शुरुआत दिल्ली के बाहरी इलाके में बनी नई हाईराइज़ सोसायटी ब्लैकवुड रेजीडेंसी दिन में जितनी चमकती थी, रात में उतनी ही डरावनी लगती थी। ऊँची इमारतें, लंबे सुनसान कॉरिडोर, सीसीटीवी कैमरों की लाल बत्तियाँ और आधी रात के बाद ऐसा सन्नाटा कि अपनी साँसें भी तेज सुनाई दें। उसी सोसायटी के टॉवर-सी की तेरहवीं मंज़िल पर रहता था 22 साल का आयुष। कॉलेज खत्म हो चुका था, नौकरी की तलाश चल रही थी, और ज़िंदगी का ज़्यादातर समय फोन, गेमिंग, रील्स और देर रात जागने में निकलता था। उस रात भी वह सो नहीं रहा था। कमरे की लाइट बंद थी, सिर्फ लैपटॉप की नीली रोशनी और फोन की स्क्रीन चमक रही थी। समय था 2:13 AM। बाहर हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी। खिड़की पर गिरती बूंदों की आवाज़ कमरे के अंदर अजीब बेचैनी फैला रही थी।
अंधेर रात - भाग 1
Part 1 — शुरुआतदिल्ली के बाहरी इलाके में बनी नई हाईराइज़ सोसायटी ब्लैकवुड रेजीडेंसी दिन में जितनी चमकती थी, में उतनी ही डरावनी लगती थी। ऊँची इमारतें, लंबे सुनसान कॉरिडोर, सीसीटीवी कैमरों की लाल बत्तियाँ और आधी रात के बाद ऐसा सन्नाटा कि अपनी साँसें भी तेज सुनाई दें। उसी सोसायटी के टॉवर-सी की तेरहवीं मंज़िल पर रहता था 22 साल का आयुष। कॉलेज खत्म हो चुका था, नौकरी की तलाश चल रही थी, और ज़िंदगी का ज़्यादातर समय फोन, गेमिंग, रील्स और देर रात जागने में निकलता था।उस रात भी वह सो नहीं रहा था। कमरे की लाइट ...Read More
अंधेर रात - भाग 2
शीर्षक: अंधेर रातPart 2 — दरवाज़े के उस पारकाँच के दरवाज़े पर बनी वह भीगी हथेली कुछ सेकंड तक रही। आयुष की साँसें इतनी तेज चल रही थीं कि उसे खुद अपनी धड़कनें सुनाई दे रही थीं। कमरे में अंधेरा था, सिर्फ फोन की फ्लैशलाइट काँपते हाथों में हिल रही थी। बाहर बारिश और तेज हो चुकी थी।हथेली धीरे-धीरे काँच से हट गई। उसके हटते ही पानी की लकीरों के बीच वही नाम चमक उठा—AYUSHआयुष दो कदम पीछे हट गया। उसके पैरों से टेबल टकराई और कुर्सी गिर पड़ी। आवाज़ पूरे कमरे में गूँज गई। वह कुछ सेकंड वहीं ...Read More
अंधेर रात - भाग 3
Part 3 — पीछे कौन थाछप… छप… छप…कमरे के अंदर गीले पैरों की आवाज़ साफ सुनाई दे रही थी। का शरीर जैसे पत्थर बन गया। वह मुड़ना चाहता था, लेकिन डर ने उसकी गर्दन जकड़ ली थी। साँस गले में अटक रही थी। कमरे की हवा अचानक बर्फ जैसी ठंडी हो गई।फोन फर्श पर पड़ा था, उसकी स्क्रीन अब भी जल रही थी। वीडियो चल रहा था… और उसमें कॉरिडोर की लड़की गायब हो चुकी थी। कैमरा अब खाली गलियारा दिखा रहा था।लेकिन असली डर कमरे के अंदर था।आयुष ने हिम्मत करके धीरे-धीरे गर्दन घुमाई।पीछे कोई नहीं था।कमरा खाली ...Read More
अंधेर रात - भाग 4
मुख्य दरवाज़ा खुला था।कॉरिडोर की सफेद लाइट्स झिलमिला रही थीं… और उसी रोशनी में आयुष ने उसे देखा—वो खुद की ऊँचाई, वही चेहरा, वही कपड़े… यहाँ तक कि हाथ में वही टूटा हुआ फोन।लेकिन फर्क सिर्फ एक था—उसकी मुस्कान।वो मुस्कान इंसानी नहीं थी… जैसे कोई और उसके चेहरे के अंदर छुपा बैठा हो।आयुष के मुँह से आवाज़ तक नहीं निकली।“ये… ये कैसे…”दरवाज़े के बाहर खड़ा “दूसरा आयुष” धीरे-धीरे अंदर आया। उसके कदमों की आवाज़ नहीं थी, लेकिन फर्श पर पानी के निशान बनते जा रहे थे।पीछे खड़ी नंदिनी ने फुसफुसाया—“यही है…”आयुष ने उसकी तरफ देखा— “कौन है ये?”नंदिनी की ...Read More