बेदाग होना ही मुकम्मल नहीं

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जिंदगी में बेदाग और बिल्कुल सही दिखना बहुत आसान है, बशर्ते आपने कभी मैदान में उतरकर कोई काम न किया हो।आज मेज़ पर बिखरे सामान के बीच किसी के लिए पेंसिल ढूंढते हुए मेरे हाथ में दो पेंसिलें आईं। पहली पेंसिल बिल्कुल नई थी—उसकी नोक सधी हुई, चमकीला रंग और उस पर इस्तेमाल का एक भी निशान नहीं था। दूसरी पेंसिल घिस-घिसकर बहुत छोटी हो चुकी थी, उसकी लकड़ी पर उंगलियों के दबाव के निशान थे और वह इतनी बार तराशी जा चुकी थी कि शायद एक या दो बार के छिलने के बाद उसका वजूद खत्म हो जाता।मैंने बिना