“मैं ये शादी नहीं कर सकती, माँ… प्लीज़ समझने की कोशिश करो!” आराध्या की आवाज़ काँप रही थी। आँखों में आँसू थे, लेकिन उनमें डर से ज़्यादा बेबसी झलक रही थी। सामने खड़ी उसकी माँ, शकुंतला देवी, चुप थीं। शायद उनके पास भी अब कहने को कुछ नहीं बचा था। कमरे के बाहर रिश्तेदारों की फुसफुसाहट, हलवाई के बर्तनों की आवाज़ और बैंड की धुनें—सब कुछ मिलकर आराध्या के दिल को और भारी बना रहे थे। ये उसकी शादी का दिन था, लेकिन उसके चेहरे पर दुल्हन वाली चमक नहीं, बल्कि एक टूटी हुई लड़की की खामोशी थी। आराध्या कभी भी इस शादी के लिए तैयार नहीं थी। सब कुछ इतना अचानक हुआ कि उसे समझने का मौका तक नहीं मिला। सिर्फ तीन दिन पहले तक उसकी ज़िंदगी बिल्कुल अलग थी।
अनचाही शादी - किस्मत का सौदा - भाग 1
“मैं ये शादी नहीं कर सकती, माँ… प्लीज़ समझने की कोशिश करो!”आराध्या की आवाज़ काँप रही थी। आँखों में थे, लेकिन उनमें डर से ज़्यादा बेबसी झलक रही थी। सामने खड़ी उसकी माँ, शकुंतला देवी, चुप थीं। शायद उनके पास भी अब कहने को कुछ नहीं बचा था।कमरे के बाहर रिश्तेदारों की फुसफुसाहट, हलवाई के बर्तनों की आवाज़ और बैंड की धुनें—सब कुछ मिलकर आराध्या के दिल को और भारी बना रहे थे। ये उसकी शादी का दिन था, लेकिन उसके चेहरे पर दुल्हन वाली चमक नहीं, बल्कि एक टूटी हुई लड़की की खामोशी थी।आराध्या कभी भी इस शादी ...Read More