मजबूरी का सौदा: एक अनकही शर्त

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पहला अध्याय: किस्मत की ठोकर​शहर की चकाचौंध से दूर, एक पुराने और टूटे हुए मकान में अंजलि अपनी बीमार माँ के सिरहाने बैठी रो रही थी। डॉक्टर ने साफ़ कह दिया था कि अगर तीन दिन के अंदर माँ का ऑपरेशन नहीं हुआ, तो उन्हें बचाना नामुमकिन होगा।​ऑपरेशन का खर्चा— पाँच लाख रुपये।​एक अनाथ लड़की, जो दूसरों के घरों में ट्यूशन पढ़ाकर बमुश्किल अपना घर चलाती थी, उसके लिए पाँच लाख रुपये किसी पहाड़ की चोटी को छूने जैसा था।​"भगवान, मैं कहाँ से लाऊँ इतने पैसे? कोई तो रास्ता दिखाओ," अंजलि ने सिसकते हुए ऊपर वाले से गुहार लगाई।​

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मजबूरी का सौदा: एक अनकही शर्त - 1

पहला अध्याय: किस्मत की ठोकर​शहर की चकाचौंध से दूर, एक पुराने और टूटे हुए मकान में अंजलि अपनी बीमार के सिरहाने बैठी रो रही थी। डॉक्टर ने साफ़ कह दिया था कि अगर तीन दिन के अंदर माँ का ऑपरेशन नहीं हुआ, तो उन्हें बचाना नामुमकिन होगा।​ऑपरेशन का खर्चा— पाँच लाख रुपये।​एक अनाथ लड़की, जो दूसरों के घरों में ट्यूशन पढ़ाकर बमुश्किल अपना घर चलाती थी, उसके लिए पाँच लाख रुपये किसी पहाड़ की चोटी को छूने जैसा था।​"भगवान, मैं कहाँ से लाऊँ इतने पैसे? कोई तो रास्ता दिखाओ," अंजलि ने सिसकते हुए ऊपर वाले से गुहार लगाई।​तभी उसकी ...Read More

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मजबूरी का सौदा: एक अनकही शर्त - 2

अध्याय 2: आधी रात का राज़​स्टोर रूम की खिड़की से आती ठंडी हवा अंजलि के बदन में सिहरन पैदा रही थी। बाहर बारिश तेज़ हो चुकी थी, लेकिन बंगले के अंदर से आती उन चीखों ने अंजलि का खून सुखा दिया था।​"नहीं! मुझे छोड़ दो! रुद्र... तुम ऐसा नहीं कर सकते!"— किसी औरत की दबी हुई आवाज़ आई और फिर एक जोरदार धमाका हुआ, जैसे कोई कीमती गुलदस्ता दीवार पर दे मारा गया हो।​अंजलि से अब और इंतज़ार नहीं हुआ। रुद्र ने उसे अंदर आने से मना किया था, लेकिन किसी की जान खतरे में हो तो वह चुप ...Read More