बिहार की राजधानी पटना से लगभग सत्तर किलोमीटर दूर, भोजपुर और बक्सर की सीमाओं के बीच बसा एक छोटा और उपेक्षित सा गांव है—अकबरपुर। यह वो गांव था जहां की जमीन पर साल के अधिकांश महीनों में धूल उड़ती रहती थी और गर्मियों के दिनों में लू के थपेड़े हवा में चीखते हुए से महसूस होते थे। इस गांव के रास्ते तंग और कच्चे थे, जिन पर बैलगाड़ियों के पहियों के गहरे निशान सदियों की बेबसी की कहानी बयां करते थे। गांव के बीचों-बीच एक पुराना, विशालकाय नीम का पेड़ हुआ करता था, जिसकी घनी छांव के नीचे गांव के बुजुर्ग हुक्का गुड़गुड़ाते हुए मौसम, फसल और राजनीति पर पंचायत किया करते थे।
आई पी एस ओजस्विनी - 1
बिहार की राजधानी पटना से लगभग सत्तर किलोमीटर दूर, भोजपुर और बक्सर की सीमाओं के बीच बसा एक छोटा उपेक्षित सा गांव है—अकबरपुर। यह वो गांव था जहां की जमीन पर साल के अधिकांश महीनों में धूल उड़ती रहती थी और गर्मियों के दिनों में लू के थपेड़े हवा में चीखते हुए से महसूस होते थे। इस गांव के रास्ते तंग और कच्चे थे, जिन पर बैलगाड़ियों के पहियों के गहरे निशान सदियों की बेबसी की कहानी बयां करते थे। गांव के बीचों-बीच एक पुराना, विशालकाय नीम का पेड़ हुआ करता था, जिसकी घनी छांव के नीचे गांव के ...Read More
आई पी एस ओजस्विनी - 2
भाग 2:बिहार के बक्सर और भोजपुर की उस बंजर और तपती धूप वाली जमीन पर, जहाँ कभी ढोंगी बाबा ने अपने पाखंड की पहली ईंट रखी थी, आज हवा का रुख पूरी तरह बदल चुका था। पंद्रह साल पहले जो अकबरपुर गांव एक साधारण और गरीब बस्ती हुआ करता था, आज वह किसी वीवीआईपी छावनी में तब्दील हो चुका था। सड़कों पर लाल-नीली बत्तियां चमचमा रही थीं, पुलिस के भारी वाहन हर नुक्कड़ पर तैनात थे और खाकी वर्दी में मुस्तैद सिपाही हर आने-जाने वाले पर अपनी पैनी निगाह रखे हुए थे।लेकिन इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच, एक ...Read More
आई पी एस ओजस्विनी - 3
संगमरमर से बने उस विशाल और भव्य दरबार में जब ओजस्विनी ओझा के बूटों की आवाज गूंजी, तो वहां हर शख्स की सांसें थम सी गईं. बडे- बडे राजनेता, खाकी वर्दी में खडे चापलूस पुलिस अधिकारी और बाबा सर्वानंद के तलवे चाटने वाले अमीर व्यापारी—सबकी नजरें उस युवा और तेजतर्रार महिला आईपीएस अधिकारी पर टिक गईं.बाबा सर्वानंद अपने सोने के पानी से रंगे सिंहासन पर बैठे- बैठे मुस्कुराने की कोशिश कर रहा था. उसकी वह मुस्कान मक्कारी और अहंकार से भरी हुई थी. उसने अपनी जिंदगी में ऐसे सैंकडों अधिकारी देखे थे जो पहले अकडकर आते थे, लेकिन उसके ...Read More