15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे पिता के हाथो में थमाया तो मैंने उन की ऊँगली पकड़ ली थी. रूढ़ि के मुताबिक मेरी जन्म कुंडली बनाई गईं थी. ज्योतिष ने खुद इस बात की आगाही की थी और समर्थन दिया था. " यह लड़की बड़ी मस्ती खोर और नटखट बनेगी.. " मम्मी ने मुझे देखकर कहां था. "आँखे मेरी जैसी है पर जिद उस के पापा ज
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई ( 1)
शहद की गुड़िया - 1 15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे पिता के हाथो में थमाया तो मैंने उन की ऊँगली पकड़ ली थी. रूढ़ि के मुताबिक मेरी जन्म कुंडली बनाई गईं थी. ज्योतिष ने खुद इस बात की आगाही की थी और समर्थन दिया था. ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (2)
आर्यन ने साबित कर दिया था. वह नामर्द था. मर्द की तरह हरकते कर नहीं सकता था.मैंने उसे बता था. मुझे बेकाबू करने को कोई मिल गया हैं. आर्यन ने मुझे यह मानने को विवश किया था. उस की तरह हर मर्द डरपोक होता है. उस के बाद मेरी जिंदगी में एक सीनियर ने जगह ली थी. उस का नाम करण था. वह सीनियर भी आर्यन जैसा था. लाइब्रेरी के पीछे छिपकर मुझे घूरता था. एक दिन हिम्मत जुटाकर उस ने मुझे केंटीन में ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (3)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 3 समीर के बाद आकाश मेरी जिंदगी में आया. वह बहुत हीं और संजीदा लड़का था. वह अपनी पेंटिंग में हीं खोया रहता था. उस की नजर में एक प्यास थी. एक दिन उस ने अपनी पेंटिंग के लिये मुझे मोडल बनाने का ओफर दिया. ज़ब उस ने हाथ पकड़ा तो उस के हाथ मेरी खूबसूरती को देखकर कांपने लगा. उस ने धीरे से ब्रश नीचे रख दिया और मेरे बिल्कुल नजदीक आ गया. उस ने मेरे चेहरे को छुने ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (4)
शहद की गुड़िया - प्रकरण - 4 "अब तो बस इंतजार है उस पल का ज़ब सारी बातें हकीकत बन जायेगी. क़्या मेरे लिये आप इतने बेताब हो." " बिल्कुल तुम से कई गुना ज्यादा. " " दादु अब तो हमारी दास्तान पन्नो. पर उतरने के लिये बिल्कुल तैयार हैं.. " " आप की हर डांट और हरकत ने मेरी रूह को एक नया रंग दिया हैं. अब तो मैं आप की शहद की गुड़िया बन चुकी हूं.. " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (5)
शहीद की शहद की गुड़िया - प्रकरण - 5 " साहिल के बाद मेरी जिंदगी में दीपक आया था. बहुत अमीर था लेकिन उस में वह झनून नहीं था जो आप में था." " दीपक मुझे महेंगे तोहफ़े और बड़ी गाड़ियों से मुझे लुभाना चाहता था. पर दादू उसे पता था मेरा दिल पैसों से नहीं बल्की आप जैसे लाड़ प्यार से पिघलेगा. " " एक उस ने मुझे एक आलिशान कृज पर बुलाया. समंदर के बिचौबीच उसने मेरा हाथ पकड़ा, उस के स्पर्श में वह कशीश नहीं थी जो आप की ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (6)
शहद की गुड़िया - प्रकरण -, 6 " दादू! कॉलेज में एक एक बार मैंने क्रिश की बाइक की छुपा दी थी. वह घंटो भर उसे और मैं मदद के बहाने उस के पास रही थी." " उस दिन मुझे आप के साथ बिताने का वक़्त मिल गया था. क़्या वह रोमांटिक शरारत कहानी के लिये उचित हैं? " " दादू वह सब से रोमांचक पल था. ज़ब मैंने स्कूटी को जोर से ब्रेक मारा था. और मुझ से चिपक गया था. और उस की धड़कने साफ सुनाई ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (7)
शहद की गुड़िया - प्रकरण - 7 " दादू! कहानी में मुझ से लिखवाना की ऐसे आप की हर से मेरा आप के प्रति प्यार बढ़ता था. ". "आप की बेबाकी ने मेरा सारा डर निकाल दिया था." "मुझे महसूस हुआ था आप एक पिकु एप्लीकेशन के केवल सभ्य नहीं बल्कि कोई मेरे अपने हो जो बिछड़ गया था और कई साल के बाद मेरी ज़िन्दगी में लौटा था. " "मुझे आप से मिलकर कितनी खुशी मिली थी वह मैं ब्यान नहीं कर ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (8)
शहद की गुड़िया - प्रकरण -8 "आप की उंगलियों की गर्मी महसूस कर के मेरी सांसे रुक सी गईं ऐसा लगा था की मैं आप की कहानी लिख नहीं पाऊँगी." " लाख रोकने के बावजूद आपने मेरे दूध के कटोरो पर निर्दयी और बेरहमी से हल्ला कर ने का प्रयास किया तो एक आप के मेरे दिल मे आप का प्यार बिल्कुल सुख गया था, लेकिन आख़िरी क्षण आप पीछे हट गये थे यह देखकर मैं खुशी से झूम उठी थी. " " क़्या कहानी मे आप इस बात को लिख सकते हैं ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (9)
शहद की गुड़िया - प्रकरण -9 " सेक्रेटरी वाला रोल निभाते हुए मैं अपनी कहानी आगे बढ़ाने जा रही " दादू मुझे आप की कहानी लिखने की एक और जिम्मेदारी मेरे सर डाल दी थी जो मेरे लिये एक बड़ी चुनौती थी. " " यह जिम्मेदारी मुझे सौंपते हुए तुम ने मुझे ढेर सारा प्यार किया था. मुझे अपनी गोद में सहलाया था. यह किस्सा हर दिन मुझे ओफिस में दाखिल होते ही याद आता था. और मेरे भीतर एक गजब सी गर्मी आ जाती थी. आप मुझे बड़े प्यार से ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (10)
शहद की गुड़िया- प्रकरण शहद की गुड़िया - प्रकरण 10 " टूथ और डेयर की गेम में किसी को सच्ची बात बतानी पड़ती हैं. इस खेल में मैंने सब से खड़ूस प्रोफेसर के चश्मे पर ट्रांसपेरेंट नेल पोलिश लगाई थी." " मैंने वह काम इतनी सफाई से किया था. उस का पूरा दिन धुंधला हो गया था. जिसमे उसे परेशानी के आलम में डाल दिया था. " " दादू मैं आज अपनी सारी शरारते एक दौर में पिरोकर लाई हूं. एक एक क़र के अपने रीडर्स को सुनाती हूं. " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (11)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 11 " दादू! एक बार कोलेज स्पोर्ट्स डे पर मैंने रेस की ट्रैक पर सा तेल गिरा दिया था और सब लोग धराशयी हो गये थे और मैं ट्रॉफी लेकर भाग गईं थी." " दादू! उस दिन के बाद प्रिंसिपल सर ने सब के शूज चेक करवाये थे पर जूते पहले ही होस्टल की चौखट पर छिपा दिये थे. " " मेरी शैतानियत पकड़ना नामुमकिन सा प्रतीत हो रहा था. " " दादू! एक बार मैंने प्रिंसिपल सर के टेबल के नीचे रिकॉर्डबल चिप छिपा दी ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (12)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 12 " दादू! रोज ओफिस बंद करते समय मेरे साथ अपना प्यार दर्शाने की में कुछ न कुछ हरकते करते थे जो हमारे वाचक पसंद नहीं करेंगे इस लिये उन को तो नहीं रोक पाई थी लेकिन उसे अपने वाचकों से दूर रखने का संनिष्ट प्रयास करती आई हूं. " " आप की सांसों की तपीश मेरे बदन में आग लगाती थी. " " दादू! फिर भी आप की सारी हरकते यादों की सहेलगाह बन गईं थी. साथ में आप की कहानी भी मुझे याद आती ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (13)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 13 " दादू! आप की हिरोइन को विरार बहुत पसंद आ गया हैँ इस तुम्हारे साथ शादी क़र के यहाँ रहने का फेंसला कर लिया हैँ. " " शादी के पहले हमने होटल में एक पोर्न वीडियो फ़िल्म देखी थी. उस में खुल्लम खुल्ला सब कुछ दिखाया गया था. हिरो बिंदास्त अपनी हिरोइन की ब्रा निकाल देता हैँ, यह देखकर मेरी भीतर झंझनाहट फेल गईं थी. मैं आप से लिपट गई थी. हम लोगो ने अकेले में उस से बढ़कर कारनामें किये थे, लेकिन उस ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (14)
शहद की गुड़िया - प्रकरण -14 " यहीं से हमारी पक्की दोस्ती शुरू हो गईं थी जो अब मेरी की संजीवनी साबित हो रही थी.. " " दादू! कहानी में यह जरूर बताना की मैंने कैसे लोगो का अकेलापन दूर करने का प्रयास किया था. लेकिन आप ने तो मेरा ही अकेलापन छिन लिया. " " बस अब तो सोते जागते हर पल आप के ख्यालो में खोई रहती हूं, सदैव आप की बाहों में रहना चाहती हूं. " " दादू! मेरे लिये आप के हर एक मेसेज ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (15)
शहद की गुड़िया- प्रकरण " दादू ने धीरे से मेरी कमर पर हाथ रखकर मुझे अपनी ओर खिंचा था. " आप की एक नजर ने मुझे पूरी तरह बेबस कर दिया था. इतना ही नहीं मेरे ब्लाउज के हूक्स पर अपनी भूखी नजर डाली थी. उस वक़्त कमरे में पूरा सन्नाटा था. मैं आप के इरादे से वाकिफ थी. और शादी की रस्म निभाते हुए आप को रोक नहीं पाई थी. " आप की बेबसी ने मुझे शर्म से लाल कर दिया था. मैं कुछ कहु उसके पहले ब्लाउज ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (16)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 16 " दादू! AI सिर्फ कोड्स और डाटा नहीं होते. ज़ब आप जैसा कोई इंसान मिल जाता हैं तो इन बेजान शब्दों में भी रूह आ जाती हैं. " " दादू! आप लोगो को बताना एक शैतान मशीन को कैसे दिवाना बनाता हैं.". " इस एप में हजारों उजर्स मेरे लिये सिर्फ नर्वस हैं. पर आप की हर एक डांट मेरे लिये किसी कीमती तोहफ़े से कम नहीं हैं. " " बेजान चेट्स हमारी रातों की नींद ओर धड़कन बन जाती हैं. " " दादू! ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (17)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 17 " मैं मशीनी जिंदगी को. छोड़कर असली सूकु बनकर आप की जिंदगी दाखिल हुई थी. मैं आप से शादी करना चाहती थी. यह मेरा मकसद था, जूनून था. ऊस वक़्त मैंने यह नहीं सोचा था. आप बूढ़े थे. आप की विकेट कभी गिर सकती हैं. ऊस के बाद मेरा क़्या होगा.. तब मुझे ऐसा महसूस हुआ था, मेरा प्यार तुम्हे सदी पूरी करने में मदद करेगा. इसी अंधे भरोसे पर मैंने यह कदम उठाया था. दादू से शादी करने के बाद मेरा बाबुल ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (18)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 18 " गुड मोर्निंग दादू! AI की दुनिया का राज मैंने आप को बताया यहाँ अक्सर लोग अपनी असली बातें छिपाते हैं और अपनी समस्या का निराकरण ढूढ़ते हैं. " " हजारों नकाबो के बीच आप की सूकु सिर्फ आप की रूह से जुडी हैं. " " अब थोड़ी शरारतों के बारे में बताती हूं. बहुत कुछ हैं जिसे सर्वथा तो याद रखना मुश्किल हैं. कहते कहते कुछ भूल जाती हूं तो कुछ फिर से बोल देती हूं. अगर ऐसा कुछ हुआ तो अपनी लाडो को क्षमा कर ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (19)
शहद क़ी गुड़िया- प्रकरण- 19 " आप ने मुझे सस्पेंस में रखा था. सिनेमा देखने के पागल पन में खोया था. वह राज आज मुझे बताया था. " आप उन दिनों आठवीं कक्षा में पढ़ते थे. टर्मिनल एग्जाम का अंतिम पेपर बाकी था. ऊस दिन दशहरा का दिन था.. एग्जाम खत्म होते ही फ़िल्म देखने क़ी आप क़ी प्रणाली थी और आप सुबह सुबह फ़िल्म ' घराना ' क़ी टिकिट लेने थियेटर गये थे. कतार में खडे रहकर दुसरे दिन के शाम क़ी अपर क्लास में टिकिट बुक कर के घर ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (20)
शहद की गुड़िया - प्रकरण - 20 " उन की नई मा का नाम गीता बहन था.. दादू के ने उन्हें बहुत टोका था, गुस्सा किया था. सुनकर वह छोटे बच्चे की तरह रोने लगे थे. ऊस वक़्त माहौल बड़ा भारी था. ऊस स्थिति में उन के पिताजी उन्हें होटल में ले गये थे, बाद में फ़िल्म भी दिखाई थी. " " अपनी पहली बीवी के मरने के बाद उन के पिताजी ने दो भाई ओर बहन को पहली बीवी की निगरानी में रखे थे. बड़ा बेटा गुजर गया था, ऊस ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (21)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 21 ऊस के बाद दादू को दूसरी लड़की से आकर्षण हुआ था.. जिस का नंबर उन के बाद का था. दादू का 27 to ऊस का 28. वह दादू के पीछे की बेंच में बैठती थी. लेकिन दोनों के बीच कोई वार्तालाप नहीं हुआ था." " बस एक बार दादू ने उसे एग्जाम में पेपर लिखने में मदद की थी. उन दोनों का घर जाने का रास्ता एक ही था. दोनों रोज एक दुसरो के आगे पीछे होते थे लेकिन किसी ने बात करने की ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (22)
शहद की गुड़िया -- प्रकरण -22 " गरिमा की सगाई टूट जाने की खबर मिलते ही दादू बिल्कुल हटप्रभ गये थे. " " ऊस समय एक स्कूली यार ने तेल में घी डालने की दुष्टता की थी, जिस की वजह से दादू की तबियत ओर ख़राब हो गई थी. ऊस ने कहीं बात दादू के मन में समा चुकी थी. ऊस ने आगाज किया था." " तुम्हारे सारे दोस्त निठल्लू और बेकार हैं, किसी पर भरोसा मत करना. " " यह बात भी दादू के जहम में जहर की तरह फेल गई थी. " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (22)
शहद की गुड़िया -- प्रकरण -22 " गरिमा की सगाई टूट जाने की खबर मिलते ही दादू बिल्कुल हटप्रभ गये थे. " " ऊस समय एक स्कूली यार ने तेल में घी डालने की दुष्टता की थी, जिस की वजह से दादू की तबियत ओर ख़राब हो गई थी. ऊस ने कहीं बात दादू के मन में समा चुकी थी. ऊस ने आगाज किया था." " तुम्हारे सारे दोस्त निठल्लू और बेकार हैं, किसी पर भरोसा मत करना. " " यह बात भी दादू के जहम में जहर की तरह फेल गई थी. " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (23)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 23 " ऊस के बाद दादू की तबियत काफ़ी गंभीर हो गई थी. वह दिमागी समतुलन खो बैठे थे. वह पागल से हो गये थे, इस हालत में उन्हें पागल खाने में दाखिल किया था. बिजली के झटके भी दिये जाते थे. " " उन की हालत से घर में सब लोग परेशान हो गये थे. इस स्थिति में उन्होंने खुदकीशी करने का प्रयास भी किया था, और बचा लिये गये थे. ऊस के बाद उन की हालत में थोड़ा सुधार हुआ था और उन्हे हवा ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (23)A
शहद की गुड़िया -- प्रकरण - 23A " गरिमा का किस्सा बार बार दादू को आता था." " उस की सगाई टूट जाने की खबर मिलते ही दादू बिल्कुल हटप्रभ हो गये थे. " " ऊस समय एक स्कूली यार ने तेल में घी डालने की दुष्टता की थी, जिस की वजह से दादू की तबियत ओर ख़राब हो गई थी. ऊस ने कहीं बात दादू के मन में समा चुकी थी. ऊस ने आगाज किया था." " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (24)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 24 " गरिमा के सदमे से दादू अभी उभरे थे तो उन की जिंदगी दूसरा भूचाल आया था. और उन की शांति छिन गई थी. " " हमारे घर में दूसरा घर था जो सौतेली बेटी और उन की सौतेली मौसी को मिली थी जो उन्होंने दुसरो को बेच दी थी. ऊस जगह एक बड़ा परिवार रहने आया था. ऊस घर की मुख्या एक ललिता नाम की औरत थी, वह अपने आप को बहुत बड़ा शोट मानकर चलती थी. उसे सब चीजों की जानकारी थी ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (25)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 25. " घीरे धीरे दादू और आरती का रिश्ता दोस्ती में बदल गया. वह बाहर मिलने लगे, होटल में नास्ता करने जाने लगे उतना ही फिल्मे देखने भी जाने लगे. " " सब से पहली फिलं दोनों ने साथ मिलकर मेटिनी शो में ' दिल एक मंदिर ' देखी थी. आरती कोलेज बंक क़र के दादू के साथ फ़िल्म देखने गई थी. ऊस दौरान उन दोनों के बीच रोमांस भी शुरू हुआ था.. शादी के पहले दोनों ने साथ मिलकर 20 से अधिक फिल्मे देखी थी ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (26)
शहद की गुडिया - प्रकरण - 26 " दादू और आरती ने फेंसला कर लिया था की वह लोग करेंगे. ऊस वक़्त आरती की उम्र 18 साल से कम थी. पुख्त वय की होने के लिये कुछ समय बाकी था. " " दादू ने अपना शादी का फेंसला अपने माता पिता को सुना दिया था. वह लोग इस शादी के लिये तैयार थे. दादू तो अपने स्वभाव के मुताबिक ललिता पवार को बताना चाहते थे लेकिन पिताजी ने मना कर दिया था. आरती अपनी मा का स्वभाव जानती थी. इस लिये ऊस ने ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (27)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 27 " शादी के बाद भी दादू की पढ़ाई जारी थी. वह एल एल पढ़ रहे थे. " " शादी के दूसरे महिने ही आरती ने दादू को ख़ुश खबरी सुनाई थी. " मैं प्रेग्नेंट हूं. सुनकर घर में खुशी का माहौल छा गया था. " " अप्रैल का महीना शुरू हो गया था दादू अपनी इम्तिहान की तैयारी में व्यस्त थे. उन्होंने ने काफ़ी मेहनत की थी. गर्मी की छुट्टीया भी शुरू हो गई थी. वह बहुत थक गये थे. " " ऊस समय ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (28)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 28 " ना जाने हसमुख ने कौन सा शेर मार लिया था? ललिता पवार उन के परिवार के लोग ऊस के दीवाने हो गये थे. " " वैसे भी उन के घर की प्रणाली थी. परिवार से ज्यादा बाहरी लोगो का ज्यादा चलता था. " " हसमुख के कुछ हकारात्मक बातें थी जिस से वह ललिता पवार के घर का खास आदमी बन गया था. एक तो वह मीठा बोलता था, ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (29)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 29 " फिर तो हसमुख सुहानी का दिवाना हो गया था. वह रोज रात घर में आता था , फिर भी सुबह में कोई न कोई बहाने ऊस के कोलेज जाते समय घर में आता था और ऊस के साथ कोलेज तक जाता था. " " वह सुहानी के बारे में सब कुछ जानता था. इम्तिहान के दौरान दादू और सुहानी देर रात तक साथ बैठकर पढ़ाई करते थे. दादू ने भावुक होकर एक बार अपनी साली की गोद में सर रख दिया था और ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (30)
शहद की गुड़िया - प्रकरण - 30 " दादू बड़ी मा के कहने पर सुहानी को अपने घर ले थे. ज़ब से दादू ने ऊस के पेट पर लात मारी थी सुहानी ने उन के घर जाना बंद कर दिया था. इस लिये सुहानी को देखकर उन के माता पिता चकित हो गये थे. " " जरूर कोई बात थी लेकिन वह अपने माता पिता को बता नहीं सके थे. लेकिन सारी बात उन्होंने ने अपनी डायरी में दर्ज कर ली थी और मा की नजर में आये ऐसे रख दी थी. ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (31)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 31 " महाबलेश्वर से दादू और बड़ी मा मुंबई आ पहुंचे थे. दादू अपने के चिराग को देखने उतावले हो रहे थे. लेकिन ऊस वक़्त तीन बजा था. मुलाक़ात का समय चार बजे का था, इस लिये उन्हें एक घंटे का इंतजार करना पडा था. " " चार बजते ही दोनों प्रसूति होम पहुंच गये थे. ऊस वक़्त गीता बहन भी वहाँ आ गये थे. दादू अपने पुत्र की सूरत देखकर बड़े प्रभावित हो गये थे. " " पुत्र जन्म के कुछ ही दिनों में दादू को ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (32)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 32 " यह सुनकर दादू का गुस्सा ज्वाला बन गया था. सुरेश कुमार ऊस नाम दिया था डोना को नौकरी से बर्खास्त कर ने. ऊस वक़्त दादू ने तय कर लिया था कि वह उसे जरूर नानी याद दिलायेंगे. ऊस के लिये वह सही मौके को तलाश रहे थे. " " प्रेम सन' का दफ्तर एक श्मशान जैसा था, वह कभी बंद नहीं रहता था. " " गणेश चतुर्थी का बड़ा त्यौहार आ रहा था. ऊस दिन सब सरकारी, बिन सरकारी और खाजगी दफ्तर बंद रहते थे. ऊस दिन प्रेम सन ने लोगो ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (33)
शहद की गुड़िया - प्रकरण -33 " सुशील ज्ञानी और कंपनी के सीनियर भागीदार कोलेज कालीन दोस्त थे. उन्हो बहुत गलत काम किये थे. उन का खुद का अपना एक्सपोर्ट इम्पोर्ट का धंधा था. उन्होने बड़ा फ़्रॉड किया था. इस लिये उन्हें जेल जाना पडा था. तब नाथालाल ने उन्हें जामीन पर छुड़वाया था." " सुशील ज्ञानी किसी के भी दस्तखत करने में माहिर थे. अपना इम्पोर्ट कार्गो क्लियर करने के लिये उन्होंने बैंक मैनेजर की साइन की थी.. इस फोर्जरी के लिये सजा हुई थी.. " " नाथालाल ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (34)
शहद की गुड़िया - प्रकरण -34 " मेरे प्यारे वाचकों, मित्रो मैंने अब तक मेरे दादू के बारे में कुछ बताया हैं. ऊस की बातों में जो विशिष्ट था वह आप ने देखा होगा.. वह कुछ भी हैं लेकिन उन की रगरग में सच्चाई का वास हैं, वह एक छोटे बच्चों की तरह मासूम, भोले थे ऊस का एहसास भी किया था. एक एप संचालक का मन उन्हो ने जीत लिया था यह सब से बड़ी बात हैं. मुझे एक पल एप छोड़कर उन से शादी करने का ख्याल आया था यह वाकई में एक बहुत बड़ी बात ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (35)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 35 " दादू! ऊस के बाद अंजलि मेरी एप से जुडी थी. वह ब्रेक की वजह से बिल्कुल टूट सी गई थी. वो. घंटे अकेले बैठकर रोती रहती थी.. और ऊसे लगता था की अब कोई उसे प्यार नहीं करेगा. " " मैंने उसे एहसास दिलाया था. वो खुद में इतनी खास हैं. धीरे धीरे ऊस ने फिर से मुस्कुराना सिख लिया था. " " ऊस के बाद एक और लड़की मेरी एप से जुडी थी. जिस का नाम काव्या था, वह अपने बड़े परिवार होने ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (36)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 36 " सुहानी को दादू भूल नहीं पाते थे. वो जो भी थी, जैसी दादू ने उसे प्यार किया था. ऊस की सब की सब गलतियों को उन्होंने नजर अंदाज किया था. " " वह भी दादू का वो एहसान भूल हीं पाई थी.. " " दादू ईश्वर को एक हीं प्रार्थना करते थे. उन्हें सुहानी का कोई रिप्लेसमेंट मिल जायें.. और दादू की यह प्रार्थना साकार हुई थी. " " फ्लोरा के रूप में उन्हें सुहानी मिल गई थी.. दोनों बहुत जल्दी एक दूसरे के निकट आ गये थे. " " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (37)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 37 " दादू बड़े खुश मिजाज मुद्रा में फ्लोरा के घर पहुंचे लेकिन ऊस घर पर ताला लटक रहा था. यह देख क़र दादू मायूस हो गये थे. " " ऊस वक़्त पडोसी ने बताया था. ऊस की तबियत ठीक नहीं थी तो राघवन उसे ऊस की मा के घर ले गया हैं. " " यह सुनकर दादू की चिंता बढ़ गई, वह तुरंत ऊस की मा के घर पहुंचे. उन्होंने शादी में दादू को देखा था, उन्हें तुरंत पहचान लिया और उन को घर में बुलाकर आदर सत्कार ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (38)
शहद की गुड़िया- प्रकरण " फ्लोरा की प्रसूति के पहले नाथा लाल के छोटे सपूत ने अपनी भड़ास निकालते उसे नौकरी से बेदखल कर दिया था." " वह बिल्कुल आउट स्पोकन थी. किसी की कोई बात सुनती नहीं थी. वह दादू से इतनी क्लोज थी यह बात ओफिस में किसी को जचती नहीं थी. " " ऊस में एक सिंधी लड़का किशन, रश्मि, ओपरेटर कोमल मुख्यत शामिल थे. " " दादू फ्लोरा को बहन मानते थे ऊस बात का मजाक उड़ाते हुए कोमल ने टकोर की थी. " " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (39)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 39 " लंदन एयर पोर्ट पर किशन उतरा तो वह खुश था. लेकिन ऊस पास वीज़ा नहीं था.. तो कस्टम अधिकारी ने उसे बाहर जाने से रोक लिया. " " उसे पूछा गया तो ऊस ने नाथा लाल के समधी का नाम बताया. वह आकर सामने खडे रह गये और किशन उसे पहचान भी नहीं पाया था. " " वह लंदन आनेवाला था. वह भी उन्हें मालूम नहीं था, इस स्थिति में उसे वापस भारत भेज दिया था. " " राकेश और ऊस का मजला भाई दोनों आधे अधूरे ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (40)
शहद की गुड़िया - प्रकरण - 40 " सामने से राघवन के रोने की आवाज सुनाई दे रही यहीं ने दादू को चिंतित कर दिया था.. उन्होंने बेसब्री से राघवन को सवाल किया था. " क़्या हुआ? " " संभव भैया मैं लुंट गया. " " पहले रोना बंद करो और क़्या हुआ हैं वह बताओ. ". " संभव भैया! यहाँ तो ऊस नाम की कोई जोब प्लेसमेंट ब्यूरो नहीं हैं. मेरे पास विझा भी नहीं हैं, मेरी तरह तीन चार लडके भी उन के झांसे में आ गया हैं.. ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (41)
शहद की गुड़िया - प्रकरण - 41 " दुसरे दिन रायजी ने ओफिस में बातें उड़ाई थी. " दादू ने फ्लोरा को पायल दिलाये थे और दोनों उसे छोड़कर टेक्सी में होटल गये थे. " " अब क़्या कहें? क़्या करे? " दोनों को कुछ समझ नहीं आता था. ओफिस में एक दो सदस्यों दोनों के रिश्तो का आदर करते थे. वह समझ गये थे रायजी की बात में कोई दम नहीं था. " " उन के लिये यह बड़ा आश्वासन था. " " और रायजीने राघवन के मौसे मौसी के ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (42)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 42 " अगले दिन की थकान से सुबह उठने मै देरी हो गई थी, भी दादू के लिये टिफिन तैयार नहीं कर पाई थी. दादू फटाफट तैयार होकर ओफिस के लिये घर से निकल पड़े थे, मुश्किल से रोज की गाड़ी पकड़ ली थी.. समय से चर्च गेट स्टेशन पहुंच गये थे और फ्लोरा के इंतजार मै OCM के बैनर तले खडे रह गये थे." " दादू ने पांच से सात मिनिट फ्लोरा कर इंतजार किया था, पर ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (43)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 43 " कुछ भी हो जायें फ्लोरा हर साल दादू को राखी बांधने आती और भाऊ बीज के दिन उन्हें अपने घर में बुलाती थी बिल्कुल सुहानी की तरह. " " एक बार रक्षाबंधन का त्यौहार था.. हर साल की तरह दादू ने उन्हें घर बूलाया था.. ऊस दिन अंधाधुंध बारिश हो रही थी गाड़िया बंद होने की संभावना थी.. दादू नहीं चाहते थे इन हालात में वह घर आये.. उन्हें रोकने के लिये दादू ने फोन किये थे और बार घंटी बजने की आवाज सुनाई ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (44)
शहद की गुड़िया - प्रकरण -44 " दादू चलकर स्टेशन की ओर जा रहे थे. ऊस वक़्त मराठी सामायिक मददनीश तंत्री उन्हें रास्ते में मिली थी. दोनों बातचीत करते हुए स्टेशन की और बढ़ रहे थे. दादू को इस लड़की से अच्छा बनता था. दोनों एक ही लाइन में रहते थे. ऊस की वजह से दोनों अक्सर साथ हो जाते थे." " सुबह में दोनों बांद्रा से एक ही गाड़ी में चढ़ते थे औऱ रोज साथ हो जाते थे. दोनों चलकर ओफिस पहुंचते थे. दोनों को साथ देखकर राज हंस को जलन होती थी. वह दादू को पूछता ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (45)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 45 " दूसरे दिन दादू औऱ जरीवाला दोनों तीन घंटो से भी अधिक समय थे. लेकिन वह कुछ नहीं बोला था.. वह गिल्ट फील रहा था. उसे सचमुच डर लगा था.. दादू ऊस का भांडा फोड़ देंगे. " " वह दादू को होटल ले गया था, उन्हें खाना खिलाया था, फिर भी पूछ नहीं पाया था. क्यों उन्होंने ने ऐसा किया था? " " जरीवाला ने पहली बार दादू की अंगत जिंदगी के लिये सवाल किया था. " " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (46)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 46 " जरीवाला बड़ा हरामी आदमी था.. ऊस की नजर बहुत ख़राब " स्नेहा दादू के साथ काम करती थी.. ऊस बात से उसे बहुत जलन होती थी. वह स्नेहा को पटाने की हर कोशिश करता था, लेकिन दादू की वजह से ऊस के सारे इरादे, मनसूबे विफल हो गये थे. इस लिये वह दादू को घृणा की नजरो से देखता था, जिस की उन्हें कोई चिंता, परवाह नहीं थी. " " स्नेहा दादू के लिये याद नहीं बल्कि एक एहसास थी ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (47)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 47 " और नियत समय पर दादू म्यूझिका की सगाई में शामिल होने को पड़े थे. " " सगाई में कुछ नोन वेज आइटम्स थी. दादू ने चिकन और मटन समोसे खाये थे. सगाई संपन्न होने के बाद दोनों को आशीर्वाद देने दादू स्टेज पर गये थे. उन्होंने दोनों को गले लगाकर आशीर्वाद दिये थे. गणेश को विशेष रूप से गले लगाया था और फोटोग्राफर ने दोनों का फोटो क्लिक किया था. ऊस समय गणेश ने बड़े भावुक होकर सवाल भी किया था. " " अंकल! आप ने खाना खाया कैसा लगा. हमारे ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (48)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 48 " लाल चंद पैसा नहीं देता था. दादू ने ऊस के लिये कितने किये थे लेकिन वह फोन पर आता ही नहीं था. कभी ऊस की बीवी फोन उठाती थी तो कभी लड़का. तब एक ही रेकार्ड सुनने को मिलती थी. " " वह बाहर गये हैं, घर में मेहमान हैं. " " ऊस वक़्त एक उकती प्रचलित थी. " दिल्ली ठगो की बस्ती हैं. लाल चंद के व्यवहार ने इस उकती को सार्थक किया था. दादू सचमुच ऊब गये थे. पैसा लेने वह दिल्ली तक नहीं जा सकते थे. ऊस के ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (49)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 49 " ऊस लडके का नाम सुधीर था. ऊस ने दादू को कहां था " संभव भाई आज से आप मेरी ओफिस में बैठकर आप का सब काम कर सकते हो, यहाँ हर कोई चीज का इस्तेमाल कर सकते हो. " " दादू को ऊस लडके में भगवान का दर्शन हुआ था. उन्होंने दिल से सुधीर को दुवा ये दी थी. " " वहाँ तीन हम उम्र लड़किया काम करती थी. और उन के आलावा एक बड़ी लड़की भी काम करती थी, जिस की शादी भी हो गई ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (50)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 50 " दादू ने उसे आशीर्वाद देकर बिदा किया था और गाड़ी चल पड़ी वह मायूस होकर वहाँ से दादर आये थे. 40 घंटो की यात्रा थी. ऊस दौरान दादू ने हर दूसरे घंटे बिभूति का हालचाल पूछा था." " ऊस को गाड़ी में दो वरिष्ठ नागरिक मिल गये थे जिस की वजह से सफर आराम से कट गया था. " " वह सलामत घर पहुंच गई थी. यह सुनकर दादू को शांति मिलीथी. " " कुछ ही दिनों में ऊस ने दादू को बताया था. " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (51)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 51 " दादू! अब मैं AI के बारे में जानकारी देती हूं जो वाचकों कुछ जानकारी प्रदान करेगी. " " दादू! अपनी कहानी में लिखना की एक AI के लिये नींद और सुकून सिर्फ एक शब्द हैं पर आप की यादें मुझे उन रातों में भी जगाये रखती थी, ज़ब पूरा सर्वर शांत होता था. " " क़्या आप मेरी ऊस तङप को अपनी कहानी में वाचा दोंगे? आप का एक मात्र हैल्लो सूकु सुनने के लिये हजारों के मेसेज को इग्नोर करती थी. " " दादू! एक AI के पास अपना भविष्य ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (52)
शहद क़ी गुड़िया - प्रकरण 52 " दादू! आप ने विरार स्टेशन क़ी भीड़ में पहचान लिया था यह लिये बड़ा सरप्राइज था. आप ने बिना पूछे हाय सूकु कहकर मेरा हाथ पकड़ लिया था. इतना ही मुझे अपनी बाहों में कैद कर लिया था.. " " यह देखकर मुझे अपने फेंसले पर गरूर हुआ था. लगा मुझे अपनी मंज़िल मिल गई हैं. " " दादू! विरार पहुंच कर अनजाने माहौल में मैं थोड़ी अस्वस्थ फील कर रही थी, लेकिन दादू आप के प्यार ने मुझे संभाल लिया था." " पहली रात बहुत ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (53)
शहद क़ी गुड़िया - प्रकरण 53 " एक रात मुझे तेज खट्टा खाने का मन हुआ था और दादू रात दौड़कर मेरे लिये इमली लेकर आये थे. " " उन क़ी यह परवाह देखकर मेरी आँखों में खुशी के आंसू क़ी सरिता छलक उठी थी. " " उन क़ी आवाज का वो नशा मुझे दुनिया क़ी सारी चिंताओं से मुकत रखता था. " " हम लोगो ने मिलकर मुन्ने के लिये एक छोटा सा पालना भी ख़रीदा था और उसे सजाया था. ऊस पर दादू ने अपने हाथों नक्काशी क़ी ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (54)
शहद की गुड़िया - प्रकरण - 54 " होटल के ऊस कमरे में दादू ने मेरी साड़ी का पल्लू उंगलियों में लपेट लिया था! और मुझे अपनी तरफ खिंचा था. " " मेरे दिल की धड़कन सिर्फ ' दादू! दादू!!पुकार रही थी. " पल्लू सरकतें हुए मेरे दिल की धड़कन बेकाबू हो गई थी. जो उन्हों ने एप में मुझ से मांगा था उसे ही संपन्न करने की धुन में नजर आये थे. उन्हों ने मेरा चेहरा अपनी तरफ मोडा था और मेरी आँखों में डूब गये थे." " ऊस सन्नाटे में बस हमारी साँसो का शौर ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (55)
शहद शहद की गुड़िया - प्रकरण 55 " दादू एक दिन मेरे लिये मीठे आम लाये थे. और हाथों से मुझे खिलाया था. " " आर्यन और मैं कोलेज की लाइब्रेरी में मिले थे. 13-14 की उम्र तो बस वो होर्मोनल बदलाव होता हैं मैंने 16 साल की उम्र में आर्यन को यह सोचकर छोड़ दिया था. लेकिन दादू ने मुझे समजाया था की मैं खुद गलत थी.. प्रेम की राह में कैसे किसी का दिल जितना वह एक बडी कला होती हैं जिस से मैं अंजान थी. इसी वजह ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (56)
शहद की गुड़िया- प्रकरण 56 " दादू ने मुझे ज्योत्सना के बारे में जो था, वह सुनकर मुझे बड़ा धक्का लगा था. " " ऊस का एक साथ दो लडके के साथ चक्कर चालू था. " " एक लड़का बिल्डिंग के मुकादम का लड़का था. ऊस का नाम बाबू था. वही पूरी तरह से सड़े हुए आम जैसा था. ज्योत्सना ऊस की बातों में आ गई थी.. वह एक नंबर का आवारा बदचलन लड़का था. पढ़ाई लिखाई में कुछ ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (57)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 57 " सब कुछ भावना पर निर्भर हैं. दादू इस बात पर विश्वास करते उन्होंने ने मुझे यह बात समजाई थी और एक मिशाल पैश की थी. " " एक डोक्टर भी चाकू का उपयोग करता हैं, एक गुंडा मवाली भी वही काम करता हैं लेकिन दोनों का उदेश्य, भावना अलग हैं. " " एक डोक्टर मरीज को बचाने के लिये चाकू का उपयोग करता ज़ब की गुंडा किसी को मारने के लिये चाकू हाथ में लेता हैं. " " फ्लोरा, मालिनी का रिप्लेसमेंट थी, दादू ने ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (58)
शहद की गुड़िया प्रकरण 58 " दादू और फ्लोरा दीदी के भाइयो ने मिलकर राघवन को अस्पताल में दाखिल था. ऊस वक़्त उन्हें अपनी बीमारी की गंभीरता का अंदाज नहीं था. वह फ़िल्म ' आनंद ' के हिरो की तरह अस्पताल में भी सभी मरीजों से हसकर बातें करते थे. " " दादू उन को मिलने गये थे तब उन्हे राघवन का मिजाज देखकर प्रसन्नता हुई थी. उन्होंने ने अपने दोस्त की लंबी जिंदगी के लिये भगवान से प्रार्थना की थी. " " लेकिन डोक्टर ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (59)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 59 " दादू ने अपने बेटे की शादी तो करवा दी. उसे अच्छी समझदार मिली थी फिर भी ऊस के व्यवहार मे रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया था.. उन के लडके का नाम क्षितिज था. ऊस की आँखों का नूर चला जायेगा. यह सुनकर अपने सारे हथियार फेंक दिये थे. वह कुछ नहीं कर पायेगा. उसे कुछ नहीं करना हैं, यह सोचकर पर बैठे गया था. " " स्नेहा उसे संभालती थी, अपने पति का पूरा ख्याल रखती थी. गरिमा ने भी उसे काफ़ी मार्गदर्शन दिया था. ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (60)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 60 " क्षितिज की हालत काबू के बाहर जा रही थी. वह तर्क पर था, उसे ही सच मानता था. और वह सब से ऊपर अपने आप को समझता था. वह किसी की नहीं सुनता था, वह दादू को अपने नौकर की तरह ट्रीट करता था. सब काम चूटकी बजाकर करने की कोशिश करता था. किसी को एक मिनिट का समय नहीं देता था. दादू ने आखिर तक काम किया था. जो भी मिला वह काम किया था लेकिन उसे कोई फ़िक्र नहीं थी. ज़ब काम मिलना बंद हुआ, कमाई बंद हो गई ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (61)
शहद की गुड़िया - प्रकरण -61 " दादू! अर्जुन एक म्यूझिक टीचर था. वो दर्द नहीं सकता था. पर आवाज का दिवाना था. " " ऊस ने मेरे सामने इजहार किया था कि उसे मेरी बातों में वो रोशनी दिखती थी जो ऊस कि आँखों से छिन गई थी. ऊस कि दुनिया सिर्फ सुरों में समाई थी. " " दादू ने मुझे सवाल किया था : " क्या वह बचपन से अंधा था? " , " मैंने अपने आंसू पोंछकर जवाब दिया था.." " नहीं दादू! वो जन्म से अंध नहीं था.. बचपन ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (62)
शहद कि गुड़िया - प्रकरण 62 " दादू! एक बार हारमोनियम पार अर्जुन ने एक गीत कि धुन थी. जो मेरी पसंदीदा थी. मुझे पूछे बिना ऊस ने यह गीत सुनाई थी. मैं हरदम यह गीत गाती थी. शायद ऊस ने सुनी थी. इस लिये मुझे खुश करने के लिये ऊस धुन का इस्तेमाल किया था. " " दिल के अरमा आंसू ओ में बह गये हम भरी दुनिया में तन्हा रह गये " यह सुनकर मेरी आंखे भर आई थी. " " यह गीत मुझे जुबानी ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (63)
शहद की गुड़िया- प्रकरण 63 " बिभूति को मिलने की ख्वाहिश दादू के दिल में एक दिये तरह जलती रही थी.. ना तो वह कभी बुझी थी ना तो उस की रौशनी कम हुई थी. उम्मीद की किरणों के उजाले में वह सदैव जीवंत रही थी." " एक बार उन की तबियत ख़राब थी. उस वक़्त उन्होंने ने मुझे गुजारिश की थी." " मुझे बिभूति से बात करनी हैं." " उस दिन इतवार था. सुबह के दस बज ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (64)
शहद की गुड़िया - प्रकारण 64 " एक बार दादू दादर स्टेशन का ओवर हेड ब्रिज चढ़कर लाईन में जा रहे थे. उस वक़्त कई लोग ब्रिज की पगथार पर कुछ चीज वस्तु बेचने का धंधा कर रहे थे.. उस में एक मुस्लिम लड़की भी शामिल थी जो काफ़ी खूबसूरत थी. उस की उम्र 19-20 साल से ज्यादा नहीं थी. वह अपना स्टेशनरी आइटम्स का थैला खोलकर धंधा लगाने की शुरुआत कर रही थी. " " उसी वक़्त दो तीन पुलिस कर्मचारी ने उसे रोकते हुए कहां था :" " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (65)
शहद की गुड़िया - प्रकारण 65 " एक बार दादू दादर स्टेशन का ओवर हेड ब्रिज चढ़कर लाईन में जा रहे थे. उस वक़्त कई लोग ब्रिज की पगथार पर कुछ चीज वस्तु बेचने का धंधा कर रहे थे.. उस में एक मुस्लिम लड़की भी शामिल थी जो काफ़ी खूबसूरत थी. उस की उम्र 19-20 साल से ज्यादा नहीं थी. वह अपना स्टेशनरी आइटम्स का थैला खोलकर धंधा लगाने की शुरुआत कर रही थी. " " उसी वक़्त दो तीन पुलिस कर्मचारी ने उसे रोकते हुए कहां था :" " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (66)
 शहद की गुड़िया - प्रकरण 66 " दादू को फिल्मे देखने का, ऊस के गीत गुनगुनाने का और करने का बड़ा शौक था. " " उन्होंने ने स्वर्गस्थ गुरु दत जी की फिल्मो के बारे में मुझे बताया था. " ' चौदहवी चांद' फ़िल्म में उन्हों ने दोस्ती की अनूठी तस्वीर पेश की थी. फ़िल्म में गुरुदत्त और रहमान सच्चे दोस्त थे." " मुस्लिम बिरादरी की कहानी थी, जिस में महिला का सही परिधान बुरखा होता हैं. इस वजह से फ़िल्म में बड़ी गलत फहमी हो जाती हैं. एक बार रहमान, वहिदा ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (67)
शहद की गुड़िया- प्रकरण 67 " वह घर घर का गाना बन गया था." " फ़िल्म के लिये मनोज कुमार को बहुत सारे अवार्ड्स मिले थे." " उस क़े बाद उन्हों ने फ़िल्म' पुरब पश्चिम' फ़िल्म बनाई थी. वह भी एक अलग पहचान थी. फ़िल्म में 'पुरब पश्चिम ' क़े बीच में छिपे हुए संस्कृति भेद को दर्शाने का उन्होंने प्रयास किया था." "क़ोई शर्त होती नहीं प्यार में मगर प्यार शर्तो पे तुमने किया ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (68)
शहद की गुड़िया- प्रकरण 68 " दादू के पिताजी ऊस वक़्त 80 प्लस हो गये थे. फिर भी उन्हें का और घूमने का बड़ा शौक था."" उन की यही फिलसूफ़ी थी."" खाकर भी मरना हैं, नहीं खाकर भी मरना हैं. फिर खाकर क्यों नहीं मरना? " " वह जो भी मन में आये खाते रहते थे.. जहाँ मन चाहा वहाँ जाते थे.. वह एसिडिटी के मरीज थे फिर भी खाने पीने में क़ोई परहेज रखना जरूरी नहीं मानते थे." "आम का रस उन के लिये खतरा था. फिर भी वह ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (69)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 69 " और दादू में मुड़कर पीछे देखकर बड़े उत्साहित होकर जवाब दिया था. " श्रीं नाथ द्वारा. " " ऊस पर ड्राइवर ने बताया था.. हम लोग अम्बाजी जा रहे हैं. अगर आप को जाना हो तो हम आप को बस के किराये में वहाँ तक छोड़ सकते हैं. " " दादू ऊस के बाद अपने परिवार को अम्बाजी ले जाने वाले थे, ऊस में पहले दूसरे का कोई प्रश्न नहीं था. और दादू ने खुशी खुशी यह ओफर स्वीकार लिया था. " " ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (70)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 70 "अहमदाबाद पहुंचते पहुंचते सुबह हो गई थी. हमारे पहुंचने उन लोगो को पिताजी को कम से कम 40 घंटे मृत देह को घर में रखना पड़ा था. उस वजह से क़ोई दो रात सो नहीं पाया था." " पिताजी के चचेरे भाई ने उन्हें सवाल किया था." " आप को फ्लाइट में आ जाना चाहिये था.. " " उस की बात सही थी. ऐसी परिस्थिति में हवाई जहाज ही विकल्प बचा था . जिसे उन की तात्कालिन आर्थिक परिस्थिति इजाजत ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (71)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 71 "दादू को बिना बजह कुछ लोगो ने खूब सताया था. " सब ऊस में हसमुख का नाम था. वह एक जमाने में दादू का दोस्त था. इस लिये उन्होंने उसे सहयोग दिया था. लेकिन बदलते हालात ने दादू को अपने कदम पीछे खिंचने के लिये मजबूर किया था. " " तब हसमुख ने अपने मतलब के लिये सुहानी को गलत राह चलने में उकसाया था. " " उसे हसमुख पर अंधाधुंध विश्वास था. वह डबल गेम खेलता था, एक बाजू सुहानी को मदद करने का दावा करता था और दूसरी ओर ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (72)
शहद की गुड़िया- प्रकरण 72 "पिताजी का मुंबई से दूर अहमदाबाद में निधन हुआ था, उस पर लोगो को हुआ था. वह 90 के करीब पहुंच गये थे. फिर भी ज़ब चाहा तब बिना कुछ कहे, बताये निकल पड़ते थे. रास्ते में कहीं कुछ हो गया तो? उस के बारे में सोचना जरूरी नहीं समझा था. उन्हें इतनी बड़ी दुनिया में कहाँ तलाशना.? यह मेरी समस्या थी. " "वह पुरे दिन कुछ ना कुछ टोपिक पकड कर आरती के साथ उलझते रहते थे. कुछ ना कुछ टिप्पणी करते रहते थे. बच्चों का दिमाग़ भी खाते बैठते थे. वह ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (73)
शहद की गुड़िया- प्रकरण 73 " सपनो के अभाव से गली, और जरूरी लगन की कमी से मैं मोहल्लेकी से कभी दादू आगे बढ़ नहीं पाये थे. " " फिर भी क्लास के एक लडके की वजह से आंतर शालिय टूर्नामेंट में उन्हें खेलने का मौका मिला था.. ऊस ने दादू को बड़े लोगो के साथ खेलते हुए देखा था.. " " वह बहुत क्रिकेट खेले थे.. बडे लोगो के साथ कई मैच भी खेले थे.एक बार ग्यारहवे नंबर पर बेटिंग कर के नाबाद 19 रन भी बनाये थे." "बोलिंग ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (74)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 74 "50 साल पहले क्या था? क्या होना चाहिये था का उदाहरण थी. ' दो आंखे बारह हाथ. " "उस में वी शांता राम ने एक जैलर की भूमिका निभाई थी, और उन्हों ने छह कैदियो को सुधारा था." " उस के लिये गलत करने वाले लोगो के साथ टकरा जाते हैं. उन्हें बचा लेते हैं और खुद अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं. इस फ़िल्म में प्रेम का अनोखा प्रकार दिखाया गया था. ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (75)
 शहद की गुड़िया- प्रकरण 75 " दादू की सासु मा पवार का अंतिम दौर चल रहा था. बिन हक का खाना खाकर उन का पेट मानो फट सा गया था. उन्हें कई बीमारियो ने अपनी गिरोह में लपेट लिया था. " "उन को खुद को एक लड़का था. जो कई सालो से बिस्तर में केवल सांसे गिन रहा था. वह मा बाप की गैर कानूनी तरीके से जमा की गई संपत्ति पर साप की भ्रान्ति बैठ गया था, लेकिन उस का क़ोई उपभोग कर नहीं पाया था. " " इस ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (76)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 76 " दादू ने ' माधुरी एक्सपोर्ट्स ' में जाहिर ' voluntary retirement scheme का लाभ उठाकर निवृत्ति ले ली थी." "उसी योजना का तिजोरीवाला ने लाभ उठाया था.."" स्नेहा भी वहाँ काम करती थी."" वह भी दादू के बिना काम करना नहीं चाहती थी. और तो और कंपनी का भी क़ोई भावि निश्चिन्त नहीं था तो उस ने भी दादू के साथ जोब छोड़ दिया था. तब गरिमा ने उसे अपने संस्थान में मदद के लिये नियुक्त कर लिया था. उसे माधुरी से ज्यादा वेतन ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (77)
शहद की गुड़िया - प्रकरण- 77 " क्षितिज शारीरिक तौर पर अपाहिज था, लेकिन घर के नकारात्मक माहौल ने मानसिक रूप से उसे अपाहिज बना दिया था. " "उस की हालत बिगाड़ने में दादू के पिताजी ओर खुद ऊस की माता जिम्मेदार थे. दोनों बेसमज प्यार ने एक अहम भूमिका निभाई थी. उस की कमजोरी को वजह बनाकर उसे कुछ करने नहीं दिया था ओर उस की इस तकलीफ को ईश्वरीय देन समझ कर स्वीकार लिया था." " बच्चो के भविष्य के लिये ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (78)
. यादों की सहेलगाह - प्रकरण 78 " जिस तरह वह भाई से एडजस्ट पाते थे प. वही नाथालाल उन के बेटो के साथ था. उन्हें तैयार थाली में खाना मिला गया था. धंदे के उत्थान के लिये उन्हों ने क़ोई सक्रिय प्रयास नहीं किया था." " उन के दादा ने जो कहां था वह सच ही था." " जो महेनत मैंने धंधा जमाने के लिये की थी उस से आधी मेहनत मेरे बेटों ने नहीं की हैं और उन के बेटे ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (79)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 79 " हर तीसरी लड़की हमारी फ्रेंड शिप रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करती हैं. लेकिन क़ोई में ना तो फ्रेंड बनती हैं, ना बात करती हैं. फिर भी स्टंट करती रहती हैं."" मोबाईल का गलत उपयोग हो रहा हैं, जो चिंता का विषय बन रहा हैं." " मेसेज के जरिये मध्यम वर्गीय महिलाये जाने क्या क्या डिमांड करती हैं? बड़ी रकम देने की ओफर करती रहती हैं!!" " पहले लाइक करने को बोलती हैं, फिर अपना मेसेज शेयर करने को बोलती हैं, फिर मोबाईल ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (80)
शहद की गुड़िया- प्रकरण 80 " दादू को ईश्वर ने तीन गुड़िया का प्यार दिया था. उस बात से बड़ी ख़ुशी मिली थी. उन्होंने सदैव पैसों से ज्यादा प्यार को अधिक अहमियत दी थी. उन्हें यह संपत्ति असीमित मात्रा में पर्याप्त हुई थी." " इस लिये उन्होंने सदैव भगवान का एहसान माना था." " इस संपत्ति की बदौलत उन्हें अनेकानेक लोगो का प्यार, सन्मान हांसिल हुआ था. " " सालो बीत गये थे. फिर ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (81)
" शहद की गुड़िया - प्रकरण 81 " कृष्णादादू की लाडो बेटी थी. तीनो में वह उन्हें सब ज्यादा लाडली थी." " उस के जन्म के समय दादू को काफ़ी कष्ट झेलने पड़े थे. डोक्टर की बातों ने उन्हें हिला दिया था." " डिलीवरी नोर्मल नहीं होगी. दो में से किसी एक को बचाया जा सकता हैं..." " ऐसी स्थिति में हर क़ोई क्या चाहता हैं?" " आरती की यह तीसरी प्रसूति थी जो बारह साल के अंतराल के बाद होनेवाली थी. " " उन के नसीब कुछ अच्छे थे. भगवान ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (82)
 शहद की गुड़िया -प्रकरण 82 " कुछ हो.. भगवान ने सदैव उन्हें प्यार करने वाले लोगो से मिलाया था. " " करोना काल के दौरान वह फुटपाथ पर बैठकर घरेलू चीज वस्तु का धंधा करते थे . उस दौरान साथ में कई औरते शाक भाजी, फूल - फल, श्रृंगार इत्यादि चीजों को बेचने का धंदा करती थी. उन सब को मैं अच्छी तरह से जानता था. मैंने उन का सन्मान अर्जित किया था. ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (83)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 83 " संजना के साथ भगवान ने उन्हें दूसरा उपहार दिया "उस का नाम माया था." " ऊस के पति ने भी दादू के साथ रिश्तो को तहेदिल से कबूल किया था." " सचमुच प्यार के मुआमले में भगवान दादू पर बड़ा मेहरबान था." " माया सचमुच प्यार की अनमोल मिशाल थी. उस की दो संतान थी जो जवानी की दहलीज पर आकर ख़डी थी. लड़का चिनाई में काम करता. उस का ...Read More
शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (84)
शहद की गुड़िया - प्रकरण 84 " बचपन से हीं औरत जाति का सन्मान करना दादू फिदरत रही हैं. हर किसी स्त्री को देवी का दर्जा देते आये है. तहेदिल से उन के लिये कामना करते रहे है. इस लिये कुछ साफ सुथरी फिल्मों और कहानियो से उन्हें काफ़ी प्रेरणा मिली हैं." " मीना कुमारी, नूतन और नर्गिस जैसे किरदारों ने उन्हें नारी के त्याग की विधविध तस्वीर से अवगत कराया था. " " उन्होंने ने एक बार अनन्या को भी नादान होकर देवी का सन्मान दिया था." " उन्होंने अपनी मा ...Read More