Ek Ladki - 21 in Hindi Love Stories by Radha books and stories PDF | एक लड़की - 21

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एक लड़की - 21

पंछी ऒर हर्ष कॉलेज से निकलने के बाद खूब मजे करते हैं। वो दोनों साथ में गोलगप्पे खाते हैं पंछी तीखे गोलगप्पे बनाने के लिए बोलती है तीखे गोलगप्पे की वजह से पंछी के आंसू तक आने लगे थे
हर्ष पूछता है- तुम इतने तीखे क्यों खा रही हो।
पंछी - क्योंकि मुझे तीखे गोलगप्पे खाना बहुत पसंद है। क्या तुम भी ट्राय करोगें ?
हर्ष- नहीं, नहीं मैं ये ही ठीक है।
कुछ देर बाद गोलगप्पे खाने के बाद पंछी को आइस क्रीम पार्लर दिखाई देता है वो कहती है - मुझे आइस क्रीम खानी है, मेरा मुँह बहुत जल रहा है।
हर्ष - 2 मिनट, मैं लेकर आता हूं।
हर्ष 2 चॉकलेट कोन लेकर आता है और दोनों खाते हुए आगे बढ़ते हैं। रास्ते में 2 आदमी रंग बिरंगे गुब्बारें बेच रहे थे उन गुब्बारों पर अलग अलग डिज़ाइन बने हुए थे वो बहुत खूबसूरत लग रहे थे। और उनसे कुछ दूरी पर लगभग 7 साल का एक लड़का खड़ा हुआ था। जो उन गुब्बारों को देखे जा रहा था। उसके कपड़ो को देख लग रहा था कि वो बहुत गरीब था जिसकी वजह से वो गुब्बारा नही खरीद सकता था । हर्ष उस बच्चे को देख लेता है वो उस गुब्बारें वाले के पास जाने लगता है पंछी आवाज़ लगाती है - कहाँ जा रहे हो ?
हर्ष - गुब्बारा लेने।
पंछी को आश्चर्य होता है और कहती है - क्या तुम अभी भी गुब्बारों से खेलते हो।
हर्ष वापिस उसके पास आता है है और कहता है पंछी, तुम ही बताओ गुब्बारें किसे पसन्द नहीं होते हैं ?
ऐसा बोल कर हर्ष गुब्बारा खरीदने चला जाता है। हर्ष को एक गुब्बारा खरीदते देख पंछी सोचती हैं- देखो, अपने खुद के लिए सिर्फ एक गुब्बारा ही खरीदा है, मेरे लिए तो लिया ही नहीं!
गुब्बारा ख़रीदने के बाद हर्ष पंछी का हाथ पकड़ साथ में उस बच्चे के पास जाता है हर्ष वो गुब्बारा उस बच्चे को दे देता है गुब्बारा पा कर वो बच्चा बहुत खुश होता है और गुब्बारा लेकर दौड़कर उसकी
माँ के पास चला जाता है। उस बच्चे को देख वो दोनों बहुत खुश होते हैं । कुछ देर उस बच्चे को देखने के बाद हर्ष पंछी से कहता है -चले ? पंछी हम्म में जवाब देती है।
कुछ दूर चलने पर हर्ष देखता है कि पंछी उसके साथ नहीं है इसलिए वो पीछे मुड़कर देखता है कि पंछी गुब्बारें वाले के पास थी उसने एक आदमी से उसके सारे गुब्बारें खरीद लिए थे। हर्ष उसके पास जाकर कहता है -ये क्या कर रही हो।
पंछी कहती है - तुम्हें क्या लगता है गुब्बारें सिर्फ बच्चों को ही पसन्द होते है।
उसकी बात सुन हर्ष मुस्कुराने लगता है ऒर कहता है - तुम भी ना ।
जिससे फिर पंछी भी हँस देती है। और दोनों गुब्बारा लेकर आगे चलने लगते हैं एक आदमी के सारे गुब्बारें बिक गए थे जिससे वो खुश होकर चला गया था और दूसरा वही गुब्बारें बेच रहा था। कुछ दूर चलने पर पंछी को अहसास होता है कि हर्ष उसके साथ नही है वो मुड़कर पीछे देखती है हर्ष उस दूसरे आदमी के सारे गुब्बारें खरीद कर ला रहा था हर्ष उसके पास आकर कहता है -देखो पंछी , मेरे पास तुमसे ज़्यादा गुब्बारें है।
पंछी- अरे!!! ऐसे कैसे, मेरे पास ज्यादा है।
हर्ष - वो तो दिख ही रहा है।
पंछी - अब नही रहेंगे। ऐसा बोलते हुए वो उन गुब्बारों को हर्ष से छीन लेती है और कहती हैं - अब तुम्हारे पास कुछ नहीं है।
हर्ष-पता है क्योंकि तुमने मुझसे सारे गुब्बारे छीन लिए।
पंछी कुछ नहीं कहती हैं और मुस्कुरा जाती है हर्ष भी पंछी को देख मुस्कुरा जाता हैं।
कुछ देर बाद दोनों चलते चलते एक झरने के पास पहुच जाते है वहां का नज़ारा बहुत ही सुंदर लग रहा था पंछी वही रुक जाती हैं ओर चारों और देख कर कहती है - मुझे ऐसी जगह बहुत पसंद है।
हर्ष - हां, पता है। तुमने एक बार बताया था।
पंछी - इन गुब्बारों को यहाँ छोड़ दु ?
हर्ष -तुम्हारी मर्ज़ी, तूम्हारे ही तो है।
पंछी - सारे ?
हर्ष - हां, सारे।
पंछी अपने हाथ को आगे करती हैं और एक ही पल में एक साथ सारे गुब्बारों को छोड़ देती हैं वहाँ की तेज हवाओं की वजह से सारे गुब्बारे ऊपर उठने लगते है जो बहुत ही सुंदर लग रहे थे। कुछ देर में सारे गुब्बारे बहुत ऊपर चले जाते है। कुछ देर देखने के बाद दोनों आगे बढ़ते हैं आज वो दोंनो बस चले ही जा रहे थे , कोई मंजिल नही थी जहाँ भी जो भी मिलता उसे इंजॉय करते हुए आगे बढ़ रहे थे। अब तक 12 बज चुके थे दोनो एक गार्डन में थे। जहाँ दोनो एक बड़े से पेड़ के नीचे बैंच पर बैठे हुए थे पंछी को देख लग रहा था कि वो बहुत थक चुकी है। उसे देख हर्ष कहता है - तुम ठीक हो ना ?
पंछी- हां, ठीक हूँ, बस थोड़ा थक गयी हु।
हर्ष - तो टैक्सी लेकर घर चलते है।
पंछी - नहीं थोड़ी देर बाद चलेंगे।
हर्ष - ठीक है, मैं पानी की बोतल लेकर आता हूं।
पंछी - ठीक है।
हर्ष पानी लेने चला जाता है। और कुछ देर बाद पानी की बोतल लेकर आते हुए कहता है - लो, पानी पी लो। लेकिन पंछी कोई जवाब नहीं देती है हर्ष पंछी के पास आकर देखता है कि पंछी पूरे बेंच पर सोयी हुई थी लेकिन उसके सिर के ऊपर की तरफ थोड़ी सी जगह थी। हर्ष 2 - 3 बार उसे आवाज़ लगाता है लेकिन पंछी कोई जवाब नहीं देती है। तो हर्ष उसके सिर के पास जाकर बैठ जाता है। और पंछी के उठने का इंतेजार करने लगता है बहुत देर तक वो फ़ोन भी चलाता है। और कुछ देर चारों और का नज़ारा भी देखता है लेकिन बहुत देर होने के बाद भी पंछी नही उठती है कुछ देर में हर्ष भी वही बैठे बैठे ही सो जाता है। उनके सोते हुए बहुत समय बीत जाता है पंछी के फोन की रिंगटोन की आवाज़ से पंछी कि निन्द उड़ती है वो धीरे धीरे अपनी आंखें खोलती हैं आंखे खोलने पर उसे ठीक ऊपर हर्ष का चेहरा दिखाई देता है जो उसके पास ही सोया हुआ था । जो सुकून की गहरी नींद में सोया हुआ था कुछ पल के लिए पंछी हर्ष में कही खो सी गयी थी पंछी हर्ष के चेहरे को बहुत बारीखी से देखने लगती हैं। उसकी आंखे ओर उसकी आईब्रोज जो परफेक्ट सेप में थी। हवा की वजह से उसके उड़ते बाल उसकी आईब्रोज को छु रहे थे जो बहुत ही आकर्षक लग रहे थे पंछी इनमे खो कर एक पल के लिए सब कुछ भूल गयी थी अचानक से उसके फ़ोन की दुबारा आवाज़ आती है जिससे पंछी अपने ख्यालो से निकल कर होश में आती है और अपना फ़ोन चेक करती है ऋषि का कॉल आया हुआ था पंछी की नज़र एक बार फिर से हर्ष पर पड़ती हैं जो अभी भी सोया हुआ था। पंछी उठ कर बैठ जाती हैं और ऋषि का कॉल अटेंड करती हैं ऋषि कहता है - कहाँ हो ? पंछी - गार्डन में। ऋषि - गार्डन में कैसे ? और कौन कौन गया ? पंछी - मैं और हर्ष दोनो है थोड़ी देर में निकल रहे हैं।
ऋषि - ठीक है, घर पहुँच कर दुबारा कॉल करना।
पंछी - ठीक है।
और कॉल कट कर देती हैं फिर फ़ोन में टाइम देखती है 3 बज चुके थे।पंछी हर्ष की तरफ देखती है जैसे बहुत कुछ कहना चाह्ती हो लेकिन कह नहीं सकती। तभी पंछी की नज़र कहि दूर एक कपल पर जाती है जो एक दूसरे से पेपर के जरिये बातें कर रहे थे पहले कोई एक पेपर पर कुछ लिख कर दूसरे को देता फिर दूसरा पेपर में कुछ लिख कर पहले को देता। उन्हें ऐसा करते देख पंछी अपने बैग से एक पेपर निकालती है और उसमें जो भी वो हर्ष से कहना चाहती थी वो लिखना शुरू करती हैं।

" तुम्हें पता है हर्ष, जब मैं पहले दिन कॉलेज आयी थी तब मुझे लगा था कि तुम बहुत बुरे हो सभी को परेशान करते हो लड़ाई झगड़ा करते रहते हो। और फिर जब मैं ऋषि से मिली थी तब मुझे ऋषि बहुत अच्छा लगा था मुझसे ऋषि अच्छा लगने लगा था, जैसे जैसे मैं तुम्हारे साथ रहने लगीं तब मुझे पता चला कि तुम इतने बुरे भी नहीं हो मुझे तुम्हारा साथ बहुत अच्छा लगता था लेकिन मैं इस चीज़ को समझ ही नहीं पायी। जब ऋषी ने मुझे प्रोपोज किया तो मैंने हा कर दी। मेने ये सब दीदी को भी बताया था तुम्हे पता है उन्होंने क्या बोला । उन्होंने बोला की मैं असल में तुम्हें पसन्द करने लगी हु ऋषि की तरफ तो मैं सिर्फ आकर्षित हुई थी जिसे मैंने प्यार समझ लिया। लेकिन मैंने उनकी बात मानी ही नहीं। बाद में मुझे पता चला कि दीदी सही बोल रहे थे मैने अपनी हि फ़ीलिंग्स को नही पहचान था। असल में तो मैं तुम्हें पसन्द करती हूं बहुत समय से मैं तुम्हें पसंद करती हूं लेकिन मैंने तुम्हें कभी बताया नही और शायद बता भी नहीं सकती।
क्योंकि मैं ऋषि को धोखा नहीं दे सकती वो बहुत अच्छा है मुझसे बहुत प्यार करता है वो कभी मुझे खोना नहीं चाहता। मेरे चले जाने पर पता नहीं उसका क्या होगा। इसलिए मैं ऋषि को नहीं छोड़ सकती। मुझे पता है अगर मैं उसके साथ रहूंगी तो मैं धीरे धीरे तुम्हे भुल जाऊंगी।
i am sorry harsh. मुझे माफ़ कर देना। "

लिखते हुए पंछी भावुक हो गयीं थी लेकिन खुद को संभालते हुए पेपर को समेटने लगती हैं तभी हर्ष नींद से उठ जाता है। पंछी जल्दी से उस पेज को छुपा लेती है जो हर्ष देख लेता है ये उसे बहुत अजीब लगता है लेकिन वो कुछ नहीं कहता है। वो टाइम देखता है । 3:30 हो गए थे।
हर्ष पंछी से कहता है - बहुत लेट हो गए हैं, अब चले।
पंछी ह्म्म्म में जवाब देती हैं। और उठ जाती हैं हर्ष भी उठ कर चलने लगता है कुछ दूर जाने पर पंछी वहीं रखे कचरा पात्र में उस पेपर को जल्दी से छुपके से फेंक देती है। लेकिन पेपर बाहर ही गिर जाता है जिसे हर्ष भी देख लेता है थोड़ी देर में दोनों गार्डन के बाहर पहुँच जाते हैं तभी हर्ष पंछी से कहता है - पंछी, पानी कि बोटल तो अंदर ही रह गयीं है मैं अभी लेकर आता हू , तूम 2 मिनट रुकना।
पंछी-ठीक है, जल्दी आना ।
हर्ष - हां, आता हूं।
हर्ष अंदर जाकर बोतल लेकर आ रहा था तभी उसकी नज़र उस पेपर पर जाती है और वो उसे उठा कर ले लेता है और वापिस पंछी के पास आ कर चलने के लिए कहता है। और दोंनो टैक्सी करके अपने अपने घर चले जाते है।