श्याम का हिसाबजहाँ इंसान का हिसाब खत्म होता है… वहाँ श्याम की कृपा शुरू होती है।️ लेखककान्तिभाई राठौड़ 'बदामिया'--- भूमिकाकहते हैं—जब दुनिया साथ छोड़ देती है, तब खाटू वाला हाथ पकड़ लेता है।जब इंसान अपनी परेशानियों के सामने खड़ा होकर कहता है—“अब मैं क्या करूँ?”तभी कहीं से एक अदृश्य आवाज़ आती है—“तू चिंता मत कर… मैं हूँ ना।”श्री खाटू श्याम जी को करोड़ों भक्त “हारे का सहारा” कहते हैं।क्योंकि जब मनुष्य अपनी शक्ति, अपना धन, अपने संबंध और अपनी सारी कोशिशें लगा देने के बाद भी हार जाता है…तब भी उसकी उम्मीद खत्म नहीं होती।क्योंकि उसे विश्वास होता है—“मेरे