दिल्ली का शास्त्री नगर। यहाँ की सुबह चिड़ियों की चहचहाहट से नहीं, बल्कि सड़क पर हॉर्न बजाती गाड़ियों और फेरीवालों की आवाज़ से होती थी। इन्हीं तंग और भीड़भाड़ वाली गलियों में एक पुराना, सीलन भरा छोटा सा घर था। यह घर था सोनाक्षी का।सोनाक्षी, जिसके चेहरे पर गोण्डा, उत्तर प्रदेश की सादगी थी, लेकिन आँखों में दिल्ली के सपने चमकते थे। उसके पिता रामअवतार दिहाड़ी मज़दूर थे। पत्थर उठाते-उठाते उनके हाथ इतने सख्त हो गए थे कि जब वे सोनाक्षी के सिर पर प्यार से हाथ फेरते, तो उनकी हथेली की रगड़ साफ़ महसूस होती थी। रोज़ सुबह लेबर चौक पर खड़ा होना, कभी काम मिलना, कभी खाली हाथ लौटना — यही उनकी ज़िंदगी थी। घर में पैसे कम थे, पर सोनाक्षी के लिए उनका प्यार बेहिसाब था।ठीक उसके घर के बगल में एक अलग ही दुनिया थी — अतुल जोशी का घर।
गलतफहमी का खून - 1
दोस्ती, जुनून और वोदिल्ली का शास्त्री नगर। यहाँ की सुबह चिड़ियों की चहचहाहट से नहीं, बल्कि सड़क पर हॉर्न गाड़ियों और फेरीवालों की आवाज़ से होती थी।इन्हीं तंग और भीड़भाड़ वाली गलियों में एक पुराना, सीलन भरा छोटा सा घर था। यह घर था सोनाक्षी का।सोनाक्षी, जिसके चेहरे पर गोण्डा, उत्तर प्रदेश की सादगी थी, लेकिन आँखों में दिल्ली के सपने चमकते थे। उसके पिता रामअवतार दिहाड़ी मज़दूर थे। पत्थर उठाते-उठाते उनके हाथ इतने सख्त हो गए थे कि जब वे सोनाक्षी के सिर पर प्यार से हाथ फेरते, तो उनकी हथेली की रगड़ साफ़ महसूस होती थी। रोज़ ...Read More