गंगा जी ने संयोगिता के माता-पिता से बात की। शुरू में वे बहुत हिचकिचाए। उन्हें लगा कि विराट अभी भी संपूर्णा के शोक में है और यह शादी जल्दबाजी में हो रही है। लेकिन गंगा जी के आग्रह और विवान की खुशी को देखते हुए, वे बड़ी मुश्किल से माने।संयोगिता इस पूरे प्रस्ताव पर चुप रही। उसने न 'हाँ' कहा, न 'ना'। उसकी खामोशी को सबने सहमति समझ लिया। असल में, उसके पास कोई चारा नहीं था। वह अजनबी की धमकियों से घिरी हुई थी। अगर वह विराट से दूर जाती, तो विवान खतरे में पड़ सकता था। और अगर