कुछ क्षण के लिए ऐसा प्रतीत हुआ जैसे वक्त ने खुद को रोक लिया हो। पेड़ से गिरती ओस की बूंद भी जैसे हवा में झूलने लगी। तभी एक तेज हवा का झोंका आया। जिसने मेरा भ्रम तोड़ दिया मैं झपट कर आगे की ओर बढ़ा लेकिन देखते ही देखते वो परछाई मेरी आंखो से ओझ हो गई। मैंने इधर उधर बहुत ढूंढा मगर वहां कोई नहीं था। मैं वापस अपने काम पर चला गया…..।जतिन अपनी घड़ी में समय देखता हुआ। स्टेशन की ओर झपट कर चल रहा था कि कहीं उसकी ट्रेन न छूट जाएं।
ज़िंदगी की खोज - 1
कुछ क्षण के लिए ऐसा प्रतीत हुआ जैसे वक्त ने खुद को रोक लिया हो।पेड़ से गिरती ओस की भी जैसे हवा में झूलने लगी। तभी एक तेज हवा का झोंका आया। जिसने मेरा भ्रम तोड़ दिया मैं झपट कर आगे की ओर बढ़ा लेकिन देखते ही देखते वो परछाई मेरी आंखो से ओझ हो गई। मैंने इधर उधर बहुत ढूंढा मगर वहां कोई नहीं था। मैं वापस अपने काम पर चला गया…..।जतिन अपनी घड़ी में समय देखता हुआ। स्टेशन की ओर झपट कर चल रहा था कि कहीं उसकी ट्रेन न छूट जाएं।आज उसे अपने दफ़्तर जल्दी पहुंचना ...Read More
ज़िंदगी की खोज - 2
तारा का जवाब देना उसे अपना अपमान लग रहा था। बिना बात के ही उन दोनों में तू तू मैं शुरू हो गई।जतिन बोला… हम अच्छा कमाते हैं, हमारे हिसाब से सबकुछ है। तुम सामाजिक कार्य करना छोड़ क्यों नहीं देती? आख़िर दूसरों की मदद करने से तुम्हें क्या मिलता है? मेरे सारे दोस्तों की शादी हो गई है। सब अपने बीबी बच्चों के साथ खुश हैं।हमारे देखो अभी तक बच्चा नहीं है। क्या तुम नहीं चाहती कि हमारा परिवार पूरा हो।कुछ देर शांत रहने के बाद तारा ने कहा… मैं अपना काम नहीं छोडूंगी, मुझे सुकून मिलता है। ...Read More