ममता ...एक अनुभूति...

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केशव किसी तरह धक्कामुक्की से निकलते हुए सप्त क्रांति ट्रेन में चढ़ पाया। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन लोगों से खचाखच भरा हुआ था— किसी की आँखों में बिछड़ने का दर्द था, तो किसी के चेहरे पर मिलने की खुशी। शोर-गुल, पुकारते कुली, रोते बच्चे और विदाई के आँसू... सब कुछ मिलकर एक अजीब-सी हलचल पैदा कर रहे थे। बस हर कोई अपने-अपने सफ़र में डूबा है। वो मन ही मन बुदबुदाया— "ना मंजिल का पता...ना है कोई ठिकाना मुसाफ़िर हूँ यारो… काम है तो बस चलते जाना।"

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ममता ...एक अनुभूति... - 1

केशव किसी तरह धक्कामुक्की से निकलते हुए सप्त क्रांति ट्रेन में चढ़ पाया।पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन लोगों से खचाखच हुआ था—किसी की आँखों में बिछड़ने का दर्द था, तो किसी के चेहरे पर मिलने की खुशी।शोर-गुल, पुकारते कुली, रोते बच्चे और विदाई के आँसू... सब कुछ मिलकर एक अजीब-सी हलचल पैदा कर रहे थे।बस हर कोई अपने-अपने सफ़र में डूबा है।वो मन ही मन बुदबुदाया—"ना मंजिल का पता...ना है कोई ठिकानामुसाफ़िर हूँ यारो… काम है तो बस चलते जाना।"अपने डिब्बे में पहुँचकर केशव ने हाथ में टिकट देखा और फिर नजरें सीट नंबर पर टिकाईं।उसकी भौंहें तन गईं।सीट पर ...Read More

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ममता ...एक अनुभूति... - 2

जैसे ही वे लोग मुड़ने लगे, तभी बच्चे की हल्की-सी रोने की आवाज़ डिब्बे में गूँज गई।लड़की घबराकर तुरंत को अपने सीने से और कसकर चिपकाने लगी, उसकी साँसें तेज़ हो गईं।एक आदमी आगे बढ़ा।उसकी आँखों में शक चमक रहा था।उसने लाठी उठाई और लड़की के चेहरे पर ढका कपड़ा हटाने के लिए हाथ बढ़ाया।लेकिन इससे पहले कि उसका हाथ उसके चेहरे तक पहुँचता—केशव ने झट से डंडा पकड़ लिया।उसकी आँखों में गुस्से की ज्वाला थी।“तेरी हिम्मत कैसे हुई? ये मेरी मेहरारू है… दिखता नहीं, बच्चे को दूध पिला रही है?”डिब्बे में सन्नाटा छा गया।वो आदमी एक पल को ...Read More