सीप का मोती.

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कई सालों से मैं एक सपना देख रहा हूं, जहां सामने नीला पानी और किनारे पर फैली सुनहरी रेत... फिर एक पांव दिखता था सपने में ,जो हमेशा आधा पानी में होता और आधा किनारे पर । उस पांव की वह गोरी गुलाबी सी एड़ी... और उस एड़ी में एक नाज़ुक सी चांदी की पायल, जो उन लहरों पर तैरती हुई सी दिखती। फिर अचानक पानी की एक लहर आती, पांव को भिगोती हुई ऊपर चढ़ती, और जैसे ही वो लहर पीछे हटती तो सूरज की पहली किरण की तरह वह एड़ी निखर उठती, और वह लहर उन गोरे तलवों के नीचे से रेत खींच ले जाती।

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सीप का मोती - 1

भाग १कई सालों से मैं एक सपना देख रहा हूं, जहां सामने नीला पानी और किनारे पर फैली सुनहरी फिर एक पांव दिखता था सपने में ,जो हमेशा आधा पानी में होता और आधा किनारे पर । उस पांव की वह गोरी गुलाबी सी एड़ी... और उस एड़ी में एक नाज़ुक सी चांदी की पायल, जो उन लहरों पर तैरती हुई सी दिखती। फिर अचानक पानी की एक लहर आती, पांव को भिगोती हुई ऊपर चढ़ती, और जैसे ही वो लहर पीछे हटती तो सूरज की पहली किरण की तरह वह एड़ी निखर उठती, और वह लहर उन गोरे ...Read More

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सीप का मोती - 2

भाग २सुनी को दोस्ती करने की आदत ही थी। वह जगत मित्र थी। उसकी बहुत सी सहेलियां थीं, और उन सब के बीच ऐसे रहती थी जैसे वह सबकी लीडर हो। सारी सहेलियां सुनी के पीछे -पीछे घूमा करती थीं। ये वो दौर था जब किसी लड़की का कोई दोस्त हो यह अपवाद ही होता था , और मैं सुनी के जीवन का वो अपवाद था। वह मेरे साथ उतनी ही फ्री रहती थी जितनी अपनी सहलियों के साथ रहती थी। इसका कारण जो मुझे लगता था वह... मैं उसकी हर बात मानता था। अपना दिमाग खुद के लिए ...Read More