प्रिया पाठको,, यह एक सामाजिक कहानी है । जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है । अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ?? ....... ........ .......... .......... .......... आकाश ...अब चलो भी और कितना टाइम लगाओगे तैयार होने में , कहते हुए मीरा आकाश के कमरे में प्रवेश करती है। बस तैयार हो ही रहा हूं भाभी,, और मैंनै कितनी बार कहा है भाभी की मेरे कमरे में दरवाजा नौक करके आया करो। अच्छा बेटा अब तुम्हारे कमरे में नौक
सजा.....बिना कसूर की - 1
प्रिया पाठको,,यह एक सामाजिक कहानी है ।जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की ।अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ....... ........ .......... .......... ..........आकाश ...अब चलो भी और कितना टाइम लगाओगे तैयार होने में , कहते हुए मीरा आकाश के कमरे में प्रवेश करती है।बस तैयार हो ही रहा हूं भाभी,, और मैंनै कितनी बार कहा है भाभी की मेरे कमरे में दरवाजा नौक करके आया करो।अच्छा बेटा अब तुम्हारे कमरे में नौक करके आऊं भूल गए जब ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 2
भूमि के पिता (सरला ) भूमि की मां की ओर देखते हैं और कहते हैं--क्या हुआ सरला ?क्या भूमि रिश्ते से खुश नहीं हैं !!नहीं ऐसी बात नहीं है जी वो बस... अतीत के साए उसका पीछा नहीं छोड़ते ।तो समझाओ उसे कब तक यु अतीत के अंधेरे गलीयरों में घूमती रहेगी।ऐसी बात नहीं है जी वो भी इन सबसे बाहर निकलना चाहती है एक सुकून की जिंदगी चाहती है पर ..सच्चाई को झूठलाया तो नहीं जा सकता ना।वो भी कदम बढ़ाकर आगे रोशनी में आना चाहती है पर डरती है कहीं अतीत के साए उसे फिर से अंधेरी ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 3
भूमि सब कुछ इतना आसान नहीं होता बेटा।हमारा समाज आज भी इतना विकसित नहीं है जो घटनाओं को सुनकर से समझ लें। उन्हें तो बस बाल की खाल निकालनी आती है।वही डर तो मुझे भी सता रहा है पापा जी अगर कल को उन्हें सच्चाई पता चली तो फिर क्या होगा??भूमि, ऐसा कुछ नहीं होगा बेटा अब तुम मान भी जाओ ।भूमि अपने पापा के तर्क के आगे निरुत्तर थी। वह चुपचाप बस कमरे से बाहर निकल गई।सरला भी रसोई में जाकर काम में व्यस्त हो गई और पापाजी भी मेहमानों के स्वागत की तैयारी में व्यस्त हो गए।थोड़ी ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 4
वैसे तो आपको देखने से ही और आपकी बातचीत से बहुत-कुछ समझ आता है आपके बारे में फिर भी कुछ बताइए ताकि हम बातचीत शुरू कर सके।भूमि एक सुलझी हुई और स्पष्ट वादी लड़की थी।उसने कुछ बातें अपनी पसंद ना पसंद के बारे में बतायी। कुछ बातें करियर को लेकर हुई।फिर आकाश ने प्रश्न किया क्या आप शादी के बाद भी अपनी जॉब कंटिन्यू करना चाहोगी ?भूमि बोली हां चाहती तो हुं पर--सबकी सहमति से।भूमि की यह बात आकाश के मन को छू गई।फिर आकाश बोला --आप कुछ परेशान लगती हो?क्या आप इस रिश्ते से खुश नहीं हो।भूमि नेकहां--नहीं ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 5
दूसरे दिन ..आज भुमि ऑफिस से थोड़ा जल्दी घर आ गई थी ।4:00 बजे का समय था भूमि अपने पापा के साथ चाय पी रही थी ।तभी आकाश की मम्मी का कॉल आता है।सरला कॉल रिसीव करती है और अभिवादन करती है दूसरी ओर से आकाश की मम्मी भी प्रणाम करती है और कहती है --बधाई हो बहनजी अगले महीने की 25 तारीख शादी का शुभ मुहूर्त निकाला है ।सरला अचानक से बोली-- इतनी जल्दी !!क्यों कोई परेशानी है क्या आकाश की मम्मी बोली।नहीं ऐसी कोई बात नहीं है बहन जी ,दरअसल इतनी जल्दी शादी की तैयारी कैसे कर ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 6
तभी भूमि आते हुए दिखाई देती है।आकाश ऐसे खुश होता है मानो कोई खजाना मिल गया हो।भूमि नेचारों ओर फैला कर देखा, उसे कॉर्नर की टेबल पर बैठा हुआ आकाश दिखाई दिया।आकाश ने भी भूमि को देख लिया था उसने हाथ उठा कर अपनी उपस्थिति जाहिर की।भूमि टेबल की और चल पड़ी जाते ही आकाश से बोली गुड इवनिंग !!आकाश मैं भी गुड इवनिंग कहा और खड़े होकर भूमि के लिए कुर्सी खींची और भुमि को बैठाया फिर खुद भी अपनी कुर्सी पर बैठगया।कुर्सी पर बैठते ही बोला-बहुत खूबसूरत लग रही हो !भूमि बोली --मैं इतनी सुंदर भी नहीं ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 7
भूमि के घर पहुंचते ही..सरला ने पश्नों की झड़ी लगा दी।भूमि बोली --चील करो मां !!सब ठीक-ठाक था ।मुलाकात अच्छी रही हमने बहुत अच्छे से दूसरे से बात की। इस बातचीत से और समझ में आ गया कि आकाश बहुत अच्छा और साफ़ दिल लड़का है मां !सरला बेफिक्री की सांस लेते हुए बोली --और क्या चाहिए बेटा एक ऐसा जीवन-साथी जो हमें और हमारी बात को समझ सकें तो हर औरत का जीवन सफल हो जाएं।भूमि बोली --हां मां आप सही कहते हो। और आकाश जैसा लाइफ पार्टनर मिला इसके लिए मैं बहुत खुश हूं मां।सरला बोली --यह ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 8
और अब ... विदाई की घड़ीयह वो समां होता है जिसमें खुशी भी होती है और दुख भी।हर आंख हो जाती है जब बेटी विदा होती है।ये वह पल है जिसे मैं अपने शब्दों में बयां नहीं कर सकती ना इसे समझ सकती हूं और ना ही समझा सकती हूं ।ये तो वही समझ सकता है या समझा सकता हैजिसने अपनी बेटी विदा की है।जिसने पाल पोस कर अपनी बेटी को बड़ा किया और अपने दिल के टुकड़े को किसी और को सौंप दिया हो।आज भूमि के माता-पिता की भी वही दसा थी।बेटी को विदा करने की खुशी और ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 9
....आकाश की फोन की घंटी बजती है पर आकाश ध्यान नहीं देता। वह अपने सुनहरे पलों को यु बर्बाद करना चाहता था।पर .. मोबाइल की रिंग भी बहुत जिद्दी थी लगातार बजे जा रही थी । आकाश के रोमांस में दखल पड़ रहा था और भूमि को भी अच्छा नहीं लग रहा था।आखिरकार भूमि बोली--देख लीजिए शायद किसी को जरूरी काम हो !आकाश थोड़ा झुंझलाते हुए बोला-अरे यार यह कौन है जिसको समझ नहीं आता कि आज मेरी गोल्डन नाइट है।भाभी ने तो 'do not disturb 'की key chain भी लगा रखी थी दरवाजे पर ;;मैं हीं बेवकूफ ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 10
यह 13 साल पहले वाली भूमि नहीं थी।13 साल पहले वह मासूम थी किसी हैवान से लडने की ताकत थी उसमें पर अब...अब वह एक सशक्त नारी है कोमल थी पर कमजोर नहीं थी।आकाश को यु अपनी और झपटते देख वह डरी नहीं उसने अपनी पूरी ताकत से आकाश को जोर से धक्का देने की कोशिश की इसी झूमा झटकी में भूमि के हाथ की कुछ चूड़ियां टूट कर बिखर गई कुछ उसके हाथों में चुभ गई कुछ आकाश के हाथों में चुभ गई ।चुभीहुई चूड़ियों के कारण दोनों के हाथों से खून निकलने लगा और कुछ बेडशीट पर ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 11
और जैसे ही दरवाजा खुलता है...सब लोग अंदर प्रवेश कर जाते हैं और अंदर जो नजारा था उसे देखकर लोग हैरान हो जाते है।बेडशीट पर लगा खून ! बेड पर बिखरी टूटी चूड़ियां !बिखरा कमरा !लड़खड़ाता आकाश और डर से कांपती हुई भूमि !सभी की आंखों में आश्चर्य था और जुंबा पे सवाल --क्या हुआ होगा और क्यों ???आकाश की मम्मी और भाभी दौड़कर आकाश के पास पहुंचते हैं और कहते हैं -क्या हुआ आकाश?यह क्या हाल बना रखा है अपना !!बताओ क्या हुआ है??आकाश अपनी मम्मी से लिपट जाता है उसकी आंखें नम हो जाती है।भर-भरी सी आवाज़ ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 12
या अपने ही घर में बचपन से यौवन की दहलीज में कदम रखना कसूर था मेरा ??भूमि की आंखों आंसुओं की धारा और जुबान से शब्दों की धारा बह निकली थी।शायद बरसों का गुबार था जो आज फूट पड़ा था।मैं तो नादां थी पापा पर आप तो बड़े थे?मैं असहनीय पीड़ा को सहती रही और आप उस दुष्ट को सजा भी ना दे पाए क्यों??इसलिए कि वो तुम्हारा भाई था .!!पर मैं भी तो आपकी बेटी थी ना पापा ..!छोटी-सी मासुम सी..तुम उस दुराचारी को सजा भी नहीं दिला पाए क्यूंकि रिश्तो की बेड़ियों से तुम्हारे हाथ पैर बंध ...Read More
सजा.....बिना कसूर की - 13
बहन जी मुझे क्या एतराज है पर आपको यह सब पहले बता देना चाहिए था ??और फिर भूमि को करने का निर्णय तो आकाश का है इसमें हम क्या कर सकते हैं ??सरल बोली --मै आपकी बात समझती हूं बहन जी पर आकाश तो नदान है उसे कहां समझ आएगा यह सब उसे समझाना तो हम बड़ों का ही काम है।आकाश की मम्मी बोली --सुनिए बहन जी आकाश नादां जरूर है पर इतना भी नहीं और उसकी जीवन संगिनी चुनने का अधिकार उसका स्वयं का है क्योंकि पूरा जीवन उन्हें ही एक दूसरे के साथ निभाना है।हमारा क्या हम ...Read More