बांसुरी की धुन - भाग 9

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भाग : 09धर्म किसका है?सिनाराम मुर्मू कुछ क्षण तक बिल्कुल मौन खड़े रहे।बरामदे में बैठे लोगों की निगाहें अब उन्हीं पर टिकी थीं।बाहर मंदिर की घंटी की अंतिम ध्वनि भी धीरे-धीरे वातावरण में विलीन हो चुकी थी। पेड़ों के बीच से आती हवा पत्तियों को हिला रही थी, लेकिन बरामदे के भीतर जैसे समय ठहर गया था।सिनाराम ने गहरी साँस ली।फिर बोले—सिनाराम: “रावण, तुम्हारा प्रश्न सुनने में सरल है, लेकिन उसके पीछे बहुत बड़ी बात छिपी है। मनुष्य अपने पूर्वजों की परंपरा को छोड़कर किसी दूसरे रास्ते पर चले, तो समाज की पहचान का क्या होगा?”रावण दा शांत रहे।सिनाराम ने