तिलस्मीभाग प्रथमलेखक — चाँदनी चौधरीविरानपुर के राजकुमार उदय सिंह और बीसरपुर के राजकुमार अमर सिंह परम मित्र थे। दोनों के विचार ऊँचे और जीवन आदर्शों से परिपूर्ण थे। उनका बचपन साथ ही बीता था और दोनों ने एक साथ गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त की थी। दोनों हमउम्र थे तथा हृष्ट-पुष्ट, वीर और साहसी राजकुमार थे।उदय सिंह के पिता महाराज करत सिंह और अमर सिंह के पिता महाराज शमर सिंह भी बचपन से ही परम मित्र थे। समय के साथ उनकी मित्रता और विश्वास और भी गहरा होता गया और वही मित्रता उनके पुत्रों के बीच भी बनी रही।
तिलस्मी - भाग 1
तिलस्मीभाग प्रथमलेखक — चाँदनी चौधरीविरानपुर के राजकुमार उदय सिंह और बीसरपुर के राजकुमार अमर सिंह परम मित्र थे। दोनों विचार ऊँचे और जीवन आदर्शों से परिपूर्ण थे। उनका बचपन साथ ही बीता था और दोनों ने एक साथ गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त की थी। दोनों हमउम्र थे तथा हृष्ट-पुष्ट, वीर और साहसी राजकुमार थे।उदय सिंह के पिता महाराज करत सिंह और अमर सिंह के पिता महाराज शमर सिंह भी बचपन से ही परम मित्र थे। समय के साथ उनकी मित्रता और विश्वास और भी गहरा होता गया और वही मित्रता उनके पुत्रों के बीच भी बनी रही।दोनों राजकुमार अपने-अपने ...Read More
तिलस्मी - भाग 2
तिलस्मीभाग द्वितीयरात के अँधेरे में आकाश पर तारे टिमटिमा रहे थे। उदय सिंह अमर सिंह को पुकारता हुआ तिलस्मी के भीतर उसकी तलाश में आगे बढ़ रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अमर सिंह आखिर कहाँ चला गया।वह महल के उन हिस्सों की ओर बढ़ता गया, जहाँ वे दोनों आज तक कभी नहीं गए थे। आगे बढ़ते-बढ़ते उसे तिलस्मी महल के भीतर जाने का एक अनजाना रास्ता दिखाई दिया।उदय सिंह सावधानी से उस रास्ते पर आगे बढ़ा। कुछ दूर जाने पर उसकी नजर एक रहस्यमयी दरवाजे पर पड़ी। दरवाजे पर दो हंसों की सुंदर प्रतिमाएँ बनी ...Read More