सीमाओं से परे

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“राधा… ज़रा धीरे चल बेटी…”माँ हाँफती हुई पीछे से बोली।“तेरे कदमों में अभी जवानी की रफ्तार है… पर मैं अब 25 की नहीं रही… थोड़ा साथ चल ले।”आज माँ राधा को साथ लेकर बाज़ार आई थी।कुछ ही दिन पहले राधा की कॉलेज की परीक्षाएँ खत्म हुई थीं। अब वह 21 साल की हो चुकी थी और उसकी छुट्टियाँ चल रही थीं।माँ ने सोचा — चलो, आज इसे सब्ज़ी खरीदना भी सिखा देती हूँ।लेकिन माँ को जल्दी ही समझ आ गया कि सब कुछ उल्टा हो रहा है।राधा का ध्यान सब्ज़ियों की तरफ बिल्कुल नहीं था।

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सीमाओं से परे - 1

“राधा… ज़रा धीरे चल बेटी…”माँ हाँफती हुई पीछे से बोली।“तेरे कदमों में अभी जवानी की रफ्तार है… पर मैं 25 की नहीं रही… थोड़ा साथ चल ले।”आज माँ राधा को साथ लेकर बाज़ार आई थी।कुछ ही दिन पहले राधा की कॉलेज की परीक्षाएँ खत्म हुई थीं। अब वह 21 साल की हो चुकी थी और उसकी छुट्टियाँ चल रही थीं।माँ ने सोचा — चलो, आज इसे सब्ज़ी खरीदना भी सिखा देती हूँ।लेकिन माँ को जल्दी ही समझ आ गया कि सब कुछ उल्टा हो रहा है।राधा का ध्यान सब्ज़ियों की तरफ बिल्कुल नहीं था।वह कभी इधर-उधर की दुकानों को ...Read More

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सीमाओं से परे - 2

सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आ रही थी।राधा की नींद सबसे पहले खुली।उसने करवट लेकर सीमा तरफ देखा।सीमा अभी भी सो रही थी — लेकिन उसके चेहरे पर एक अलग सी शांति और हल्की चिंता दोनों साथ दिख रही थीं।राधा धीरे से उठी और खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई।बाहर गली में रोज़ की तरह लोगों की आवाज़ें शुरू हो चुकी थीं।तभी माँ की आवाज़ आई —“राधा… उठ गई क्या? आ जा, चाय बना ली है।”राधा नीचे आ गई।रसोई में माँ चाय डाल रही थीं, और पापा अख़बार पढ़ रहे थे।घर का माहौल आज थोड़ा ...Read More

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सीमाओं से परे - 3

देखते ही देखते सगाई का दिन भी आ गया।घर में चारों तरफ खुशी का माहौल था।सब लोग तैयारियों में हुए थे।सीमा और अशोक भी खुश लग रहे थे,और दोनों परिवारों के चेहरे पर भी संतोष दिखाई दे रहा था।सगाई का कार्यक्रम शहर के एक शादी हॉल में रखा गया था।रिश्तेदार और जान-पहचान वाले लोग भी धीरे-धीरे आने लगे।फिर सगाई की रस्में शुरू हुईं —जैसे वर्षों से हमारे समाज में होती चली आ रही हैं।अंगूठियों का आदान-प्रदान हुआ,सबने तालियाँ बजाईं और दोनों को आशीर्वाद दिया।उस पल सब कुछ बहुत सुंदर और खुशियों से भरा लग रहा था —जैसे एक नई ...Read More