दो राज्यों का अमर प्रेम

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कुछ प्रेम मिलन के लिए नहीं होते,वे इतिहास बदलने के लिए जन्म लेते हैं।पितामगढ़ और रायगढ़, दो शक्तिशाली राज्य, जिनके बीच वर्षों से शत्रुता थी। कभी जिन राजाओं ने एक ही छाया में बचपन बिताया था, वही समय के साथ गलतफहमियों और अहंकार के कारण एक-दूसरे के सबसे बड़े शत्रु बन गए। युद्ध, रक्त और नफ़रत ने दोनों राज्यों की सीमाओं को नहीं, बल्कि दिलों को भी बाँट दिया।इसी शत्रुता के बीच जन्म लेती है एक ऐसी प्रेम कथा, जो किसी योजना का परिणाम नहीं, बल्कि नियति की भूल जैसी लगती है।

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दो राज्यों का अमर प्रेम

कुछ प्रेम मिलन के लिए नहीं होते,वे इतिहास बदलने के लिए जन्म लेते हैं।पितामगढ़ और रायगढ़, दो शक्तिशाली राज्य, बीच वर्षों से शत्रुता थी। कभी जिन राजाओं ने एक ही छाया में बचपन बिताया था, वही समय के साथ गलतफहमियों और अहंकार के कारण एक-दूसरे के सबसे बड़े शत्रु बन गए। युद्ध, रक्त और नफ़रत ने दोनों राज्यों की सीमाओं को नहीं, बल्कि दिलों को भी बाँट दिया।इसी शत्रुता के बीच जन्म लेती है एक ऐसी प्रेम कथा, जो किसी योजना का परिणाम नहीं, बल्कि नियति की भूल जैसी लगती है। पितामगढ़ के युवराज नील और रायगढ़ की राजकुमारी ...Read More

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दो राज्यों का अमर प्रेम - 1

अध्याय -- 1दो राज्यों की दुश्मनी, दो दिलों की अनजानी नियतिइतिहास में कुछ युद्ध ऐसे होते हैं जो तलवारों नहीं,बल्कि गलतफहमियों से जन्म लेते हैं।और कुछ शत्रुताएँ ऐसी होती हैं, जो समय के साथ कमज़ोर नहीं होतीं,बल्कि पीढ़ियों के रक्त में बहने लगती हैं।पीतमगढ़ और रायगढ़ की शत्रुता भी कुछ ऐसी ही थी।उत्तर दिशा की ऊँची पहाड़ियों के बीच बसा "पीतमगढ़"जहाँ किले की दीवारें इतनी मजबूत थीं कि सूरज की किरणें भी अनुमति लेकर भीतर आती थीं।यह राज्य अनुशासन, सैन्य शक्ति और कठोर निर्णयों के लिए जाना जाता था।यहाँ भावनाओं से अधिक कर्तव्य को महत्व दिया जाता था।दक्षिण की ...Read More

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दो राज्यों का अमर प्रेम - 2

युद्ध के बीच पलता बचपन, और मन में उगते मौन प्रश्नयुद्ध केवल रणभूमि में नहीं लड़ा जाता।वह बच्चों की में,माताओं की आँखों में,और भविष्य के सपनों में भी पलता है।राजकुमार नील और राजकुमारी मीनाक्षी,दोनों का बचपन तलवारों की छाया में बीता,पर दोनों की आत्मा ने युद्ध को अलग-अलग रूप में महसूस किया।राजकुमार नील - एक योद्धा, जो युद्ध से डरता थापीतमगढ़ का महल पत्थरों से बना था,पर उसकी दीवारों से अधिक कठोर था वहाँ का अनुशासन।नील जब पाँच वर्ष का हुआ, तो उसे लकड़ी की तलवार थमा दी गई। सात वर्ष में घुड़सवारी।दस वर्ष में शस्त्रविद्या।महाराज देवव्रत का एक ...Read More