वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय

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मलनाड की सुबह हमेशा खास होती है। जब कोहरे की चादर को चीरकर सूर्य की पहली किरणें धरती पर आती हैं, तो दुनिया किसी जादुई सपने जैसी लगती है। लेकिन अर्जुन के लिए, यह एक अलग ही दुनिया थी। घड़ी में छह बजते ही उसकी आँखें खुल गईं। अभी भी नींद में था, अंगड़ाई लेते हुए वह उठा और खिड़की के पास जाकर पर्दा हटाया। बाहर अब भी घना कोहरा छाया हुआ था, लेकिन उसकी आँखों के लिए—उस साधारण कोहरे में एक अलग ही ब्रह्मांड तैर रहा था। सुनहरा। जीवंत। पेड़-पौधों के चारों ओर विभिन्न रंगों का एक चमकता हुआ प्रभामंडल (Aura) था... "अर्जुन! उठो! कितनी देर तक सोओगे? स्कूल के लिए देर हो रही है!" माँ की आवाज़ ने उसका ध्यान तोड़ा।

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वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 1

अध्याय 1: स्वर्णिम प्रभातमलनाड की सुबह हमेशा खास होती है। जब कोहरे की चादर को चीरकर सूर्य की पहली धरती पर आती हैं, तो दुनिया किसी जादुई सपने जैसी लगती है। लेकिन अर्जुन के लिए, यह एक अलग ही दुनिया थी।घड़ी में छह बजते ही उसकी आँखें खुल गईं। अभी भी नींद में था, अंगड़ाई लेते हुए वह उठा और खिड़की के पास जाकर पर्दा हटाया। बाहर अब भी घना कोहरा छाया हुआ था, लेकिन उसकी आँखों के लिए—उस साधारण कोहरे में एक अलग ही ब्रह्मांड तैर रहा था। सुनहरा। जीवंत। पेड़-पौधों के चारों ओर विभिन्न रंगों का एक ...Read More

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वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 2

किरण की पलकें धीरे-धीरे खुलीं। शुरुआत में सब कुछ धुंधला और अस्पष्ट था। फिर धीरे-धीरे अर्जुन का चिंतित चेहरा दिखाई देने लगा।"किरण! होश आ गया?" अर्जुन की आवाज़ में राहत की सांस थी।किरण धीरे से उठकर बैठ गया। उसका सिर अभी भी थोड़ा भारी था, लेकिन वह भयानक दर्द गायब हो चुका था। "क्या हुआ था? मुझे... मैं अब ठीक हूँ," उसकी आवाज़ में आश्चर्य था।अर्जुन ने अपने दोस्त के चेहरे को गौर से देखा। "तू बेहोश हो गया था। मैंने... मैंने तुझे पानी दिया। उसमें कुछ पत्तियां मसलकर मिलाई थीं।""पत्तियां?" किरण भ्रमित हो गया। "कौन सी पत्तियां?""मुझे नहीं ...Read More

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वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 3

स्कूल की घंटी बजी। अर्जुन और किरण स्कूल के बाहर आइसक्रीम की दुकान के पास खड़े थे। शांतप्पा की मलनाड में अपनी मशहूर कुल्फी के लिए जानी जाती थी।"दो मैंगो कुल्फी," किरण ने कहा।अर्जुन ने अपनी स्केचबुक निकाली और पेड़ की छांव में बैठकर कुछ उकेरने लगा। पिछले दो दिनों से वह बहुत चिंतित था। विक्रम की वह जिज्ञासु नज़र... उसे कितना पता चल गया था?"ओए, क्या मैं तुम लोगों को जॉइन (Join) कर सकता हूँ?"दोनों ने सिर उठाकर देखा। विक्रम वहां खड़ा था, एक दोस्ताना मुस्कान के साथ। उसके हाथ में बैडमिंटन रैकेट था—लगता था वह खेल कर ...Read More

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वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 4

विक्रम के कमरे में केवल दीपक की रोशनी जल रही थी। मेज पर ताड़पत्र की वह किताब फैली हुई बगल में उसकी नोटबुक, पेंसिल, और एक संस्कृत-कन्नड़ शब्दकोश (Dictionary)।विक्रम ने अपना चश्मा ठीक किया और प्राचीन लिपि को पढ़ने की कोशिश की। हर शब्द के कई अर्थ थे। हर वाक्य एक पहेली थी।"'वनस्पति विद्यावंत'..." उसने लिखते हुए बड़बड़ाया। "'वन' यानी जंगल, 'स्पति' यानी स्वामी... जंगल के स्वामी? नहीं, पौधों के स्वामी..."घड़ी में बारह बज रहे थे।उसने अगला पत्ता पलटा। संस्कृत के जटिल श्लोक।"प्राणायामेन वनस्पति संवादः... प्रकृति चेतना संयोगः...""प्राणायाम... सांस का व्यायाम? और वनस्पति संवाद... पौधों के साथ बातचीत?" उसने ...Read More

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वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 5

पुराने खंडहर मंदिर में तीनों अभी भी आंखें बंद किए बैठे थे।अर्जुन का चेहरा पूर्ण शांति से भरा था। सांस बहुत धीमी और गहरी थी। उसके चारों ओर विभिन्न रंगों की आभा धीरे-धीरे नृत्य कर रही थी।उसे लग रहा था जैसे वह पौधों की दुनिया में है। हर पत्ते का कंपन, हर जड़ का स्पर्श, हर फूल की सुगंध—सब कुछ उसके भीतर गूंज रहा था।वह पौधों के साथ एक हो गया था। उनकी सांस उसकी सांस थी। उनका जीवन उसका जीवन था।आनंद। शांति। पूर्णता।विक्रम का चेहरा अलग था। उसके माथे पर तनाव था। आंखें बंद होने के बावजूद, पुतलियाँ ...Read More

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वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 6

विक्रम स्कूल के गलियारों में भाग रहा था। उसकी सांसें तेज़ थीं, दिल धड़क रहा था। पेड़ की वह अभी भी उसके दिमाग में गूंज रही थी। अर्जुन खतरे में था।"मैडम! बायोलॉजी (Biology) मैडम!" वह हर क्लास का दरवाज़ा खटखटाते हुए चिल्लाया।आखिरकार, वे उसे प्रयोगशाला (Lab) में मिलीं। लक्ष्मी मैडम—युवा, उत्साह से भरी जीव विज्ञान की शिक्षिका। उन्हें पेड़-पौधों से गहरा लगाव था।"विक्रम? क्या हुआ?" उन्होंने उसका घबराया हुआ चेहरा देखकर पूछा।"मैडम! थिएटर में इमरजेंसी है! वे उस बड़े आम के पेड़ को काट रहे हैं! अर्जुन उसके नीचे लेटा हुआ है!"लक्ष्मी मैडम चौंक गईं। "क्या? चलो, जल्दी!"वे दोनों ...Read More

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वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 7

शनिवार की सुबह। स्कूल की घंटी बजते ही छात्र खुशी-खुशी अपने बैग उठाकर निकलने लगे, सप्ताहांत (Weekend) की आज़ादी ओर देखते हुए।स्कूल के गेट के पास तीनों दोस्त खड़े थे। उनकी बातचीत सामान्य लग रही थी, लेकिन विषय असाधारण था।"हमारे पुराने अड्डे पर मिलते हैं," विक्रम ने बैग कंधे पर डालते हुए कहा। "मैंने उस ताड़पत्र की किताब में कुछ प्रगति की है।""वही खंडहर मंदिर?" अर्जुन ने पुष्टि की।"कितने बजे?" किरण ने पूछा, जो हमेशा व्यावहारिक था।"मुझे एक घंटा दो। मैं शब्दकोश (Dictionaries) लेकर आता हूँ," विक्रम ने कहा। "डेढ़ बजे वहां मिलते हैं।""ठीक है," अर्जुन और किरण मान ...Read More