रामेसर की दादी

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रामेसर अब गाँव का भोला-सा लड़का नहीं रहा। समय ने उसे माँजा, अनुभवों ने उसे गढ़ा, और शिक्षा ने उसे ऊँचाई दी। अब वह अपने व्यक्तित्व में एक निखार लिए चलता है, साफ़-सुथरे कपड़े, चमचमाते जूते, चुस्त बेल्ट, सलीके से चढ़े हुए मोज़े। भाषा में मधुरता है, बातों में सैकड़ों महापुरुषों की उक्तियों की गूँज, और शैलियों में आधुनिकता का उन्नत स्वर। वह एक अच्छी नौकरी करता है और समाज में सम्मानित स्थान पा चुका है। ज्ञान, शील और मूल्य अब उसके जीवन के पथप्रदर्शक हैं।

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रामेसर की दादी - 1

रामेसर अब गाँव का भोला-सा लड़का नहीं रहा। समय ने उसे माँजा, अनुभवों ने उसे गढ़ा, और शिक्षा ने ऊँचाई दी। अब वह अपने व्यक्तित्व में एक निखार लिए चलता है, साफ़-सुथरे कपड़े, चमचमाते जूते, चुस्त बेल्ट, सलीके से चढ़े हुए मोज़े। भाषा में मधुरता है, बातों में सैकड़ों महापुरुषों की उक्तियों की गूँज, और शैलियों में आधुनिकता का उन्नत स्वर। वह एक अच्छी नौकरी करता है और समाज में सम्मानित स्थान पा चुका है। ज्ञान, शील और मूल्य अब उसके जीवन के पथप्रदर्शक हैं।परंतु इस सबके बीच भी भीतर का रामेसर वही है, जिसे किताबों से, विचारों से ...Read More

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रामेसर की दादी (अंतिम भाग)

बीसों साल बीत गए, सब कुछ कितना बदल गया। लेकिन आजवह मन बना कर उठा कि इस बार गांव होगा तो दादी से जरूर मिलेगा।कुछ दिन बीते रामेसर अपने गांव आया और जैसा कि उसने तय कर रखा था दादी से मिलने अपने काका के घर पहुंचा।दादी अब वैसी न रह गई थी, उसका शरीर सिमट कर एक मुरझाये फूल की तरह हो गया था। जुते हुए खेत की धारियाँ जैसी होती है वैसी ही अनगिनत झुरियाँ उसके चेहरे पर थीं। उसकी चमड़ी मानो ऐसी कि जैसे किसी ने काले रंग की पॉलीथिन पहना दी हो।एक हंसती इमारत बदलकर ...Read More