" पर क्यू भाई। इतनी अच्छी दुकान चल रही है हमारी। एकांश कहता है--->" बात को समझो गुना यहा खतरा है। मैं तुम्हें बाद में बताऊंगा पहले जल्दी निकलो यहां से। गुना एकांश से कहता है--->" तुझे हो क्या गया है यार कैसी बात कर रहा है तू। एकांश इंद्रजीत से कहता है--->" पापा अब घर">

श्रापित एक प्रेम कहानी - 37 CHIRANJIT TEWARY द्वारा Spiritual Stories में हिंदी पीडीएफ

Shrapit ek Prem Kahaani by CHIRANJIT TEWARY in Hindi Novels
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थ...