सपनों की डोली।

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बड़ी मशक्कत के बाद एक अच्छा रिश्ता हाथ लगा था , नारायणी के पिता इसे हाथ से जाने देना नहीं चाहते थे। इस लिए मुंह मांगा दान दक्षिणा देकर, विवाह की सारी रस्में अदा की गईं। नारायणी और नारायण दोनों ही विवाह उपरांत हाथ जोड़ कर सभी बड़ों से आशीर्वाद ले रहे थे और बैकग्राउंड में बज रहा था। "महलों का राजा मिला कि रानी बेटी राज करेगी" आशीर्वाद लेकर वर और वधु कोहबर में पहुंचे और कोहबर की सारी रस्में हंसी मज़ाक और सालियों की ठिठोलियो के साथ पूरी की गईं।

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सपनों की डोली। - 1

बड़ी मशक्कत के बाद एक अच्छा रिश्ता हाथ लगा था , नारायणी के पिता इसे हाथ से जाने देना चाहते थे।इस लिए मुंह मांगा दान दक्षिणा देकर, विवाह की सारी रस्में अदा की गईं।नारायणी और नारायण दोनों ही विवाह उपरांत हाथ जोड़ कर सभी बड़ों से आशीर्वाद ले रहे थे और बैकग्राउंड में बज रहा था। महलों का राजा मिला कि रानी बेटी राज करेगी आशीर्वाद लेकर वर और वधु कोहबर में पहुंचे और कोहबर की सारी रस्में हंसी मज़ाक और सालियों की ठिठोलियो के साथ पूरी की गईं।रात का इंतजार समाप्त हुआ और भोर की लालिमा से पहले पहले नारायण ...Read More

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सपनों की डोली। - 2

भाग–2खिड़की के उस पार का मन।तीनों बच्चे साथ बड़े हो रहे थे,किन्तु उनका बेटा बांस की तरह धड़ाधड़ लंबा जा रहा था । परिवार के प्रति बढ़ती जिम्मेदारियों और जरूरतों ने दोनों को गांव छोड़कर शहर में बस जाने पर मजबूर कर दिया।रुणिया और झुनिया पांच वर्ष की हो गई थीं और रौनक नारायण और नारायणी का बेटा रौनक आठ वर्ष का हो चुका था।रौनक कक्षा तीन का छात्र था और नारायण ने दोनों बच्चियों का दाखिला भी उसी विद्यालय में करा दिया।समय बीतता गया , तीनों बच्चे बड़े हो रहे थे गर्मी की छुट्टियों में अक्सर बच्चों को ...Read More

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सपनों की डोली। - 3

भाग 3___भींगता_सन्नाटा..।__खैर...आज बच्चों को विद्यालय से लाने जाना था और सड़क-गलियाँ, मैली यमुना में मिले नाले के पानी में लगा रहीं थीं।वर्ष 2011 में पूर्वी दिल्ली का विकास नगर इतना भी विकसित नहीं था जितना कि आज दो-दो मेट्रो स्टेशन बन जाने के कारण हो गया है।ये नारायणी के लिए भी आम बात बन गई,वह रोज बच्चों को लेकर स्कूल जाती और उन्हें लेकर वापस आते समय घुटने भर पानी की तैराक बन जाती।ऐसा सिर्फ नारायणी के साथ ही नहीं था बल्कि हर उस माता-पिता के साथ था जो अपने बच्चों को बरसात के दिनों में स्कूल से लाने ...Read More

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सपनों की डोली। - 4

_जिस दिन वह गया...-एक सुबह के बाद सबकुछ बदल गया।वह अपनी लाचारी पर भावुक हो चुकी थी ,उस रात नगर के बादल ही नहीं नारायणी की आँखें भी बरस रही थीं। टिप टिप टिप...बिजली कड़कने की आवाजें...और यह रात का सन्नाटा उसके शरीर को किसी आंधी में झकझोरे जा रहे वृक्ष के भांति तन से जड़ उखाड़ फेंकने की ताक में थे।जैसे-जैसे दीवारों पर सीलन पसर रही थी वैसे वैसे उसकी आँखें बंद हो गईं, वह गहरी नींद में सो गई।रात भर की किचकिचाहट के बाद सुबह फिर वही बारिश,अगली भोर तो इतवार की थी, इस लिए उसने बच्चों ...Read More