Sathiya - 17 in Hindi Fiction Stories by डॉ. शैलजा श्रीवास्तव books and stories PDF | साथिया - 17

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साथिया - 17

उधर कॉलेज में।

सांझ एक कोने की तरफ बैठी एक सुनहरे रंग की डायरी में कुछ लिख रही थी।


" प्यारी दैनंदिनी तुम जानती हो बचपन से ही हर बात तुमसे कहने की आदत है क्योकि कोई सुनने वाला नही था। मम्मी पापा के जाने के बाद कौन था जो मुझसे बात करता मुझे सुनता।

कभी कभी जीजी सुनती थी पर उनकी अपनी अलग दुनिया है।

कॉलेज आये कितना समय हो गया। गाँव से यहाँ आकर मानो खुद से ही पहचान हो गई है। कितना मुश्किल होता है किसी पर आश्रित रहकर जीवन जीना।

भले चाचा जी अभी भी खर्चा दे रहे है पर फिर भी वहाँ रहना बहुत अजीब था।

एक बार मेरा कोर्स पुरा हो जाए तो खुद के पैरों पर खड़ी हो जाऊंगी और फिर उनका एहसान नही रहेगा मुझ पर।

ये कॉलेज बहुत अच्छा है । यहाँ आकर दिल को सुकून मिला।

शालू जैसी दोस्त और ..... वो भी तो मिले।

जानती हुँ मेरा इश्क मुकम्मल नही होगा पर ये दिल है कि समझता ही नही। सिर्फ उनको चाहता है ये जानते हुए कि इस चाहत का कोई खूबसूरत अंजाम नही होगा।" साँझ ने डायरी के पन्ने पर आज का हाले दिल लिखा।

सांझ की बचपन से आदत थी डायरी लिखने की।

जब किसी के पास कोई अपना नही होता दिल की बात कहने को या जब कोई सहज नही होता अपने दिल की बात हर किसी खुलकर नही कह पाते तो अपने भावों को डायरी में लिखते है।
कुछ लोग डायरी होबी की तरह भी लिखते है।

सांझ के पास कोई नही था बचपन से जिसे वो दिल की बात कह सके तो उसने इस डायरी को साथी बना लिया था।

" यहाँ क्या कर रही है?" तभी शालू ने आकर कहा तो सांझ ने पलटकर देखा और तुरंत डायरी बैग में रखने लगी।

" वो क्या है दिखा मुझे?" शालू ने डायरी देखकर कहा।

" नही वो नही।" सांझ बोली और डायरी बैग में पैक कर दी।

" तेरी सीक्रेट डायरी? " शालू आँखे छोटी करके बोली।

" नही मेरे अकेलेपन की साथी..! मेरी पहली दोस्त राजदार।" सांझ बोली।

" कभी तो तेरी ये डायरी जरूर पढूंगी।" शालू बोली और सांझ के साथ एक तरफ जाकर कुर्सी पर बैठ गई।


सांझ तू तो सिर्फ सरस्वती वंदना करने वाली है न? शालू ने पूछा।

" और एक डांस भी।" सांझ बोली।

" डांस? " शालू ने आँखे छोटी की ।

" आई लव डांसिंग। डान्स मेरे हर मूड का हिस्सा है। दर्द हो तब भी डांस से निकलता है खुशी हो तो भी डांस के जरिये व्यक्त होती है।" सांझ बोली।

"चल अच्छा है आज तेरा डांस की देख लेते हैं। वैसे इतने दिन हो गए तूने मुझे अब तक बताया नहीं कि तू डांस भी करती है। मुझे तो सिर्फ यही पता था कि तुझे सिंगिंग का शौक है और तेरी आवाज में साक्षात सरस्वती विराजमान है।" शालू ने कहा तो सांझ मुस्करा उठी।

" तु सिंगिंग मे कैरियर क्यों नही बनाती?" शालू बोली।

" कभी सोचा नही और मेरे पास इतने पैसे नही कि चार छः साल स्ट्रेगल कर सकूँ इस कैरियर के लिए। मुझे जल्दी से जल्दी इंडिपेंडेंट बनना है ताकि चाचा जी के एहसानों से मुक्ति पा सकूँ।" सांझ बोली।

" वो लोग तुझे प्यार क्यों नही करते?' शालू अचानक से बोली।


सांझ के चेहरे पर एक पल को दर्द आया और फिर वो संभल गई।

" कभी बताऊंगी तुझे बाकी कभी मेरी डायरी पढेगी तो जबाब मिल जायेंगे!" सांझ बोली।

" मतलब तेरी जिंदगी के राज जानने के लिए सांझ के इस डायरी रूपी पिटारे को खोलना ही होगा।" शालू शरारत से आँखे छोटी करके बोली तो सांझ मुस्करा उठी और फिर दोनों अपनी अपनी तैयारियों में लग गई।

धीरे-धीरे करके पूरा स्टाफ और सारे स्टूडेंट्स आ गए थे।

यूनिवर्सिटी का बड़े से सेमिनार हॉल को आज के प्रोग्राम के लिए रेडी किया गया था?

चारों तरफ खूबसूरत परदे लगे हुए थे और स्टेज को भी खूबसूरती से सजाया गया था।

सामने फ्रंट की दो रो में कॉलेज स्टाफ और जजेस के अलावा चीफ गेस्ट के लिए अरेंजमेंट थे। बाकी स्टूडेंट का अरेंजमेंट उसके पीछे की कुर्सियों पर था। कुछ चेयर साइड में भी लगाई गई थी और बाकी पीछे सीढ़ियां थी जहां पर कुछ लोग खड़े भी हो सकते थे जिन्हें अगर बैठने को जगह ना मिल पाए।


जिनके परफॉर्मेंस होने थे वह सभी बैकस्टेज में थे और अपनी अपनी तैयारियां में लगे हुए थे।


ईशान सुबह से यहीं पर बिजी था एक तो वह ना ही सीनियर था और ना ही है बिल्कुल जूनियर इसलिए अरेंजमेंट की ज्यादातर जिम्मेदारियां उन्हीं की क्लासेस को मिली हुई थी। सभी साथी स्टूडेंट्स उसकी पूरी पूरी मदद कर रहे थे।


" तो तैयार हो अपनी परफॉर्मेंस के लिए?" तभी ईशान ने शालू की बांह पकड़ एक तरफ ले जाते हुए कहा।

"हां क्यों नहीं बिल्कुल कर लूंगी मैं।" शालू बोली?


'पर हमने प्रैक्टिस बहुत ही कम की हैं। अब साथ में समय भी तो कम मिलता है? जितना प्रैक्टिस हो गई यूनिवर्सिटी में उतनी हमने कर ली।" ईशान ने कहा।

"डोंट वरी हमारा अच्छा ही जाएगा..!" शालू ने कहा।

"पहली बार किसी लड़की के साथ डांस करने वाला हूं तो मैं तो बड़ा ही नर्वस फील कर रहा हूं...!" ईशान ने अपना डर बताया।

"तुम लड़की सोच कर डांस करो ही मत..!" शालू ने कहा तो ईशान ने आँखे छोटी करके उसे देखा।

"तो क्या समझ कर करू? " ईशान ने शालू को अजीब सी नजरों से देख कर कहा तो बदले में शालू ने उसे घूर कर देखा।

" तुम्ही ने तो कहा कि तुम्हें लड़की समझकर डांस नहीं करूं तो फिर क्या समझूँ।" ईशान शालू की आँखों में झांककर बोला।


"मतलब कि हम दोस्त है ना तो मुझे फ्रेंड समझ कर डांस करो तो तुम कंफर्टेबल रहोगे। अगर लड़की लड़के का अंतर बीच में लाओगे ना तो नर्वस फील करोगे समझे और मैं नहीं चाहती कि तुम्हारे कारण मेरा डांस खराब हो। वैसे ही प्रेक्टिस के टाइम पर तुमने बहुत गलतियां की थी।" शालू मुँह बनाकर बोली।

"इतना नाराज क्यों हो जाती हो तुम? " ईशान ने उसकी आंखों में झांकते हुए कहा।

शालू ने नजर उठा उसकी तरफ देखा।

ईशान एक पल को उसकी आंखों में खो गया। अगले ही पल उसने शालू की कमर में हाथ लपेटा और उसे करीब कर लिया।

" जानना चाहती हो कि क्यों नर्वस हो जाता हूं?" ईशान ने कहा तो शालू ने अपनी पलकें झपकाईं।

"क्योंकि पहली बार किसी लड़की से दोस्ती की है...! क्योंकि पहली बार किसी लड़की के साथ डांस कर रहा हूं...! और हां पहली बार किसी लड़की को इस तरीके से छुआ है। डांस करने में कभी तुम्हारी कमर को तो कभी तुम्हारे कन्धे को हाथ लगाना पड़ता है और यह मेरा फर्स्ट एक्सपीरियंस है किसी लड़की के साथ यूँ घुलने मिलने का। समझ रही हो ना तुम..?" ईशान बोला।


"तो उसमे क्या है...? कपल डांस में तो ऐसा होता ही है।" शालू ने दोबारा कहा तो ईशान का दिल किया कि दीवार पर अपना सिर फोड़ दे।

"यह लड़की इतनी झल्ली क्यों है? इसको कभी भी मेरी फीलिंग समझ में क्यों नहीं आती है।" ईशान ने मन ही मन सोचा,

" क्या सोच रहे हो?" शालू बोली।

"रहने दो इसे समझना तुम्हारे बस का नहीं है।" ईशान बोला और शालू को छोड़कर दूसरी तरफ निकल गया।

शालू के चेहरे पर शरारती मुस्कुराहट आ गई।


"तुम वाकई में अलग हो इशू इसलिए तुम से अलग रिश्ता है। अब तक हर कोई मुझे देखते ही मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाने को और प्रपोज करने को तैयार रहता है। कुछ इसलिए क्योंकि मैं अबीर राठौर की बेटी हूं तो कुछ इसलिए क्योंकि मैं बेहद खूबसूरत हूँ। पर एक तुम हो जो दिल में फीलिंग होते हुए भी मुझसे कह नहीं पाते हो। समझती हूं तुम्हारी आंखों की भाषा पर मैं भी शालिनी राठौर हूं जब तक तुम प्रॉपर तरीके से अपने दिल की बात नहीं कहोगे मैं भी तुम्हें ऐसे ही तंग करती रहूंगी।" शालू खुद से बोली और जाते हुए ईशान को देखा जोकि खुद के ख्यालों में उलझा हुआ था।

"और मैं भी देखती हूं कब तक तुम अपने दिल की बात अपने दिल में दबा कर रखते हो...? कभी तो दिल की बात तुम्हारे होठों पर आएगी ना। जानती हूँ कि तुम्हें थोड़ा टाइम चाहिए थोड़ी हिम्मत चाहिए क्योंकि तुम बाकी और लड़कों की तरह नहीं हूं, जो एक मुलाकात में ही प्यार हो या ना हो पर लड़की आई लव यू बोल देते हैं। तुम अलग हो। तुम्हारी परवरिश अलग है। तुम और अक्षत दोनों का बिहेवियर भी अलग है। तुम जब तक कुछ भी नहीं कहोगे जब तक तुम हंड्रेड परसेंट अपने मन में श्योर् नहीं हो जाते। और साथ में तुम इस बात को भी सोचते होंगे कि कहीं मैं तुम्हारी बात का बुरा मान कर दोस्ती भी ना खत्म कर दूँ।

"इशू डोंट वरी आई लाइक यू...! आई थिंक आई लव यू। " शालू खुद से ही बोली और फिर अपनी परफॉर्मेंस के लिए के लिए रेडी होने के लिए बैकस्टेज चली गई।

ईशान वहां से बाहर निकल कर एक बेंच पर जाकर बैठ गया और अपने सिर को हाथों से पकड़ लिया।

"दुनिया के सामने इतना बकबक करता हूं..! सबके सामने बोलता हूं अक्षत हो मम्मी पापा हो या वह भूतनी पर शालू के आगे कुछ भी कहने की हिम्मत क्यों नहीं होती? जब भी बोलने की कोशिश करता हूँ तो जुबान चिपक जाती है मेरी। जब भी वह मुझसे कुछ ऐसा सवाल करती है तो दिल तो करता है कि उससे कह दूँ कि वह अब सिर्फ मेरी दोस्त नहीं है। प्यार करने लगा हूं उसे पर हिम्मत ही नहीं कर पाता हूं। कहीं इस प्यार व्यार के चक्कर में उसकी दोस्ती भी ना खो दूं। शी इज वेरी नाइस और मैं उसे नहीं खोना चाहता ना ही उसकी दोस्ती को।" ईशान ने खुद से ही कहा।

"पर कभी ना कभी तो कहना ही पड़ेगा । ठीक है थोड़ा सा वेट करता हूं सही समय आएगा तो उसे अपने दिल की बात कहूंगा और इतनी भी जल्दी क्या है जब प्यार हो गया है तो इजहार भी हो ही जाएगा ..! और मुझे पूरा यकीन है कि शालू की तरफ से भी इकरार ही होगा इनकार नही। पर फिर भी अगर उसने मना कर दिया तो मेरी किस्मत ..! क्योंकि अक्षत हमेशा कहता है प्यार कभी जबरदस्ती नहीं किया जाता। रिश्ते तभी जुड़ते हैं जब एहसास दोनों तरफ से हो। जब दोनों ही रिश्ते के लिए कंफर्टेबल हो। जब दोनों की ही फिलिंग्स बराबर हो तभी रिश्ते सक्सेसफुल होते हैं। और मैं अपनी लाइफ में एक सक्सेसफुल रिश्ता चाहता हूं। कोई जबरदस्ती का रिश्ता नहीं जैसा रिश्ता मम्मी और पापा का है बिल्कुल वैसा ही रिश्ता चाहता हूं मैं..! और फिर इतना हड़बड़ाने की क्या जरूरत है। जब अक्षत सालों तक इंतजार कर सकता है अपने दिल की बात सांझ से कहने के लिए तो मैं कुछ महीने तक तो रुक ही सकता हूं ना।' ईशान ने खुद को समझाया और फिर वह भी अपनी तैयारी करने के लिए चला गया।



क्रमश:

डॉ. शैलजा श्रीवास्तव