इस कहानी का मुख्य विषय गाँव के सामाजिक ताने-बाने और उसके भीतर के अंतर्विरोध हैं। श्राद्ध के बाद, रमेश एक समारोह में उपस्थित लोगों से परिचय करवा रहा होता है, तभी एक अधेड़ उम्र की महिला गुस्से में चिल्लाने लगती है। वह विधवा महिला और उसकी बेटी को समाज द्वारा बार-बार तंग करने की शिकायत कर रही है। वह आरोप लगाती है कि गोविंद गांगुली जैसे लोग उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करते, बल्कि उन पर जुर्माना लगाते हैं। रमेश इस विवाद में घबरा जाता है और गोविंद गांगुली स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश करता है। वह बताता है कि महिला की बेटी का सामाजिक जुर्माना हो चुका है, लेकिन वह यज्ञ में लकड़ी देने का हक नहीं रखता। इस बीच, महिला अपनी बेटी की चिंता न करने की बात करती है और रमेश की छोटी मौसी पर आरोप लगाती है कि वह बड़े घर की होने के कारण छुपकर अपनी गलतियों को छिपा रही है। इस संवाद के माध्यम से कहानी गाँव के सामाजिक अन्याय और भेदभाव को उजागर करती है, जहाँ कुछ लोग अपनी स्थिति के बल पर दूसरों को दबाते हैं। देहाती समाज - 4 by Sarat Chandra Chattopadhyay in Hindi Fiction Stories 10 2.7k Downloads 10.2k Views Writen by Sarat Chandra Chattopadhyay Category Fiction Stories Read Full Story Download on Mobile Description श्राद्ध खत्म हो चुका है। रमेश आमंत्रित लोगों से परिचय कर रहा है। भीतर दावत के लिए पत्तल आदि बिछाई जा रही हैं। तभी भीतर सहसा कुछ शोर मचने लगा, जिसे सुन कर रमेश घबरा कर अंदर गया। उसके साथ बहुत-से लोग अंदर आ गए। पराण हालदार के साथ झगड़ा हुआ था। एक अधेड़ उम्र की स्त्री गुस्से से आँखें लाल-पीली कर, डट कर गालियाँ सुना रही है। और चौके के दरवाजे के पास एक विधवा स्त्री, जिसकी उम्र पच्चीस-छब्बीस वर्ष की है सिकुड़ी-सहमी-सी खड़ी थी। जैसे ही रमेश अंदर पहुँचा, उसे देखते ही वह अधेड़ स्त्री और भी तेज हो चिल्लाने लगी - 'तुम्हीं बताओ! तुम भी तो गाँव के एक जमींदार हो! क्या ब्राह्मणी क्षांती की इस गरीब कन्या का ही सारा दोष है? कोई हमारा है नहीं। तभी मन चाहे जितनी बार हमारे ऊपर जुर्माना कर, उसे वसूल भी कर लो और फिर समाज से खारिज-के-खारिज ही! इन्हीं गोविंद ने, वृक्षारोपण के समय दस रुपया जुर्माना लगा कर, स्कूल के नाम से लिया था और शीतल पूजा के नाम पर भी उन्होंने ही दो जोड़ी खस्सियों की कीमत भी रखवा ली थी। पूछो न इन्हीं से - सच कहती हूँ कि नहीं! फिर बार-बार एक ही बात पर क्यों तंग किया जाता है हम सबको?' Novels देहाती समाज बाबू वेणी घोषाल ने मुखर्जी बाबू के घर में पैर रखा ही था कि उन्हें एक स्त्री दीख पड़ी, पूजा में निमग्न। उसकी आयु थी, यही आधी के करीब। वेणी बाबू ने उन्ह... More Likes This न देखा, न सुना - 1 by Brijmohan sharma दूध का क़र्ज़ - 1 by S Sinha खेल खेल में - जादूई - भाग 1 by Kaushik Dave ऑगस्तो पिनोशे उगार्ते - एक तानाशाह की सत्य कथा - भाग 1 by MaNoJ sAnToKi MaNaS मत्स्य कन्या - 9 by Pooja Singh अतीत का साया - 1 by Kishanlal Sharma Rebirth of my Innocent Wife - 1 by Rani prajapati More Interesting Options Hindi Short Stories Hindi Spiritual Stories Hindi Fiction Stories Hindi Motivational Stories Hindi Classic Stories Hindi Children Stories Hindi Comedy stories Hindi Magazine Hindi Poems Hindi Travel stories Hindi Women Focused Hindi Drama Hindi Love Stories Hindi Detective stories Hindi Moral Stories Hindi Adventure Stories Hindi Human Science Hindi Philosophy Hindi Health Hindi Biography Hindi Cooking Recipe Hindi Letter Hindi Horror Stories Hindi Film Reviews Hindi Mythological Stories Hindi Book Reviews Hindi Thriller Hindi Science-Fiction Hindi Business Hindi Sports Hindi Animals Hindi Astrology Hindi Science Hindi Anything Hindi Crime Stories