यह कहानी काल्पनिक है। इसका किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है। यदि किसी व्यक्ति, स्थान या घटना से कोई समानता मिलती है तो वह मात्र एक संयोग है।" वर्ष 2004एक आदमी रेलवे फाटक पर काम करता है। उसका काम फाटक को बंद करना होता है।एक दिन उसका बेटा आता है।बाप और बेटा दोनों दारू पीते हैं, मुर्गा खाते हैं, आपस में हँसी-मज़ाक करते हैं और सोने चले जाते हैं।रात क़रीब 2 या 3 बजे होंगे।
शापित फाटक - 1
यह कहानी काल्पनिक है। इसका किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है। यदि किसी व्यक्ति, स्थान घटना से कोई समानता मिलती है तो वह मात्र एक संयोग है। वर्ष 2004एक आदमी रेलवे फाटक पर काम करता है। उसका काम फाटक को बंद करना होता है।एक दिन उसका बेटा आता है।बाप और बेटा दोनों दारू पीते हैं, मुर्गा खाते हैं, आपस में हँसी-मज़ाक करते हैं और सोने चले जाते हैं।रात क़रीब 2 या 3 बजे होंगे।तभी उसका बेटा उठता है और सामने से फावड़ा उठाता है और बाप के ...Read More
शापित फाटक - 2
यह कहानी पूरी तरह कल्पनिक है।किसी भी वास्तविक व्यक्ति, घटना या स्थान से इसका कोई संबंध नहीं है।फाटक की के बाद गांव में एक अजीब सी शांति थी। लोग सोचते थे कि अब सब खत्म हो गया है, कि शाप कहीं दबी पड़ा है और फिर कभी किसी पर हमला नहीं करेगा। लेकिन बुज़ुर्ग लोग आज भी कहते थे कि कुछ जगहें सिर्फ़ खामोशी नहीं रखतीं, बल्कि वह अपने भीतर दर्द, डर और पुरानी यादें जिंदा रखती हैं। फाटक से थोड़ी दूर एक पुरानी सड़क थी, जिसे दिन में लोग आम रास्ता मानते थे, लेकिन जैसे ही रात होती, ...Read More