maa ki gond - 2 in Hindi Biography by Pandit Pradeep Kumar Tripathi books and stories PDF | माँ की गोंद - 2

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माँ की गोंद - 2

माँ ज़िन्दगी का हर हिस्सा है, माँ से सुरू इस सृष्टि का हर किस्सा है।
माँ के बिना तो शृष्टि का निर्माण अधूरा है, माँ से ही ईश्वर का हर ग्यान भी पूरा है।।
"माँ" 'जननी जन्म भुमिस्च' दोस्तों जिंदगी की सुुुरुआत अपने जाननी से सुुुरु होती है, और जन्म भूमि पे खत्म होती है। इसीलिए मैं कहना चाहता हूँ कि हमारे शरीर का रोम रोम माँ बाप का कर्जदार है, और हम माँ बाप की और देश कि जितनी सेेवा करें कम है ।
चलो अब मैं अपने कहानी पर चलते हैं , तो आज मै 21 वर्ष का हु, घर की हालत खराब होने के कारण मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करने लगा जहाँ मुझे 9000 वेतन मिलता है। मेरी कंम्पनी मेरे घर से 870 किलोमीटर दूर है।
आज मेरा एक महीने पूरे हुए इस कंपनी में और मैं इस दौरान बहुत से उतार चढ़ाव भी देखा लेकिन मैं हारा नहीं डटा रहा आज मुझे 9000 वेतन मिला ये मेरी ज़िंदगी की पहली कमाई है । आज मैं बहुत ज्यादा खुश हूं और मैंने माँ को फोन किया और बताया माँ मुझे आज वेतन मिला है मेरी माँ के आंखों में आँसू आ गए होंगे मैं वहां नहीं था मगर मैं अपनी मां के स्वभाव से परिचित हूं फिर उसने खुद को संभाल कर बोली बहुत ही अच्छा है, तुम अपने लिए नए कपड़े लेलो घर में अभी दो दिन पहले ही पापा सब के लिए नए कपड़े लाए हैं।
मेरे लिए दो नई साड़ी लाए हैं, छोटे भाई संदीप और छोटी बहन सुधा के लिए भी दो दो कपड़े लिए हैं।
पापा ने अपने लिए नहीं लिया मैंने तो बोला था बाजार जाते बक्त मेरे लिए एक ही लें एक अपने लिए भी लेलें लेकिन वो मेरे लिए दो लेकर आ गए अपने लिए नहीं लिया। अब मेरी आंखों में आँशु आ गए और मैं रोने लगा और मैंने फोन रख दिया थोड़ी देर रोया और सोच रहा था कि कल ही मैंने छोटी बहन को फोन किया था तो बोल रही थी भईया पापा एक स्कूल ड्रेस मुझे लाए हैं और एक संदीप को लेकिन हमें तो दो चाहिए था। मम्मी के पास भी नहीं है मम्मी को तो पिछले साल बड़ी दीदी की शादी में लाए थे, वही है और पापा भी नहीं लिए पापा बोले हैं भईया पैसे भेजेगा तो फिर सब के लिए एक एक और लाऊँगा भईया आप को पैसे कब मिलेंगें मैं बोला कल मिलेगा तो भेजूंगा तो सब कोई लेलेना मम्मी के लिए भी पापा से कहना उसे ना बताएं नहीं तो बोलेगी मेरे पास है।
तो अब मैं मुँह धो के आया और फिर से फोन किया और बोला मैं अपने लिये कपड़े लेलूँगा कुछ पैसे हैं जो भेज रहा हूँ तो पापा से कहना एक एक कपड़े और लादेंगे माँ बोली यहां तो अभी जरूर नहीं है पैसों की तुम अपने पास रखो तुम्हें जरूरत पड़ेगी वहाँ मैंने बोला माँ मैन अपने लिए रख लिया है। ये ज्यादा है और मैं यहाँ क्या करूँगा इतने पैसों का इसलिए माँ बोली तुम्हें मिलते ही कितने है मैं बोला 12000 मिलते हैं। मैंने अपने लिये तीन हजार रुपये रखे हैं और अगले महीने भी तो मिलेगी और फिर माँ के चरणों में प्रणाम किया और फोन रख दिया।