Tanashah - 5 in Hindi Fiction Stories by MaNoJ sAnToKi MaNaS books and stories PDF | तानाशाह - भाग 5

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तानाशाह - भाग 5

गौरवनगर – अंधकार का तूफ़ान
तानाशाह आकाश ठाकुर की योजना अब पूरी तरह से स्पष्ट हो चुकी थी। उसने सेना को पूरी ताकत के साथ गौरवनगर पर हमला करने का आदेश दिया था। उसका उद्देश्य न केवल विद्रोहियों को खत्म करना था, बल्कि पूरे शहर को सबक सिखाना था कि तानाशाह का विरोध करने का क्या अंजाम होता है।

पियाली और उसकी टीम इस हमले की जानकारी से पहले ही सावधान हो चुकी थी। शिवेंद्र के कबूलनामे ने उनकी योजना को और भी तेज कर दिया था।
“यह अब सिर्फ हमारी लड़ाई नहीं है। यह जनता की लड़ाई है। हमें हर नागरिक को इस युद्ध के लिए तैयार करना होगा,” पियाली ने अपनी टीम से कहा।

राजभवन में युद्ध की तैयारी

राजभवन के मुख्य कक्ष में, आकाश ठाकुर अपनी सेना के प्रमुखों के साथ बैठा था।
“यह गौरवनगर का आखिरी दिन है। मुझे इस शहर में विद्रोह का एक भी नामोनिशान नहीं चाहिए,” उसने ठंडे स्वर में कहा।
सुरक्षा प्रमुख ने सिर झुकाते हुए कहा,
“हम पूरी ताकत से हमला करेंगे, सर। हमारी सेना तैयार है। लेकिन विद्रोही चालाक हैं। उनके पास कोई न कोई योजना जरूर होगी।”

आकाश ने गुस्से में कहा,
“उनकी चालाकी अब काम नहीं आएगी। इस बार मैं व्यक्तिगत रूप से इस हमले की निगरानी करूंगा। मुझे उनकी हार अपनी आँखों से देखनी है।”

पियाली की योजना

दूसरी ओर, विद्रोही अपने गुप्त ठिकाने पर इकट्ठा हुए थे।
“हमें इस हमले को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाना होगा। लेकिन हमें सीधा युद्ध करने से बचना होगा। हमें तानाशाह की सेना को उनकी कमजोरियों से हराना होगा,” पियाली ने कहा।

नंदिता ने सुझाव दिया,
“हम शहर के सभी प्रमुख स्थानों को घेर सकते हैं और छोटे-छोटे समूहों में बंटकर हमला कर सकते हैं। इससे उनकी सेना बिखर जाएगी।”

आर्यन ने कहा,
“और हमें जनता को भी इस लड़ाई में शामिल करना होगा। अगर हर नागरिक खड़ा हो जाए, तो कोई भी सेना हमें हरा नहीं सकती।”

पियाली ने सहमति जताई।
“यह लड़ाई सिर्फ हमारी नहीं है। यह हर उस व्यक्ति की है जिसने तानाशाह के अत्याचार सहे हैं। हमें उन्हें जागरूक करना होगा कि यह उनकी आज़ादी का मौका है।”

जनता की भागीदारी

पियाली और उसकी टीम ने शहर के हर कोने में संदेश भेजा।
“यह समय है तानाशाह के खिलाफ खड़े होने का। अगर हम अब नहीं लड़े, तो हमारी आज़ादी हमेशा के लिए छिन जाएगी। इस लड़ाई में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।”

शहर के लोग अब डर से बाहर आ रहे थे। तानाशाह के अत्याचारों ने उन्हें विद्रोह के लिए प्रेरित किया।
“हम भी इस लड़ाई में शामिल होंगे,” एक बूढ़े व्यक्ति ने कहा।
“यह हमारी अगली पीढ़ी की आज़ादी की लड़ाई है। हमें अब पीछे नहीं हटना चाहिए,” एक युवा लड़की ने कहा।

पहला हमला

तानाशाह की सेना ने गौरवनगर में प्रवेश किया। उनके पास आधुनिक हथियार थे, और वे हर गली में विद्रोहियों को ढूंढ रहे थे।
लेकिन विद्रोही तैयार थे। उन्होंने गुप्त रूप से शहर के अलग-अलग हिस्सों में घात लगाकर हमले शुरू कर दिए।
“हम सीधे हमला नहीं करेंगे। हमें उनकी कमजोरी का फायदा उठाना होगा,” आर्यन ने कहा।

विद्रोहियों ने तानाशाह की सेना के खाने-पीने की आपूर्ति को काट दिया। उन्होंने शहर की बिजली और पानी की लाइनें बंद कर दीं।
“अगर हम उनकी आपूर्ति को खत्म कर देंगे, तो उनकी ताकत कमजोर हो जाएगी,” पियाली ने समझाया।

तानाशाह का पलटवार

आकाश ठाकुर को जैसे ही इन घटनाओं की जानकारी मिली, वह आग बबूला हो गया।
“ये विद्रोही सोचते हैं कि वे मुझे हरा सकते हैं? मैं उन्हें ऐसा सबक सिखाऊंगा कि आने वाली पीढ़ियाँ भी कांपेंगी,” उसने कहा।

उसने अपनी सेना को आदेश दिया कि वे शहर के हर घर की तलाशी लें और विद्रोहियों को ढूंढकर खत्म कर दें।
“मुझे कोई दया नहीं चाहिए। हर वह व्यक्ति जो विद्रोहियों का समर्थन कर रहा है, उसे सजा दो,” उसने कहा।

पियाली का साहस

पियाली ने जनता को संबोधित किया।
“यह समय है हमारे साहस को दिखाने का। तानाशाह हमें डराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हम नहीं डरेंगे। अगर हम एकजुट होकर लड़ेंगे, तो कोई भी ताकत हमें हरा नहीं सकती।”

उसकी बातों ने जनता के दिलों में जोश भर दिया।
“हम तुम्हारे साथ हैं, पियाली!” लोगों ने नारे लगाए।


युद्ध का पहला बड़ा मोर्चा

तानाशाह की सेना और विद्रोही आमने-सामने आ गए।
एक तरफ तानाशाह की विशाल और आधुनिक सेना थी, तो दूसरी तरफ विद्रोहियों का साहस और जनता का समर्थन।

पहला मोर्चा शहर के मुख्य चौक पर हुआ।
“यह हमारी आज़ादी का पहला कदम है। हमें हार नहीं माननी है,” पियाली ने कहा।

विद्रोहियों ने अपनी रणनीति के अनुसार हमला किया। उन्होंने सेना को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट दिया और उन्हें हराने लगे।
“यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि हमारे हौसले की है,” आर्यन ने कहा।

क्रमश: