अहमदाबाद के चर्चे

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अहमदाबाद के चर्चे            अहमदाबाद में बिताये उन दिनों को भुलाना बड़ा मुश्किल है. तब वह मुसीबत थी कठिन समय था  केवल मेरा ही नहीं बल्कि सभी का. वे कोई सामान्य दिन नहीं थे साधारण समय नहीं था. उन दिनों की यादों पोटली से ज्यादा वह यादों की ऐसी गुल्लक है  तरह जिसमे  तरह तरह के पुराने सिक्के हों, जो अब बाज़ार नहीं चलते पर पर उनकी खनक मन में गुदगुदी करती है.      बावन साल यूँ ही गुजर गए है. इतनी पुरानी बातें हैं जो अभी तक मन के तहखानों के किसी कोने में बंधी पड़ी थी. उन्हें