चेकपोस्ट:चाणक्य

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मंगलाचरण: एक रहस्यमयी आकृति गर्मी की दोपहर हो या सर्दियों की गुनगुनी धूप, मोहल्ले की उस २० फुट चौड़ी सड़क के बाएं कोने पर एक 'अजूबा' हमेशा मौजूद रहता है। दूर से देखने वाले राहगीर अक्सर धोखा खा जाते हैं। कोई उसे म्युनिसिपलिटी का छोड़ा हुआ पुराना काला बोरा समझकर बचकर निकल जाता है, तो कोई सोचता है कि शायद किसी ट्रक से डामर का कट्टा गिर गया है। लेकिन जैसे-जैसे आप करीब पहुँचते हैं, उस 'बोरे' में हल्की सी हलचल दिखाई देती है। वह आकृति थोड़ी सांस लेती है, थोड़ी मिट्टी उड़ाती है और अपनी एक आँख खोलकर दुनिया को ऐसे देखती है जैसे कह रही हो— "देख क्या रहे हो? कभी किसी रिटायर्ड डॉन को आराम करते नहीं देखा?"

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चेकपोस्ट:चाणक्य - 1

अध्याय १: चाणक्य का 'दफ्तर' और रडार जैसे कान मंगलाचरण: एक रहस्यमयी आकृतिगर्मी की दोपहर हो या की गुनगुनी धूप, मोहल्ले की उस २० फुट चौड़ी सड़क के बाएं कोने पर एक 'अजूबा' हमेशा मौजूद रहता है। दूर से देखने वाले राहगीर अक्सर धोखा खा जाते हैं। कोई उसे म्युनिसिपलिटी का छोड़ा हुआ पुराना काला बोरा समझकर बचकर निकल जाता है, तो कोई सोचता है कि शायद किसी ट्रक से डामर का कट्टा गिर गया है। लेकिन जैसे-जैसे आप करीब पहुँचते हैं, उस 'बोरे' में हल्की सी हलचल दिखाई देती है। वह आकृति थोड़ी सांस लेती है, ...Read More

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चेकपोस्ट:चाणक्य - 2

अध्याय २: रिकवरी मोड और अक्षय खन्ना वाली एक्टिंगद मुहाना ऑपरेशन्स: 'रडार' से 'इंटरसेप्टर' तकजैसे ही आशीष जैन अपनी को गली के मुहाने पर मोड़ते हैं, फ़िज़ाओं में एक सनसनी फैल जाती है। चाणक्य, जो अभी तक एक पुराने 'काले बोरे' की तरह मिट्टी में निढाल पड़ा था, अचानक सक्रिय हो जाता है। उसके कान, जो दिखने में भले ही गधे जैसे लंबे हों, असल में वो ३६० डिग्री घूमने वाले सोफेस्टिकेटेड सेंसर हैं। वो हवा की गति, एक्टिवा के टायर का घर्षण और आशीष भाई के परफ्यूम की खुशबू को एक साथ स्कैन करते हैं।जैसे ही आशीष मुहाने ...Read More

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चेकपोस्ट:चाणक्य - 3

​द 'घोस्ट' एंट्री: सन्नाटा, एक्टिवा और अचानक प्रकट हुई 'बारात'​संसार की सबसे शांत जगह क्या है? हिमालय की गुफा? रात के ३ बजे का पुस्तकालय? बिल्कुल नहीं। संसार की सबसे शांत जगह वह सड़क होती है जहाँ आशीष जैन की एक्टिवा रुकने वाली होती है। चाणक्य की शातिरपंथी का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि वह 'भीड़ की मनोविज्ञान' (Crowd Psychology) का ऐसा मास्टर है, जिसके सामने हार्वर्ड के प्रोफेसर भी ट्यूशन पढ़ने आएँ।​चाणक्य जानता है कि 'अकेले' संघर्ष करने में वो मज़ा नहीं है जो 'यूनियन' बनाकर लूटने में है। वह अच्छी तरह समझता है कि अगर वह ...Read More

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चेकपोस्ट:चाणक्य - 4

एक. आशीष भाई का' ऑफिस- एग्जिट' और आजादी का सपनाआशीष जैन के लिए उनकी सफेद एक्टिवा कोई साधारण मशीन बल्कि एक' टाइम मशीन' है. जैसे ही वह ऑफिस की कांच वाली बिल्डिंग से बाहर कदम रखते हैं, उनके दिमाग में एक ही धुन बजती है—" आजादी! वह अपनी उंगलियों से एक्टिवा की चाबी को वैसे ही नचाते हैं जैसे कोई जासूस अपनी गन लोड कर रहा हो. उनके लिए ऑफिस की वह आठ घंटे की कैद, फाइलों का वह पहाड और बॉस की वह' डेडलाइन' वाली धमकियां, सब कुछ पीछे छूटने ही वाली होती हैं.वह हेलमेट पहनते समय शीशे ...Read More