दुर्गा पूजा की रात थी पंडाल में सब देवी को पूज रहें थें। चारों तरफ सिंदूर था और ढोल-नगाड़े बज रहें थें। कोलकाता के इस शहर में हर साल देवी की पूजा धूम -धाम से मनाइ जाती है। कहतें हैं देवी ने असुरों का नाश करने के लिए माँ दुर्गा का स्वरूप धारण किया था। हर साल दुर्गा का आगमन बुराई पे अच्छाई कि जीत को दर्शाता है लेकिन जरूरी नहीं है की हर युग में जीत अच्छाई की ही हो। ये कहानी है कलयुग की जहां मोह- माया ही सब कुछ है और लोग इन्हें पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकतें हैं। ये कहानी है ऐसी ही जिद की , एक ऐसे जुनून और पागलपन जिसे पाने के लिए इन्सान शैतान बन जाता हैं।
बेहद है ये जुनून - 1
दुर्गा पूजा की रात थी पंडाल में सब देवी को पूज रहें थें। चारों तरफ सिंदूर था और ढोल-नगाड़े रहें थें। कोलकाता के इस शहर में हर साल देवी की पूजा धूम -धाम से मनाइ जाती है। कहतें हैं देवी ने असुरों का नाश करने के लिए माँ दुर्गा का स्वरूप धारण किया था। हर साल दुर्गा का आगमन बुराई पे अच्छाई कि जीत को दर्शाता है लेकिन जरूरी नहीं है की हर युग में जीत अच्छाई की ही हो। ये कहानी है कलयुग की जहां मोह- माया ही सब कुछ है और लोग इन्हें पाने के लिए किसी ...Read More