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भाग 1: 'रिदम कैफे' और वो अधूरी शामशहर की शोर-शराबे वाली गलियों के बीच एक...
अध्याय 14: युद्ध की तैयारी और लौरा का संकल्पजैसे ही कन्या गुरुकुल की संदेशवाहक व...
सुबह की शुरुआत एक अलग ही कोलाहल के साथ हुई। बच्चों के स्कूल जाने का समय था। कल त...
देखते ही देखते सगाई का दिन भी आ गया।घर में चारों तरफ खुशी का माहौल था।सब लोग तैय...
कहानी की शुरुआत कहीं से भी हो, किरदार यदि दिलचस्प होता है तो कहानी स्वतः ही खूबस...
शैतान से प्यारप्रस्तावना: अंधेरे का राजकुमारभाग 1: पहली मुलाकातरात के दो बजे थे।...
अहमदाबाद की एक तंग लेकिन जिंदादिल गली में शाम ढल रही थी। नुक्कड़ की चाय की दुकान...
12-- एक तो टॉप करने के बावज़ूद भी एम.फ़िल...
उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव सूर्यनगर में रहने वाला रघुवीर सिंह कभी अपने समय का...
नई सुबह, नया संकेतचेन्नई की जीत के बाद टीम को लगा था कि अब शांति मिलेगी। लेकिन आ...
महाभारत की कहानी - भाग- १ शिखंडी की कहानी और भीष्म की इच्छामृत्यु प्रस्तावना संपूर्ण महाभारत पढ़ने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। अधिकांश लोगों ने महाभारत की कुछ कहानी पढ़ी, सु...
पौराणिक कथाओं में विष्णुभक्त प्रह्लाद की कथा का अत्यंत महत्त्व है। यह कथा अन्याय, अत्याचार एवं अभिमान पर न्याय, सदाचार और स्वाभिमान की जीत की शिक्षा देती है। यह कथा उस समय की है, ज...
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...
मलनाड की सुबह हमेशा खास होती है। जब कोहरे की चादर को चीरकर सूर्य की पहली किरणें धरती पर आती हैं, तो दुनिया किसी जादुई सपने जैसी लगती है। लेकिन अर्जुन के लिए, यह एक अलग ही दुनिया थी...
"जो मिट्टी के लिए जीया, वो इतिहास बना। जो स्वाभिमान के लिए लड़ा, वो प्रताप बना।" अरावली की पहाड़ियों में आज भी जब सूरज उगता है, तो उसकी पहली किरण हल्दीघाटी की...
मन स्वयं आनंद है, स्वयं ब्रह्म है। बस उसे कर्ता से द्रष्टा बना दो—कर्ता नहीं बचता। यही द्रष्टा प्रेम है, आनंद है। तब मन स्थिर होता है, ऊर्जा बहती है—प्रेम, करुणा, दया, सेवा अपने...
श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 3, श्लोक 35 “श्रेयान् स्वधर्मो विगुणः परधर्मात् स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः॥” सरल अर्थ: अपना धर्म (स्वभाव, अपना मार्...
1. प्रारंभिक स्वरूप परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है, मंत्रोच्चार औ...
मुंबई शहर के एक कोर्ट में एक लड़की रजिस्ट्रार के कमरे के बाहर बैठी थी। तभी कमरे के अंदर से किसी आदमी की आवाज आती हैं।आदमी " मिस जिया शर्माकमरे के बाहर बैठी लड़की आवाज सुन तुरंत...
जिस दिन मनुष्य ने पहली बार भीतर झाँका — उसे दो धाराएँ दिखीं। एक श्वास के बाएँ बहती हुई, दूसरी दाएँ। और बीच में एक मौन मार्ग — अदृश्य, सूक्ष्म, निर्मल — सुषुम्ना। यही से आत्मया...
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