धुंध के पीछे - 4

  • 1.6k
  • 597

भाग 4: चेहरे पर से हटता नकाबकमरे की हवा अचानक इतनी भारी हो गई थी कि मुस्कान को लगा उसका दम घुट जाएगा। कंधे पर रखा इंस्पेक्टर आदिल का वो ठंडा हाथ किसी सांप की तरह महसूस हो रहा था। चंदन के इत्र की वो तेज़, तीखी महक और आदिल के कदमों का वो जानबूझकर लाया गया लंगड़ापन... सब कुछ चीख-चीखकर कह रहा था कि कत्ल वाली रात हवेली के पिछले दरवाज़े पर दानिश नहीं, बल्कि आदिल खड़ा था।मुस्कान ने पूरी ताकत लगाकर अपने चेहरे के खौफ को छुपाया। वह जानती थी कि अगर इस वक्त उसने ज़रा सी भी