The fragrance of the soil of India's first President Bharat Ratna Dr. Rajendra Prasad Ji - Siwan in Hindi Magazine by नंदलाल मणि त्रिपाठी books and stories PDF | भारत के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी की माटी की सुगंध - सिवान

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भारत के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी की माटी की सुगंध - सिवान

ऐतिहासिक धार्मिक सांस्कृतिक धन्यधरोहरों की माटी जनपद-सिवानभरतीय गणराज्य के बिहार प्रान्त सारण प्रमंडल के अंतर्गत एक नगर है जहाँ जनपद का मुख्यालय स्थित है।बिहार के पश्चिमोत्तर एव पूर्वी उत्तर प्रदेश का सीमावर्ती दाहा नदी के तट पर बसा जनपद है सिवान जिसके उत्तर तथा पूर्व में गोपाल गंज एव सारण तथा पूर्व में उत्तर प्रदेश केदेवरिया एव बलिया जनपद स्थित है।।सिवान के नाम पर ऐतिहासिक मान्यताएं--(क) प्रथम मान्यता--सिवान अलीगंज सावन नाम से जाना जाता था अली बक्स इलाके के मशहूर सामंतों में एक थे ।(ख)दूसरी मान्यता--सिवान नाम के विषय मे दूसरी किविदंति यह है कि भोजपुरी भाषा मे सिवान किसी भी सीमा को दर्शाता है चूंकि सिवान नेपाल के दक्षिणी में अपनी सीमा रखता है अतः जनपद का नाम सिवान पड़ा।(ग)तीसरी मान्यता--तीसरा मत यह है कि सिवान की उतपति एक बंद राजा के नाम से पड़ा  जिसके उत्तराधिकारियों ने लंबे समय तक राज्य किया राजा का नाम शिवन माना गया है अतः जनपद का नाम सिवान पड़ा।(अ)इतिहास- पांचवी सदी ईसा पूर्व सिवान कोसल महाजनपद का अंग था कोसल के उत्तर में नेपाल दक्षिण में सर्पिका नदी पूरब में गंडक तथा पश्चिम में पांचाल प्रदेश था। इसके अंतर्गत आज के फैज़ाबाद, बस्ती, देवरिया ,गोरखपुर एव सारण क्षेत्र थे सारण क्षेत्र में गोपाल गंज एव सिवान आता है।आठवीं शताब्दी में यहाँ बनारस के शासको का आधिपत्य था पन्द्रहवी शताब्दी में सिकन्दर लोदी ने अपना आधिपत्य स्थापित किया बाबर ने अपने बिहार अभियान के अंतर्गत सिसवन घाघरा नदी पार किया और मुगल शासन का हिस्सा बनाया। अकबर के शासन के दौरान लिखे गए आईने अकबरी के अनुसार कर संग्रह के लिए बनाए गए छः सरकारों में सारण एक महत्वपूर्ण वित्तीय क्षेत्र था जिसके अंतर्गत बिहार का भाग आता था।सत्रहवीं शताब्दी में यहां डच आए किंतु बक्सर युद्ध मे विजय के बाद  सन सत्रह सौ पैंसठ में अंग्रेजों को यहाँ की दीवानी का अधिकार प्राप्त हो गया।सन अठ्ठारह सौ उनत्तीस में जब पटना प्रमंडल बनाया गया तब तब सारण एव चंपारण को एक जनपद के रूप में रखा गया सन उन्नीस सौ आठ में तिरहुत प्रमंडल बनने के बाद सारण को इसके अंतर्गत रखा गया जिसके अंतर्गत गोपाल गंज सिवान एव सारण जिला एव सारण अनुमंडल बनाए गए।अठ्ठारह सौ सत्तावन कि क्रांति से आजादी मिलने तक सिवान के जुझारू निर्भीक जनता ने आजादी की लड़ाई लड़ी।उन्नीस सौ बीस में असहयोग आंदोलन के समय ब्रज किशोर प्रसाद ने पर्दा प्रथा के विरुद्ध आंदोलन चलाया उन्नीस सौ सैंतीस अड़तीस के मध्य हिंदी के मुर्द्वन्व विद्वान राहुल सांकृत्यायन ने किसान आंदोलन की आधारशिला रखी भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष में यहां से मजरुल हक,राजेन्द्र प्रसाद ,महेंद्र प्रसाद ,राम दास पांडे एव फुलेना जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों ने सिवान को उच्च स्थान दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन किया।स्वतंत्रता के पश्चात 1981 में सारण को प्रमंडल का दर्जा मिला जून 1970 में बिहार में त्रिवेदी अवार्ड लागू होने पर सिवान का परिसीमन किया गया घघरा नदी के बहाव के अनुसार लगभग 13000 एकड़ उत्तरप्रदेश को स्थानांतरित कर दिया गया जबकि 6600 एकड़ भूमि सिवान को प्राप्त हुई।1972 में सिवान को जिला अनुमंडल बना दिया गया जिले का मुख्य प्रखंड गोरया कोठी है जो केंद्रीय असेम्बल को हिंदी में सम्बोधित करने वाले नारायण बाबू की जन्म स्थली है।सिवान जिले के सबसे प्रसिद्ध गांवों अमलोरी कंधवारा है जो राम जी चौधरी के नाम से जाना जाता है।(ब)भूगोल-सिवान जिला उत्तरी गंगा के मैदान में स्थित समतल भू भाग है जिले का विस्तार 25 -53' 26-23' , 84-1' 84-47'   पूर्वी देशांतर के मध्य है नदियों के द्वारा एकत्र की गई मिट्टी की गहराई 5000 फिट तक है मैदानी भाग का ढाल उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व की ओर है निचले मैदान में जल जमांव के कई क्षेत्र है जो चौर कहलाते है यहां से कई छोटी नदियां निकलती है जिन्हें सोता भी कहते है मुख्य नदी घाघरा है जिसके किनारे दरार है इस खास बालू की मोटी परत पर सिल्ट की पतली परत पाई जाती है सिवान की मिट्टी खादर नई जलोढ़ एव पुरानी जलोढ़ के बीच की है खादर मिट्टी को यहाँ दोमट और बांगर को बलसुन्दरी कहा जाता है बलसुन्दरी मिट्टी में कंकड़ की मात्रा पाई जाती है कई जगहों पर कंकड़ युक्त मिट्टी मिलती है जहां भी कभी साल्टपीटर निकलता था अंग्रेजी शासन में यह उद्योग हुआ करता था लेकिन अब यह समाप्त हो चुका है।(स)नदियां--  गंडकी एव घाघरा यहां की प्रमुख नदियाँ है घाघरा नदी जिले के दक्षिणी छोर पर बहने वाली सदावाही नदी है इसके अलावा ,झरहि ,दाहा,धमती, सियाही, निकारी और सोना जैसी छोटी नदियाँ भी है झरहि और दाहा गंडक की सहायक है तो जबकि गंडकी एव धमती गंडक में जा मिलती है।(द)जलवायु--सिवान में उत्तर प्रदेश एव पश्चिम बंगाल के बीच की जलवायु पाई जाती है मार्च से मई के बीच चलने वाली पछुआ हवाओ के कारण मौसम शुष्क हो जाता है लेकिन कई बार चलने वाली पुरवईया आद्रता ले आती है जिससे उत्तर प्रदेश से चलने वाली धूल भरी आंधी को विराम लग जाता है गर्मियों में तापमान 40 सेल्सियस तक पहुंच जाता है और लू का चलना आम बात हो जाता है जाड़ों का मौसम सुहाना होता है कभी कभी शितलहर का प्रकोप होता  है जुलाई से सितंबर तक सामान्य मानसूनी वर्षा के अलावा पश्चिमी अवदाव के कारण  बारिष होना सामान्य बात है सिवान की औसत वर्षा 120 सेंटीमीटर होती है।(य)प्रशासनिक विभाजन--अनुमंडल- सिवान- महराजगंज(र)प्रखंड- मैरवा,पचरुखी ,रघुनाथपुर,अंदर ,गुठनी,महारगंज, दरौली ,सिसवन दरौंदा ,हुसैन गंज ,भगवपुर,हाट गोरयाकोठी,बारहरिया ,हबीबपुर,बसंतपुर लकरी ,नवीगंज, जीरादेई, नौतन हसनपुर, जमालपुर सिवान में लंबे लंबे समय तक ब्राह्मण राजपुत एव भूमिहारों का दबदबा रहा है युद्ध मे हिन्दू पक्ष की जीत हुई थी लेकिन विश्वनाथ राय वीरगति को प्राप्त हो गए हिंदुओ में आपसी फूट का फायदा सदैव आक्रमणकारियों ने उठाया यदि अन्य हिन्दू राजाओं ने विश्वनाथ राय की मदद की होती तो वर्तमान इतिहास कुछ और ही होता।।(ल)कृषि एव उद्योग---धान, गेंहू ,गन्ना ,मक्का ,अरहर इसके अतिरिक्त कुछ जगहों पर व्यवसायिक खेती के रूप मे फूलों एव सब्जियों की खेती होती है कृषि आधारित कुटीर उद्योग के अलावा उद्योगों में गन्ना मिल ,सूत फेक्ट्री,प्लास्टिक फेक्ट्री, के अलावा तम्बाकू एव परवल की खेती व्यवसायिक स्तर पर की जाती है इसके अतिरिक्त मत्स्य पालन ,मुर्गीपालन, एव दूध के लिए गाय एव भैस पालन मुख्य उद्योग है।(व)जनजीवन एव संस्कृति---सिवान जिले का अधिकांस जन जीवन कृषि पर आधारित है इसके अतिरिक्त अरब देशों के लिए श्रम एव श्रमिको के पलायन का सबसे बड़ा क्षेत्र है अरब देशों से परिजनों द्वारा भेजे गए पैसे से भी जन जीवन पालन का प्रमुख स्रोत है।सिवान में बीसवीं सदी के मध्य तक भोजपुरी भाषा कि लिपि कैथी आधिकारिक कार्यो के प्रचलन में थी परन्तु यह अब मृत प्रायः है जिसका प्रमुखकारण प्रशासनिक तुष्टिकरण नीति ही है।(श)महत्वपूर्ण व्यक्ति- (च)डॉ राजेन्द्र प्रसाद -  स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी के प्रमुख एव महत्वपूर्ण सहयोगी भारत के प्रथम राष्ट्रपति।(छ)मौलाना मजरुल हक-सदाकत आश्रम एव बिहार विद्यापीठ के संस्थापक ,स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,हिन्दू मुश्लिम एकता के प्रतीक (झ)खुदाबक्श खान--पांडुलिपि संग्रहकर्ता एव खुदाबक्श पुस्तकालय के संस्थापक (ज)फुलेना प्रसाद- स्वतंत्रता संग्राम सेनानीब्रजकिशोर प्रसाद-स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एव पर्दा प्रथा आंदोलन के जन्मदाता (ट)उमाकांत सिंह-9 अगस्त -1942 को बिहार सचिवालय के सामने शहीद हुए क्रांतिकारियों में एक।दरोगा राय- बिहार के पूर्व मुख्य मंत्री(ठ)प्रभावती देवी---सर्वोदय आंदोलन के प्रणेता 1971-1972  समग्र क्रांति की धुरी जयप्रकाश नारायण की पत्नी(त)धरामदास पांडेय--जमींदार एव भारतीय स्वतंत्रता संग्राम  सेनानी अंग्रेज दरोगा को सरेमाम थप्पड़ मारने वाले जिसके कारण कुछ समय के लिए गांव अंग्रेजी शासन व्यवस्था से अलग हो गया भारत की स्वतंत्रता के बाद किसी भी पद को स्वीकार नही किया।(थ)पैगाम अफाकी---मशहूर उर्दू साहित्यकार मकान,माफिया ,दरिंदा जैसी किताबो के रचयिता(द)मशहूर ठग---नटवरलाल का जन्म बरई बांगरा गांव में सिवान जिले में हुआ था।। सिवान के धार्मिक एव पर्यटन स्थल-1- दोन स्तूप (दरौली) --दरौली प्रखंड का दोन गांव एक महत्वपूर्ण बौद्धस्तल है दरौली का नाम मुगल शासक शाहजहाँ के बेटे दारा शिकोह के नाम पर पड़ा ऐसी मान्यता है कि दोन में भगवान बुद्ध का अंतिम संस्कार हुआ था यहाँ एक बहुत पुराना किला है हिन्दू धर्मावलंबियों का मानना है कि किला महाभारत काल का है जिसे आचार्य द्रोण ने बनवाया था चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वर्णन में एक स्तूप होने का साक्ष्य बताया है।अवशेष स्थल पर तारा मंदिर बना है जिसमें नौ सौ साल पुरानी मूर्ति स्थापित है।2-अमरपुर-- दरौली से तीन किलोमीटर पश्चिम में घाघरा नदी के किनारे स्थित अमरपुर गांव मुगल बादशाह (1626-1658) शाहजहां के  नायब अमर सिंह ने एक मंदिर का निर्माण कराना प्रारम्भ किया जो पूरा नहीं हो सका लाल पत्थरों के अधूरी मस्जिद को आज भी देखा जा सकता है।3-मैरवा धाम- मैरवा प्रखंड मुख्याल से कुछ दूर झरहि नदी के किनारे हरिराम बाबा धाम है यहाँ एक संत कि समाधि है प्रत्येक वर्ष चैत्र माह में हरिराम बाबा मेले का आयोजन होता है ।हरिराम बाबा धाम एक ब्रह्म स्थान है ऐसी आम जन की धारणा है कि यहां दर्शन पूजन से प्रेत एव दानवीय बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यहॉँ डाक बंगले के सामने  चननिया डीह ( ऊंची भूमि) एक अहिरनी औरत के आश्रम को पूजा जाता है।4-महेंद्र नाथ मंदिर- सिसवन प्रखंड में स्थित मेंहदार गांव के वावन बीघे में पोखर के किनारे भगवान शिव एव भगवान विश्वकर्मा का मंदिर बना है लोंगो द्वारा विश्वकर्मा पूजन दिवस सत्रह सितंबर को पोखरे में स्नान कर भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाता है।स्थानीय लोंगो कि मान्यता है पोखरे में स्नान करने कर पूजन वदन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।5- लकड़ी दरगह- पटना के मुस्लिम सन्त अर्जन शाह की दरगाह है यहां इसी कारण यह स्थान लकड़ी दरगह के नाम से प्रसिद्ध है प्रत्येक वर्ष रब्बी -उस-सानी ग्यारहवें दिन होने वाली उर्स पर बहुत भीड़ होती है सन्त अर्जन शाह दरगाह पर लकड़ी की बेहतरी कारीगरी कसीदाकारी का नमूना है ऐसी मान्यता है की यहाँ कि प्राकृतिक खूबसूरती से प्रभावित होकर अर्जन शाह यही बस गए और चालीस दिनों तक चिल्ला करते रहे।6- हसनपुर--हुसैनी गंज प्रखंड का हसनपुरा गांव अरब से आए  जिनका नाम मख्दूम सैयद हसन चिश्ती और यही बस गए और यही उन्होंने खानकाह भी स्थापित किया।7-भिखाबाँध-- महाराज गंज प्रखंड में स्थित भीखा बांध में एक विशाल बृक्ष के नीचे भाई बहन का मंदिर बना हुआ है कहा जाता है चौदहवी शताब्दी में मुगल सेना से अकेले भाई बहन ने टक्कर लिया और उनके दांत खट्टे कर दिए और अंततः वीर गति को प्राप्त हुए इस साहसी देश भक्तों की स्मृति में मंदिर का निर्माण हुआ जो उनके राष्ट्रप्रेम एव बलिदान का धरोहर है।8-फरीदपुर- भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सिवान कि माटी का फरीदपुर गांव जहाँ धार्मिक समरसता एव स्वतंत्रता के नायक बिहार रत्न मौलाना मजरुल हक का जन्म हुआ था।9-हड़सर-दुरौधा रेलवे स्टेशन से दो किलोमीटर हड़सर में माँ काली का बहुत प्राचीन मंदिर है आम जन कि मान्यता है कि अपने भक्त रहसु भगत के आवाहन पुकार पर माँ काली कलकत्ते से थांवे के लिए चली माता काली के कलकत्ता से थांवे के मध्य पड़े विश्राम स्थलों में हड़सर माता काली का अंतिम विश्राम स्थल था जहाँ से वह थांवे पहुंची।10-पतार-- पतार में राम जी बाबा का मंदिर है आम जन कि ऐसी मान्यता है कि यदि किसी को सर्प काट लेता है तो पतार में राम जी बाबा के दर्शन मात्र से ठीक हो जाता है मान्यता में सच्चाई भी है ।पतार में ही विश्वनाथ पांडेय जी के सुपुत्र ख्यातिलब्ध मुर्दन्व  ज्योतिष विद्वान मुरारी पांडेय जी की जन्मस्थली भी है। 11-नरहन-- सिवान जनपद मुख्यालय से तीस किलोमीटर दूर सनातन धर्मावलंबियों का महत्वपूर्ण तीर्थ है यहां कार्तिक पूर्णिमा एव मकरसक्रान्ति के दिन मेले का आयोजन होता है और श्रद्धालु पवित्र सरयू नदी में स्नान करते है यहाँ अश्वनी पूर्णिमा को दुर्गा पूजन के साथ भव्य जलूस निकलता है जिसे देखने दूर दूर से लोग आते है यहां श्री नाथ जी महाराज मंदिर, ठाकुर जी मंदिर,माता भगवती मंदिर ,काली मंदिर ,राम जानकी मंदिर गांव के चारो तरफ स्थित है।।12- दोभिया-- सिवान जनपद में मैरवाँ से दरौली मुख्य मार्ग पर स्थित है यहां बाबा धर्मागत बरमभ यहां बहुत दूर दूर से भक्त सोमवार एव शुक्रवार को आते है एव अपनी मनोकामनाओ की पूर्णता का आशीर्वाद मांगते है गांव वालों की मान्यता है कि बाबा आज भी जीवित है कोई जब सच्चे मन से बाबा को पुकारता है तो प्रत्यक्ष दर्शन देते है ।बाबा कि कृपा से दोभिया गांव   बहुत सम्पन्न है और ग्रामवासी खुशहाल है।13-कंधवारा--मुक्तिधाम, मसान माई ,विदेशी बाबा घाट यह जंगलों से घिरा था जिसे कबीर मठ कंधवारा के नाम से जाना जाता है यह स्थान बहुत पवित्र है और यहां श्रद्धालुओं का निरंतर आना जाना लगा रहता है।।15-सोहगरा--सिवान जनपद में स्थित सोहगरा का बाबा हँसनाथ मंदिर बहुत प्राचीन है यहां जाने के लिए गुठनी चौराहे से तेनुआ मोड़ से नैनीजोर गांव होते हुए जाया जा सकता है यहाँ सन्त एव शिव भक्त नित्य निरंतर अपनी साधना करते रहते है शिवरात्रि के दिन यहाँ बहुत भीड़ होती है एव मेला लगता है ऐसी मान्यता है कि बाबा हँसनाथ जी स्वंय प्रगट हुए थे जिनके मंदिर का निर्माण शिव के अनन्य भक्त एव मानस पुत्र बाणा सुर ने बनवाया था ।ऐसी मान्यताएं है कि यहां भक्तों द्वारा मांगी गई मनौतियां पूर्ण होती है।15-जीरादेई--सिवान जनपद मुख्यालय से तेरह किलोमीटर दूर स्थित गांव जहाँ भारत रत्न स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत के प्रथम राष्ट्रपति का जन्म स्थान है ।डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी विलक्षण प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व थे जो वर्तमान एव भविष्य में भारतीयों एव युवा भारतीयों के लिए प्रेरक प्रेरणा स्रोत है डॉ साहब समुर्ण विश्व मे बिहार एव भारतीय गौरव के लिए जाने जाते है।।निष्कर्ष--सिवान बिहार प्रदेश का बहुत महत्वपूर्ण जनपद है यहाँ कि स्थानीय भाषा भोजपुरी है यहाँ के निवासियों का मुख्य कार्य खेती ही है सिवान की संस्कृति बिहार ही नही सम्पूर्ण भारतीयों के लिए धन्य धरोहर है एक बात चिंतनीय है यहाँ से लोंगो का पलायन भारत के अन्य प्रदेशों में बहुत तेजी से हो रहा है सीवान के लोग श्रमिक के रूप में मुंबई महाराष्ट्र ,गुजरात,केरल ,कर्नाटक ,तमिलनाडु आदि राज्यो में रोजगार की तलाश में जाते है जिसका प्रमुख कारण सिवान में बुनियादी ढांचों एव उद्योगों का अभाव है आर्थिक रूप से सक्षम लोग की संतानें शिक्षा के लिए भारत के बड़े शहरों में चले जाते है और बिहार का नाम रोशन करते है सिवान में भरपूर बौद्धिक क्षमता है जिसके समुचित विकास के संसाधनों के अभाव में पलायन संस्कृति ने जन्म ले लिया है जो एक गंभीर एव विचारणीय विषय है जिसे सिर्फ सरकार के प्रयास से नही बल्कि सरकार एव जनभागीदारी से समाप्त करने के गम्भीर प्रयास आवश्यक है।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी गोरखपुर उत्तर प्रदेश