लंबे समय बाद मिले दोस्तलेखक: विजय शर्मा एरीसमय की धारा बहती रहती है। लोग बदलते हैं, शहर बदलते हैं, जिम्मेदारियाँ बदलती हैं। लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो दिल के सबसे गहरे कोने में छिपे रहते हैं। वे कभी मरते नहीं, बस इंतज़ार करते हैं—एक फोन कॉल का, एक मुलाकात का, एक हँसी का। यह कहानी उन्हीं दो दिलों की है जो बीस साल के फासले के बाद फिर मिले और साबित किया कि सच्ची दोस्ती समय से बड़ी होती है।उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे—मैनपुरी—में दो घर आमने-सामने थे। एक में रहता था रोहित वर्मा और दूसरे