काव्य लहरी में दो खण्ड है जिसका प्रथम खंड मुक्तक वीथिका कवि कि भावनाओं संस्कृति संस्कारो एव आचरण के वास्तविकता कि ऐसी अभिव्यक्ति जिसमे आत्मा परमात्मा के मौलिक मूल्यों का जीवन दर्शन जीवन तथा जीवन पथ के मर्म मर्यादाओं कि नैतिकता का शाश्वत सत्य विचार व्यवहार कि काव्यात्मक अभिव्यक्ति दृष्टि ,दिशा दृष्टिकोण का शाश्वत प्रवाह है मुक्तक वीथिका का संगम है काव्य लहरी।कवि विचारक कि शैली कि सुंदर कृति है शिव कुमार शर्मा जी स्वंय के जीवन मे जिस सौम्यता को निरूपित करते है उनकी रचना धर्मिता भी उतनी ही शौम्य ,परिपक्व ,परिपूर्णता निर्मल निश्चल धारा है मुक्तक वीथिका कि व्यवहाहारिकता है संगम काव्य लहरी।समय समाज वतर्मान, कर्म ,धर्म के ईश्वरीय स्वरूप का सत्यार्थ तो है ही भौतिक जीवन के भागम भाग कि जीवन शैली में मानवता एव धर्म के समन्वय का अद्वितीय संयोजन है संगम काव्य लहरी।शुभारंभ ही ज्ञान ध्यान शब्द स्वर कि आराध्य माँ वीणा पाणी कि आराधना से है तो जीवन पथ के सत्य का साक्षात्कार कराती ऐसी काव्यात्मक प्रस्तुति जिसमे प्रतिस्पर्धा ,प्रतिद्वंदिता एव परस्पर होड़ कि दौड़ में जीवन की वास्तविकता को वरण करने कि प्रेरणा है मुक्तक वीथिका जीवन कि वर्णमाला है संगम काव्य लहरी।शब्दो का सजग संतुलित सार्थक सकारतात्मक प्रयोग भावों कि स्पष्टता और विषयों कि गम्भीरता विशेषता है मुक्तक वीथिका के सृजन कि सुंदर अवधारणाओं से सम्पन्न शिव कुमार शर्मा जी कि काव्य संगम लहरी के दो महत्वपूर्ण भाग है प्रथम भाग में जन्म जीवन के बिभन्न लड़ियों को पिरोती मुक्तको कि वीथिका के रूप मे एक से बढ़कर एक मुक्तक है तो दूसरे भाग में चौबीस गीत ऐसे जो हृदय को स्पर्श स्पंदित करते सामाजिक संदर्भ सरोकार के सुंदर गीत है ।मुक्तको के माध्यम से कवि हृदय कि अभिव्यक्ति ने जन्म कि अधिष्ठात्री माँ ज्ञान ,ध्यान ,वरदान कि वरदायनी वीणा पाणी एव पृथ्वी को श्रोत सूक्त के रूप में निरूपित करने में सफलता पाई है तो जीवन कि आराधना, आराध्य ,धर्म ,सनातन, सत्य ,मर्म को मर्यादित एव उसके मौलिक मूल्यों के सत्यार्थ में प्रस्तुत एव परिभाषित करने कि असाधरण एव सराहनीय प्रयास किसी भी मानव मस्तिष्क को काव्य वीथिका की ओर आकर्षित करता हुआ उसे मानवता एव मानवीय संवेदनाओं के प्रति जागरूक करता है संगम काव्य लहरी।मुक्तक वीथिका में जीवन के सभी अवयव ,अध्याय अवयवों को प्रभावी भाषा शैली व्याकरण एव वर्णमाला में पिरोकर कवि द्वारा जीवन के कर्तव्य दायित्व बोध शोध कल्पना एव विज्ञान को समन्वयक स्वरूप में प्रस्तुत करने का सफल प्रयास है संगम काव्य लहरी।कोमल ,कठोर ,विनम्र एव दृढ़ पुष्प आराध्य ,आराधना के साथ साथ वर्तमान नैतिक ,लोकतांत्रिक मूल्यों में व्यक्तिगत मत महत्व कि महिमा को समाहित करते हुए एक अनूठा काव्यात्मक प्रयोग है मुक्तक वीथिकायुक्त सयुक्त संगम काव्य लहरी।मुक्तक के साहित्यिक सिंद्धान्तों पर शिवकुमार शर्मा जी कि मुक्तक वीथिका काव्यात्मक सिंद्धान्तों के अनुरूप पाठकों के हृदय को सोचने समझने को विवश करने के लिए पर्याप्त प्रभावकारी है संभाग का संकलन है संगम लहरी।सम वार्णिक सम मात्रिक एव तुकांत अतुकांत का ऐसा असाधारण समन्वय मुक्तक विधिका और शिवकुमार शर्मा जी कि अद्वितीय क्षमताओं का ऐसा दर्पण है संगम काव्य लहरी जो यदा कदा ही दृष्टिगत होता है ।मुझे विश्वास है कि सृजनात्मकता में एक अति महत्वपूर्ण पढाव कि शसक्त प्रस्तुति है मुक्तक वीथिका एव रस सुगंध बिखेरती गीतों का पुष्प गुच्छ हैसंगम काव्य लहरी।संगम काव्य लहरी का द्वितीय खंड गीत नव गीतों कि एक से बढ़कर एक शब्द भावों के सत्यार्थ कि लड़ियों की उत्कृष्ट चौबीस गीत मालाएं कवि लेखक विचारक शौम्य, मृदु एव सामाजिक, राष्ट्रीय, चेतना सरोकार के सर्वज्ञ शर्मा जी द्वारा अपनी भवाअभिव्यक्ति से समय समाज एव राष्ट्र को जागरूक करते हुए सामाजिक सम्बन्धो के संस्कार एव राष्ट्रीय जागृति के जन्मेजय अनुष्ठान संकल्प कि शाश्वत सत्यार्थ अभिव्यक्ति रस, छंद,अलंकार ,समास, सन्धि एव कल्पना कि वास्तविकता के धरातल पर कायिक मानसिक संवेदना को स्पर्श करते हुए उसकी चैतन्य सत्ता को उसके दायित्व कर्तव्य बोध के लिए अनुकरणीय आदर्श है तो मौलिक जीवन सिद्धांतों को प्राण पण से व्यक्त करते हुए उसके महत्व को रेखांकित इस उद्देश्य से किया गया है कि पढ़ने वाला, सुनने वाला गीत कि भावनाओं एव उद्देश्यों के यथार्थ को सोचने को विवश हो एव कवि लेखक शर्मा जी कि अभिव्यक्ति विचार को जीवन के नैतिक मूल्यों में आचरण एव मर्यादा के रूप में स्वीकार करातीअद्वितीय कृति है संगम काव्य लहरी।शर्मा जी कि लेखनी में समय शब्द कि धार तो मन हृदय को स्पर्श करती स्पंदित करती सकारात्मक सार्थक प्रासंगिक परिभाषित पराक्रम पुरुषार्थ के सामाजिक राष्ट्रीय जागरण का आवाहन है मुक्तको एव गीतों की सुमरिनि माला है संगम काव्य लहरी।शर्मा जी द्वारा शब्दो का श्रेष्ठ समन्वय समायोजन एव उसके अर्थ महत्व कि उपयोगिता का ऐसा अनूठा संगम मुक्तक लोक एव गीत गलियारा जिसके माध्यम से साहित्य कि समरस संस्कृति एव हिंदी साहित्य कि विनम्र, धारदार ,प्रकृति प्रवृत्ति का आद्योपांत मधुरस मिश्रण हृदय को प्रेम भक्ति संवेदनाओं का आभास संचार है तो सामाजिक जड़ता द्वेष एव असमानता पर गम्भीर प्रहार है प्रयास है संगम काव्य लहरी।मुक्तक लोक मन को झकझोरता है तो विचारों को सार्थक सोच कि संस्कृति कि तरफ आकर्षित कर पुरुषार्थ कि नकारात्मकता का समन करता है साथ ही साथ अंतर्मन को विशुद्ध सात्विक उपयोगी अवसर कि प्रेरणा प्रदान करने के लिए दिशा दृष्टि दृष्टिकोण प्रदान करते हुए जीवन की पूर्णता सम्पूर्णता के ज्ञान योग धर्म एव मर्म को परिभाषित कर जीवन की हताशा निराशा को समाप्त कर जीवन पथ के उद्देश्यों कि वास्तविकता को स्प्ष्ट करता हुआ काल समय वर्तमान से भविष्य कि प्रेरणा का सुंदर सुगंधित पुष्पो का गुलदस्ता है संगम काव्य लहरी।संगम काव्य लहरी जिसके दोनों ही खण्ड मुक्तक लोक एव गीत गलियारा जीवन के पल प्रहर उतार चढ़ाव संसय भ्रम आदि का निराकरण निवारण साहित्यिक मर्यादाओं के संतुलित ,अनुशासन में प्रस्तुत करते है निश्चित रूप से वर्तमान समय मे विद्वान कवि लेखक विचारक शर्मा जी का प्रयास वर्तमान से भविष्य को सकारतात्मक दृष्टि प्रदान करते हुए मौलिक चिंतन कि ओर ले जाता है साथ ही साथ मानव समाज को उसके उत्तदायित्व के प्रति सजक बनाता है संगम काव्य लहरी।निश्चित निर्विवाद रूप से बहुत स्प्ष्ट है शर्मा जी द्वारा बेहद गंभीर गरिमामय साहित्यिक अनुष्ठान के संकल्प के अंर्तमन संकल्प के जीवन पल प्रहर में समाज ,राष्ट्र एव समय के समक्ष मुक्तक लोक ऐसी भावनाओ संवेदनाओं कि अभिव्यक्ति है जिसमे साहित्यिक शैली है सिंद्धान्त है व्यवहार है आचरण है चिंतन है उजियार है उद्देश्य का उत्कृष्ट उत्कर्ष है जो मन मस्तिष्क को समय समस्याओं के मकड़जाल से बाहर निकालकर समय समाज जीवन राष्ट्र को अचेतन स्थिति से चेतन एव जागृति के जागरण संदेश देता राष्ट्रीय सामाजिक सांस्कृतिक चेतना का शंखनाद करता है संगम काव्य लहरी।शर्मा जी का मुक्तक लोक कालजयी काल खंड है तो गीत गलियारा उत्साह उमंग उत्सव उल्लास कि ऊर्जा का संचार करती निराशावादी संस्कृति के पराभव का दर्पण ।शर्मा जी सकारात्मता सार्थक साहित्यिक अनुष्ठान प्रेरणा पराक्रम को साधुवाद।।
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश ।।