के मासूम सवाल ने दिग्विजय को झकझोर दिया था—
"सपना आंटी, क्या आप मेरी मम्मी बनोगी?"
सपना कुछ कह नहीं पाई। उसने दिग्विजय की ओर देखा, लेकिन दिग्विजय ने अपनी नज़रें झुका लीं।
उस रात, दिग्विजय अपने कमरे में बैठा जानवी की तस्वीर देख रहा था। उसकी आँखों में सवाल थे—
"क्या मैं फिर से प्यार कर सकता हूँ? क्या सपना को अपनी ज़िंदगी में आने दूँ?"
दूसरी ओर, सपना अपने दिल से लड़ रही थी। वह जान चुकी थी कि वह दिग्विजय से प्यार करने लगी है। लेकिन क्या दिग्विजय उसे अपनी ज़िंदगी में जगह देगा?
अंधेरे में रोशनी
कुछ दिनों तक दिग्विजय और सपना के बीच अजीब सी खामोशी रही। लेकिन जानवी अपने मन में कुछ और ही ठान चुकी थी।
एक दिन उसने सपना से कहा,
"सपना आंटी, क्या आप मुझे रोज़ स्कूल छोड़ने चलेंगी?"
सपना मुस्कुराई और बोली,
"हाँ, जानवी, मैं चलूंगी!"
धीरे-धीरे, सपना दिग्विजय और जानवी के जीवन का हिस्सा बनती गई।
करण की आखिरी चाल
उधर, अस्पताल में पड़े करण को जब पता चला कि सपना अब दिग्विजय के करीब आ रही है, तो उसने फिर से एक चाल चली।
उसने जेल में बैठे अपने पुराने दोस्त राहुल से कहा,
"मुझे जेल से बाहर निकलने का एक ही तरीका चाहिए—सपना को खत्म कर दो!"
राहुल ने वादा किया कि वह सपना को रास्ते से हटा देगा।
सपना पर हमला
एक शाम, जब सपना जानवी को स्कूल से लेकर आ रही थी, तभी कुछ नकाबपोश गुंडों ने उन्हें घेर लिया।
एक गुंडे ने सपना की ओर बंदूक तानकर कहा,
"अगर जान बचानी है, तो चुपचाप हमारे साथ चलो!"
सपना घबराई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने तुरंत जानवी को पीछे किया और अपने बैग से मिर्च पाउडर निकालकर गुंडों की आँखों में डाल दिया।
गुंडे तिलमिला गए, और इसी मौके का फायदा उठाकर सपना ने जानवी को गोद में उठाया और दौड़ पड़ी।
लेकिन तभी... एक गोली चली!
गोली सपना के कंधे में लगी, और वह ज़मीन पर गिर पड़ी। जानवी जोर-जोर से रोने लगी,
"सपना आंटी! आप उठो, प्लीज!"
दिग्विजय का गुस्सा
जब दिग्विजय को इस घटना का पता चला, तो उसका खून खौल उठा। उसने सीधे अस्पताल जाकर सपना का हाथ पकड़ा और कहा,
"सपना, तुम पर हमला सिर्फ तुम्हारे लिए नहीं, बल्कि मुझ पर भी किया गया है। अब मैं करण को नहीं छोड़ूंगा!"
सपना ने दर्द से मुस्कुराते हुए कहा,
"मुझे तुम्हारी चिंता है, दिग्विजय। बस इतना जान लो कि... मैं तुम्हें और जानवी को बहुत प्यार करती हूँ।"
दिग्विजय के दिल में हलचल मच गई। उसने पहली बार महसूस किया कि सपना उसकी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुकी है।
करण का अंत
दिग्विजय ने पुलिस की मदद से करण को हमेशा के लिए जेल की कालकोठरी में भिजवा दिया। अब वह कभी बाहर नहीं आ सकता था।
जब करण को आखिरी बार जेल ले जाया जा रहा था, उसने गुस्से से कहा,
"मैं हार गया, लेकिन तुझे अपनी ज़िंदगी में फिर से खुश नहीं देखने दूंगा!"
दिग्विजय ने ठंडी सांस लेते हुए जवाब दिया,
"मेरी खुशियां अब मुझसे कोई नहीं छीन सकता।"
प्यार की दूसरी शुरुआत?
कुछ महीनों बाद, जब सपना पूरी तरह ठीक हो गई, तो एक दिन जानवी ने फिर वही सवाल पूछा,
"पापा, क्या अब सपना आंटी मेरी मम्मी बन सकती हैं?"
दिग्विजय ने पहली बार सपना की आँखों में देखा और कहा,
"अगर सपना को कोई ऐतराज न हो, तो मैं भी अपनी ज़िंदगी में फिर से प्यार करने को तैयार हूँ।"
सपना की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन इस बार ये आँसू खुशी के थे।
DJ की प्रेम कहानी भले ही अधूरी रह गई थी, लेकिन अब दिग्विजय की ज़िंदगी को फिर से एक नया प्यार मिल रहा था।
(अंत या नई शुरुआत?)
Writer Digvijay Thakor