अध्याय 1: धुंध में लिपटा अतीत"यह उन दिनों की बात है..."जब कसौली के पहाड़ों पर धुंध इतनी गहरी होती थी कि हाथ को हाथ भी दिखाई नहीं देता था। चिड़ियों के चहकने से बहुत पहले, सुबह की पहली किरण जब देवदार के विशाल पेड़ों से छनकर ज़मीन पर पड़ती, तो ऐसा लगता था मानो प्रकृति ने सोने की चादर बिछा दी हो।गाँव के किनारे पर बना वह छोटा सा लकड़ी का घर, जिसकी ढलवा छत पर हरी काई जमी हुई थी, देव का आशियाना था। देव उस समय महज़ बारह साल का था। बिना चप्पलों के गीली घास पर दौड़ना,