पंद्रह दिन के हनीमून से वापिस घर लौटते हुए अधीर ने बीस दिन पहले सात फेरे लेने वाली पत्नी अवनी से बेड पर लेटे हुए गले में बाहें डालते हुए कहा- "अब तो शादी भी हो गई, हनीमून भी हो गया लगता है जिंदगी का सारा एक्साइटमेंट हनीमून में ही है।अब तो रोज एक ही ढर्रे वाली जिंदगी जी कर बोर होना पडेगा।"अवनी ने अधीर से गले से बाहें हटाते हुए कहा-"जब अब जीने के लिए रोटी की जुगाड तो करनी पडेगी ना,आखिर अब हम दोनों एक ही गाडी के दो पहिए जो हैं।
घर से वापिसी - 1
पंद्रह दिन के हनीमून से वापिस घर लौटते हुए अधीर ने बीस दिन पहले सात फेरे लेने वाली पत्नी से बेड पर लेटे हुए गले में बाहें डालते हुए कहा- अब तो शादी भी हो गई, हनीमून भी हो गया लगता है जिंदगी का सारा एक्साइटमेंट हनीमून में ही है।अब तो रोज एक ही ढर्रे वाली जिंदगी जी कर बोर होना पडेगा। अवनी ने अधीर से गले से बाहें हटाते हुए कहा- जब अब जीने के लिए रोटी की जुगाड तो करनी पडेगी ना,आखिर अब हम दोनों एक ही गाडी के दो पहिए जो हैं।अब मुझे बहुत काम है।कल सुबह तुम्हें ...Read More
घर से वापिसी - 2
अभीर शहर में एक छोटे से कमरे में किराए पर रहता है। कमरे में पहुंचते हुए अभीर ने अवनी हाथ से बनाया हुआ टिफिन बॉक्स खोला। टिफिन बॉक्स खोलते ही खानें की खुशबू चारों तरफ़ फैल गई, खाने की खुशबू से अभीर से एक सेकेण्ड ना रहा गया और अवनी के हाथ से बनाया गया खाना जैसे एक ही सांस में खत्म कर दिया हो।अभीर हाथों से स्वादिष्ट खाना खाते हुए अवनी की यादों में खो जाता है!काश अवनी! "तुम यहां मेरे साथ होती तो आज इतना स्वादिष्ट खाना खिलाने के लिए मैं तुम्हारे हाथों को चूम लेता।अवनी की ...Read More