“दो निवाले सम्मान के” उपशीर्षककभी-कभी भूख भोजन से नहीं, इंसानियत से मिटती है।--- भूमिकाहम अक्सर घर में भोजन बनाते हैं।परिवार के साथ खाते हैं।त्योहार आते हैं तो तरह-तरह की मिठाइयाँ बनती हैं।लेकिन कई बार भोजन बच जाता है।मिठाई बच जाती है।और हम बिना ज्यादा सोचे उसे अलग कर देते हैं।हमारे लिए वह केवल बचा हुआ भोजन हो सकता है,लेकिन किसी भूखे परिवार के लिए वही भोजन उस दिन की सबसे बड़ी खुशी बन सकता है।किसी बच्चे के लिए मिठाई का छोटा-सा डिब्बा केवल मिठाई नहीं होता—वह उसके चेहरे पर आने वाली मुस्कान होती है।और किसी गरीब पिता के लिए किसी